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Basti News: टच डीएनए पद्धति से पता लगाएंगे बच्चे की वंशावली
Mon, 18 Dec 2023 12:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 18 Dec 2023 12:36 AM IST
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डीएनए मैच कराने के लिए जांच को भेजा जाएगा जैकेट का सैंपल
न्यायालय के आदेश पर शनिवार को खोदा गया था बच्चे का कब्र
निजी नर्सिंग होम में प्रधान की पत्नी का 19 महीने पहले हुआ था प्रसव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बच्चे की वंशावली पता करने के लिए टच डीएनए पद्धति का इस्तेमाल किया जाएगा। इसीलिए दफन किए गए स्थान से मिले जैकेट का नमूना डीएनए जांच के लिए भेजा जाएगा। जानकार बताते हैं कि हम जब किसी चीज को छूते हैं तो हमारी स्किन की डेड कोशिकाएं उस पर चिपक जाती हैं। इन सैंपल्स को लो-लेवल डीएनए या टच डीएनए कहते हैं। इसके जरिये इंसान की वंशावली के बारे में पता लगाया जाएगा। एसडीएम सदर गुलाब चंद्र ने बताया कि जैकेट के नमूने की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
कोर्ट के आदेश पर 19 माह पहले कटौधा व अशरफपुर के बीच रजवाहा के पास दफनाए गए शिशु की शव की खोज के लिए शनिवार को करीब ढाई घंटे तक की खोदाई की गई। मगर, शव का अवशेष नहीं मिला था। वहां से एक जैकेट मिली थी। माना जा रहा है कि उसी जैकेट में लपेटकर नवजात को दफन किया गया था।
दरअसल, मुंडेरवा थाना क्षेत्र के हल्लौर नगरा गांव निवासी ऋषिराज ने 19 महीने पहले लालगंज क्षेत्र के सजनाखोर स्थित एक निजी अस्पताल में पत्नी का प्रसव कराया था। आरोप है कि डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों ने उनकी पत्नी अमृता के प्रसव के दौरान आंख पर पट्टी बांध दिया था। इसके बाद बताया गया कि उसने मृत बालिका को जन्म दिया है। जबकि उसे जिंदा बेटा पैदा हुआ था। इस बाबत ऋषिराज ने न्यायालय में वाद दायर किया था। इसकी सुनवाई के दौरान न्यायालय ने आदेश दिया था कि जिस जगह मृत बच्ची के शव को दफन किया गया था, उसकी खोदाई करके शव निकाला जाए और उसका डीएनए जांच कराया जाए।
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आदेश के अनुपालन में शनिवार दोपहर बाद सीओ प्रीति खरवार व नामित मजिस्ट्रेट एसडीएम सदर गुलाब चंद्र फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद अधिकारी वादी ऋषिराज, लालगंज थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह शव के दफनाए स्थल कटौधा व अशरफपुर के बीच रजवाहा के पास पहुंचे। टीम के सामने उस स्थल की खोदाई शुरू हुई। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद शव के अवशेष तो नहीं मिले, मगर एक संदिग्ध जैकेट टीम को जरूर मिला।
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न्यायालय के आदेश पर शनिवार को खोदा गया था बच्चे का कब्र
निजी नर्सिंग होम में प्रधान की पत्नी का 19 महीने पहले हुआ था प्रसव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बच्चे की वंशावली पता करने के लिए टच डीएनए पद्धति का इस्तेमाल किया जाएगा। इसीलिए दफन किए गए स्थान से मिले जैकेट का नमूना डीएनए जांच के लिए भेजा जाएगा। जानकार बताते हैं कि हम जब किसी चीज को छूते हैं तो हमारी स्किन की डेड कोशिकाएं उस पर चिपक जाती हैं। इन सैंपल्स को लो-लेवल डीएनए या टच डीएनए कहते हैं। इसके जरिये इंसान की वंशावली के बारे में पता लगाया जाएगा। एसडीएम सदर गुलाब चंद्र ने बताया कि जैकेट के नमूने की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
कोर्ट के आदेश पर 19 माह पहले कटौधा व अशरफपुर के बीच रजवाहा के पास दफनाए गए शिशु की शव की खोज के लिए शनिवार को करीब ढाई घंटे तक की खोदाई की गई। मगर, शव का अवशेष नहीं मिला था। वहां से एक जैकेट मिली थी। माना जा रहा है कि उसी जैकेट में लपेटकर नवजात को दफन किया गया था।
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दरअसल, मुंडेरवा थाना क्षेत्र के हल्लौर नगरा गांव निवासी ऋषिराज ने 19 महीने पहले लालगंज क्षेत्र के सजनाखोर स्थित एक निजी अस्पताल में पत्नी का प्रसव कराया था। आरोप है कि डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों ने उनकी पत्नी अमृता के प्रसव के दौरान आंख पर पट्टी बांध दिया था। इसके बाद बताया गया कि उसने मृत बालिका को जन्म दिया है। जबकि उसे जिंदा बेटा पैदा हुआ था। इस बाबत ऋषिराज ने न्यायालय में वाद दायर किया था। इसकी सुनवाई के दौरान न्यायालय ने आदेश दिया था कि जिस जगह मृत बच्ची के शव को दफन किया गया था, उसकी खोदाई करके शव निकाला जाए और उसका डीएनए जांच कराया जाए।
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आदेश के अनुपालन में शनिवार दोपहर बाद सीओ प्रीति खरवार व नामित मजिस्ट्रेट एसडीएम सदर गुलाब चंद्र फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद अधिकारी वादी ऋषिराज, लालगंज थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह शव के दफनाए स्थल कटौधा व अशरफपुर के बीच रजवाहा के पास पहुंचे। टीम के सामने उस स्थल की खोदाई शुरू हुई। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद शव के अवशेष तो नहीं मिले, मगर एक संदिग्ध जैकेट टीम को जरूर मिला।