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कारखानों में फंसे बुनकरों से संचालकों की कमर टूटी

Tue, 21 Apr 2020 08:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2020 08:27 PM IST
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1000 weavers stranded in factories, operators broken
भदोही। कोविड-19 से बचाव के लिए चल रहे लाकडाउन के चलते जिले में फंसे कालीन बुनकर और मजदूर कारखाना संचालकों के लिए जंजाल बन गए हैं। एक-एक कारखाने में 20 से 30 लोग फंसे हुए हैं। इस हिसाब से जिले के कालीन कारखानों में लगभग एक हजार बुनकर और श्रमिक फंसे हुए हैं। न तो वे काम कर पा रहे हैं, ना ही घर जा पा रहे हैं। ऐसे में उनके भोजन पानी की व्यवस्था करते-करते कारखाना संचालकों की हालत पतली हो चली है।
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जनपद के भदोही, गोपीगंज, खमरिया, चौरी, नईबाजार, सुरियावां, ज्ञानपुर आदि में दो सौ से अधिक कालीन कारखानों में बुनाई का कार्य कराया जाता है। इन कारखानों में संचालक निर्यातकों के यहां से ठेके पर कच्चा माल लाकर लूमों पर बुनाई कराते हैं। कार्यरत बुनकरों में बंगाल, बिहार, झारखंड के अलावा उप्र के विभिन्न जनपदों के बुनकर काम करते हैं। अचानक हुए लाकडाउन से बड़ी संख्या में लोग यहीं फंस कर रह गए। प्रथम लाकडाउन तक तो किसी कारखाना संचालक ने कुछ नहीं कहा और बुनकरों को खाना-पीना देते रहे, लेकिन लाकडाउन 2.0 घोषित होने के बाद से संचालकों की कमर टूट गई है।
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कारखाना संचालकों का कहना है कि हम लोग निर्यातक नहीं हैं। हमारी भी एक सीमा है। हम कब तक उन्हें खिला पाएंगे। अब तो वह नौबत आ गई है कि हम अपने परिवार का पेट भरने लायक नहीं रह गए हैं। तो हम बुनकरों को क्या खिलाएंगे? उन्हें मलाल है कि उनके लिए कोई निर्यातक भी नहीं सोच रहा है। अपनी समस्या को लेकर संचालक खुलकर आगे भी नहीं आना चाहते। उनका कहना है कि जब तक चल सकता है तब तक चलाएंगे आगे देखा जाएगा।
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उधर इस बारे में पूछे जाने पर आल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के अध्यक्ष ओएन मिश्र ने कहा कि मुझे इस बारे में पूरी जानकारी है। संकट में कारखाना संचालक न केवल उनके साथ खड़े हैं, बल्कि भोजन पानी से लेकर हर सहूलियत प्रदान कर रहे हैं। बुनकरों के लिए प्रशासन स्तर से क्या हो सकता है, इस पर डीएम से विचार करेंगे।

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हमारे पास ऐसे लोगों के लिए निर्देश है, जो बेसहारा हैं और सड़क पर आ गए हैं। कारखानों में जो लोग हैं संचालक की जिम्मेदारी है कि वह उन्हें अपने यहां रखें और भोजन उपलब्ध कराएं। इसमें कालीन निर्यातक आपस में परस्पर सहयोग कर सकते हैं। आशीष कुमार मिश्रा, एसडीएम भदोही
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