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हत्या के चार दोषियों को आजीवन कारावास
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:37 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
भूमि विवाद में हत्या के 33 साल पुराने मामले में चार दोषियों को शनिवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। जिला जज की अदालत ने यह फैसला सुनाया। मामला सुरियावां थानाक्षेत्र के बेला गांव का है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पड़ोसी जनपद जौनपुर के बरसठी थानाक्षेत्र के जमुनीपुर गांव निवासी राजनाथ ने 13 अक्टूबर 1984 को सुरियावां थाने में तहरीर दी थी। इसमें आरोप लगाया था कि उसका भाई समरनाथ जब खेत में मड़हा लगाने के लिए खंभा बना रहा था, उसी समय सुरियावां थानाक्षेत्र के बेला गांव निवासी त्रिलोकी, सुभाष, अमरनाथ, संता, लालमोहन, कंता, आद्या प्रसाद और निकियावन लाठी और लोहे के रॉड लेकर पहुंचे और गालीगलौज करते हुए जान से मारने की नीयत से मेरे भाई पर हमला कर दिया। उसे बुरी तरह से पीटा गया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे सुरियावां के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद सुरियावां थाने की पुलिस ने जानलेवा हमले का केस दर्ज किया। हालत में सुधार न होने पर घायल समरनाथ को वाराणसी के कबीरचौरा अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां 16 अगस्त को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद, पुलिस ने केस को हत्या में तब्दील कर दिया। न्यायालय में गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद दोनों पक्षों के तर्कों को सुनकर जनपद न्यायाधीश कुलदीप कुमार की अदालत ने त्रिलोकी, कंता प्रसाद, आद्या प्रसाद और सुभाष को आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 11 हजार जुर्माना भी लगाया। जबकि एक आरोपी की मौत हो चुकी है और तीन आरोपी बरी कर दिए गए। अभियोजन पक्ष से पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता राकेश यादव ने की।
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भूमि विवाद में हत्या के 33 साल पुराने मामले में चार दोषियों को शनिवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। जिला जज की अदालत ने यह फैसला सुनाया। मामला सुरियावां थानाक्षेत्र के बेला गांव का है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पड़ोसी जनपद जौनपुर के बरसठी थानाक्षेत्र के जमुनीपुर गांव निवासी राजनाथ ने 13 अक्टूबर 1984 को सुरियावां थाने में तहरीर दी थी। इसमें आरोप लगाया था कि उसका भाई समरनाथ जब खेत में मड़हा लगाने के लिए खंभा बना रहा था, उसी समय सुरियावां थानाक्षेत्र के बेला गांव निवासी त्रिलोकी, सुभाष, अमरनाथ, संता, लालमोहन, कंता, आद्या प्रसाद और निकियावन लाठी और लोहे के रॉड लेकर पहुंचे और गालीगलौज करते हुए जान से मारने की नीयत से मेरे भाई पर हमला कर दिया। उसे बुरी तरह से पीटा गया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे सुरियावां के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद सुरियावां थाने की पुलिस ने जानलेवा हमले का केस दर्ज किया। हालत में सुधार न होने पर घायल समरनाथ को वाराणसी के कबीरचौरा अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां 16 अगस्त को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद, पुलिस ने केस को हत्या में तब्दील कर दिया। न्यायालय में गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद दोनों पक्षों के तर्कों को सुनकर जनपद न्यायाधीश कुलदीप कुमार की अदालत ने त्रिलोकी, कंता प्रसाद, आद्या प्रसाद और सुभाष को आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 11 हजार जुर्माना भी लगाया। जबकि एक आरोपी की मौत हो चुकी है और तीन आरोपी बरी कर दिए गए। अभियोजन पक्ष से पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता राकेश यादव ने की।
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