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खेतों में लहलहाएगी जिंक से भरपूर गेहूं की फसल

Mon, 22 Nov 2021 11:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 11:27 PM IST
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Zinc rich wheat crop will flourish in the fields
खेतों में लहलहाएगी जिंक से भरपूर गेहूं की फसल
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150 हेक्टेयर में की जाएगी पीबीडब्ल्यू एक-जेडएन गेहूं की खेती
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ शरीर को स्वस्थ रखेगी
बस्ती। जिले में इस बार जिंक से भरपूर प्रजाति के गेहूं की खेती की जाएगी। इसके लिए कृषि विभाग ने करीब 150 क्विंटल बीज मंगवाया है। किसानों के अलावा इसकी खेती राजकीय प्रक्षेत्रों में भी की जाएगी। यह प्रजाति पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने 2017 में तैयार किया था। जिंक शरीर के विकास में महत्वपूर्ण माना जाता है।
जिले में पहली बार पीबीडब्ल्यू एक-जेडएन प्रजाति के गेहूं का बीज 14 ब्लॉकों के राजकीय बीज गोदामों से किसानों को वितरित किया जा रहा है। बफर गोदाम प्रभारी हेरंब नाथ त्रिपाठी ने बताया कि पीबीडब्ल्यू एक-जेडएन प्रजाति के गेहूं की खेती इस बार करीब 150 हेक्टेयर में की जाएगी। 10 क्विंटल बीज प्रति राजकीय बीज गोदाम को उपलब्ध कराया गया है। जिला कृषि अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि इस प्रजाति के गेहूं की खेती सेहत की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक स्तर पर रकबा कम रखा गया है। यदि यह प्रजाति जिले की जलवायु के लिए मुफीद रही तो अगली बार रकबा बढ़ाया जाएगा।
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पीबीडब्ल्यू एक-जेडएन प्रजाति के गेहूं में जिंक की मात्रा अधिक होती है। इसकी पैदावार 22.5 क्विंटल प्रति एकड़ है। इसके पौधे 103 सेंटीमीटर लंबे होते हैं। इसे तैयार होने में 151 दिन लगते हैं। यह पीला और भूरा फंफूद रोग अवरोधी है।
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‘रोग प्रतिरोगक क्षमता मजबूत करता है जिंक’
राजकीय होम्योपैथी चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. दीपक कुमार पांडेय ने बताया कि शरीर में जिंक की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। इससे लोगों को बीमारियां जल्द पकड़ लेती हैं। जिंक की कमी से स्तरन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, एलर्जी, भूख न लगना, डायरिया, स्किन रोग, आंख में संक्रमण, बाल झड़ना, नपुंसकता, नाखूनों का नाजुक होना, बालों में रूसी, कद छोटा रहना, बांझपन, स्वाद लेने में कमी, बार-बार जुकाम होना आदि रोग होते हैं। ऐसे में जिंक से भरपूर गेहूं प्राकृतिक रूप से जिंक की पूर्ति का अच्छा विकल्प हो सकता है।
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