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2000 हेक्टेयर में नकदी फसल, किसान बने नजीर
Updated Fri, 26 Oct 2018 12:50 AM IST
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ज्ञानपुर। नकदी और अलग तरह की फसलों की खेती कर जिले के कई किसान अन्य किसानों के लिए नजीर बन गए हैं। जिले में दो हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में हल्दी, कोहड़ा, मिर्च और अन्य नकदी फसलों और सब्जी की खेती की जा रही है। कई किसान जैविक तरीके से खेती कर कम लागत में मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। घाटमपुर और चकसुंदरपुर समेत कई गांवों में अलग तरीके से खेती कर रहे किसानों की कृषि विभाग संग शासन स्तर तक सराहना मिल रही है। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही है। बीज, सिंचाई उपकरण समेत अन्य सामानों पर अनुदान दिया जा रहा है। जिले में वैसे तो ज्यादातर रकबे में गेहूं और धान की ही खेती होती है, लेकिन कुछ किसान परंपरागत खेती से हटकर नकदी खेती करने में विश्वास करते हैं। ज्ञानपुर से सटे घाटमपुर के किसान प्रगतिशील किसान अरविंद मौर्य ने आठ बीघे मिर्च की खेती की है। उन्होंने बताया कि प्रति बीघे 40 हजार की लागत आई, जबकि ढाई लाख की कमाई हुई। गर्मी के मौसम में वह तरबूज की खेती करेंगे। चकसुंदर गांव के प्रगतिशील किसान एवं कृषि विशेषज्ञ राम अकबाल तिवारी ने 10 बीघे कोहड़े और चार बीघे शकरकंद की खेती की है। कोहड़े में प्रति बीघे 1500 रुपये की लागत आई, जबकि कमाई 30 हजार प्रति बीघे हो रही है। इसी तरह शकरकंद में 10 हजार खर्च के मुकाबले 80 हजार प्रति बीघे की बचत हो रही है। आठ बीघे में सरसों की खेती करने वाले राम अकबाल ने बताया कि प्रति बीघा दो हजार लागत आती है, जबकि कमाई 32 हजार 500 रुपये मिल रहा है। खमरिया क्षेत्र के घटमापुर के किसान किशोर चंद्र बरनवाल हल्दी समेत कई जैविक खेती कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। अलसी की खेती में भी अच्छी खासी कमाई कर रहे किशोर चंद्र ने बताया कि नकदी खेती किसानों की आय को दो गुना के बजाए तीन से चार गुना करेगी। कुरमैचा के किसान अंबरीश चतुर्वेदी काकून की खेती करते हैं, जो आयुर्वेदिक दवाओं में काम आती है।
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