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Basti News: धरती हिली तो कलेजा भी दहला... दहशत में बीती रात
Sun, 05 Nov 2023 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 05 Nov 2023 01:02 AM IST
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भूकंप के झटके महसूस होने पर घर के बाहर खड़े लोग।
- शुक्रवार की रात 11:34 बजे लगा भूकंप का झटका, घरों से बाहर निकल आए लोग
- दोबारा झटका आने की आशंका में उड़ गई थी लोगों की नींद, जागकर बिताई रात
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शुक्रवार की रात भोजन के बाद सोने का वक्त था। कुछ परिवार के साथ हल्की नींद में थे, तो कुछ विस्तर पर सोने की तैयारी में रहे। तभी अचानक सब हिलने लगा। मेज पर पानी से भरे गिलास लुढ़क कर नीचे गिर गए। जगने वालों का माथा चकराया तो एहसास हुआ कि यह तो भूंकप का झटका है। लोग शोर मचाने लगे। जो जैसे उठा वैसे ही बाहर की ओर भागा। काॅलोनियों और मोहल्लों में अजीब सी हलचल देखने को मिली।
वाकया शुक्रवार की रात 11:34 बजे का है। भूकंप के तेज झटके से धरती हिलने लगी। जिले में इसकी तीव्रता 5.9 तक आंकी गई। करीब 30 सेकेंट तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। अचानक घरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शोर मचाते हुए लोग बाहर का रास्ता ढूंढने लगे। जो समझा वह तो भागा ही जो नींद में रहे शोर सुनकर वह भी बाहर की ओर भागने लगे। कुछ ही देर में बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सभी घर, मकान छोड़ बाहर खुले मैदान में आ खड़े हुए।
कंपन खत्म होने के काफी देर बाद भी लोगों में घबराहट बनी रही। लोग भय के चलते घरों में नहीं प्रवेश कर रहे थे। आधा घंटे तक लोगों ने भूकंप के दूसरे झटके का इंतजार किया। थोड़ा राहत मिली तो घर से दूर रहने वाले करीबियों की चिंता सताने लगी। लोग फोन के सहारे एक-दूसरे का हालचाल जानने लगे। हर ओर से भूकंप आने की खबर प्रसारित होने लगी। सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की अफवाहें तैरनी लगीं। कयास लगाया जा रहा था कि दूसरा झटका और तेज होगा। इससे दहशत में रहे। कई लोगों को पूरी रात नींद नहीं आई। लोगों के जेहन में दहशत व्याप्त रही।
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सुबह होते ही शुरू हो गई भूकंप की चर्चा
जब शनिवार को सुबह हुई तो पहली चर्चा भूकंप को लेकर छिड़ी। हर कोई एक-दूसरे से यही पूछता नजर आया कि आपको भूकंप का एहसास हुआ था। कुछ ने हां में सिर हिलाया तो कुछ ने कहा कि नहीं हम तो सो गए थे। बाद में जब शोर हुआ तब पता चला। इसी के साथ चर्चा आगे बढ़ती गई। रात का वाकया लोग एक-दूसरे से साझा करते नजर आए। जो घरों में सोए रह गए उन्हें पड़ोसियों ने न जगने की उलाहना भी दी। भूकंप के झटके का एहसास करने वालों ने बताया कि झटका तेज था। अचानक धरती हिलने से दिल दहल गया।
...
जानिये, इनकी जुबानी भूकंप की दास्तां..
बिस्तर पर लेटकर मोबाइल फोन देख रहा था। अचानक बेड हिलने लगा। खटपट की आवाज भी होने लगी। मैं कुछ समझ पाता तभी पत्नी बोली- बेड क्यो हिला रहा है? बात समझ में आ गई। मैं बोला.. भागो यह भूकंप है। इसके बाद तो घर में शोर मचने लगा। माता-पिता और बच्चे सब कमरों से निकलकर बाहर आ गए। फटाफट गेट खुला और सभी लोग मकान छोड़ खुले मैदान में पहुंच गए। धीरे-धीरे आसपास के लोग भी भागकर वहीं आए। काफी देर तक भूकंप पर ही चर्चा हुई। करीब आबा घंटे बाद हम लोग घर में गए। मगर, दहशत पूरी रात बनी रही।
- दिवाकर मणि त्रिपाठी
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अस्पताल में मची भगदड़
भूकंप आने के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों में भी भगदड़ मच गई। जैसे ही लोगों को भूकंप के झटके का एहसास हुआ तीमारदार और मरीज वार्ड से बाहर की ओर भागने लगे। वहां तैनात स्टाफ, कर्मचारी सभी वार्डों से निकलकर परिसर में आ गए। गंभीर रूप घायल मरीज ही बेड पर बचे रह गए। मगर, वह भी भूकंप का झटका महसूस कर चिल्लाने लगे। जिला अस्पताल का मेडिकल वार्ड लगभग खाली हो गया था। चिल्ड्रेन वार्ड प्रथम तल पर होने की वजह से शोरगुल के बीच भर्ती बच्चों को लेकर लोग तेजी के साथ जीने से उतरकर बाहर की ओर भागते नजर आए। महिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में भी यहीं दृश्य देखने को मिला। चलने-फिरने वाले मरीज तीमारदारों के साथ परिसर में आ गए। आधी रात तक अस्पताल परिसरों में भीड़ लगी रही।
...
जर्जर आवासीय काॅलोनियों में बनी रही दहशत
भूकंप आने की वजह से मुख्यालय की पुरानी जीर्णशीर्ण सरकारी काॅलोनियों में पूरी रात दहशत बनी रही। सिंचाई विभाग काॅलोनी गांवगोड़िया, तहसील के पास स्थित टाइप- 2 , टाइप- 3 कर्मचारी आवास, कोतवाली के पीछे स्थित पुलिस कर्मियों के आवासीय भवन काफी जर्जर हो चुके हैं। यहां रहने वाले कर्मचारी और उनके परिवारीजन भूकंप के झटके महसूस करने के बाद बाहर आ गए। उन्हें इस बात की चिंता सता रही थी कि दोबारा कहीं भूकंप आया तो उनके जीर्णशीर्ण आवास गिर सकते हैं। बहरहाल इस तरह की कोई घटना सामने नहीं आई।
...
लोगों से भर गए मैदान और सार्वजनिक जगह
भूकंप का झटका महसूस करते ही मोहल्लों के मैदान, सार्वजनिक एवं खाली जगह लोगाें से भर गए। महिलाएं, बच्चे, पुरुष सभी सुरक्षित स्थान तलाश कर खुले मैदान में आ गए। बच्चे कुछ समझ नहीं पा रहे थे, लेकिन बड़ों में दहशत देखकर वह भी सन्न रहे। शोरगुल की आहट पाकर नवजात बच्चे रोने लगे। माताएं उन्हें चुप करा रही थीं।
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अच्छी तरह याद है आठ साल पहले आया था भूकंप
मड़वानगर चौराहे पर सुबह चर्चा के दौरान युवक धर्मेंद्र ने कहा कि संयोग है कि हम अपने जीवन में दो बार भूकंप का झटका महसूस कर सके हैं। आठ साल पहले 25 अप्रैल 2015 को दिन में ही भूकंप का झटका देर तक महसूस किया गया था। तब धरती करीब एक मिनट तक कंपन की थी। उस समय का दृश्य और भयावह था। विद्युत पोल, मकान, टीनशेड सब हिल रहे थे। घर के आसपास भगदड़ मच गई थी। कई दिन तक लोग दहशत में थे। इस बार रात में भूकंप आया, लेकिन तब भी हम जग रहे थे। यह झटका भी दिल दहलाने वाला था। मेज पर रखा पानी का जग गिरा तो हमें लगा बिल्ली आ गई। मगर, जब धरती हिलने का एहसास हुआ तब भूकंप समझ में आया।
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- दोबारा झटका आने की आशंका में उड़ गई थी लोगों की नींद, जागकर बिताई रात
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शुक्रवार की रात भोजन के बाद सोने का वक्त था। कुछ परिवार के साथ हल्की नींद में थे, तो कुछ विस्तर पर सोने की तैयारी में रहे। तभी अचानक सब हिलने लगा। मेज पर पानी से भरे गिलास लुढ़क कर नीचे गिर गए। जगने वालों का माथा चकराया तो एहसास हुआ कि यह तो भूंकप का झटका है। लोग शोर मचाने लगे। जो जैसे उठा वैसे ही बाहर की ओर भागा। काॅलोनियों और मोहल्लों में अजीब सी हलचल देखने को मिली।
वाकया शुक्रवार की रात 11:34 बजे का है। भूकंप के तेज झटके से धरती हिलने लगी। जिले में इसकी तीव्रता 5.9 तक आंकी गई। करीब 30 सेकेंट तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। अचानक घरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शोर मचाते हुए लोग बाहर का रास्ता ढूंढने लगे। जो समझा वह तो भागा ही जो नींद में रहे शोर सुनकर वह भी बाहर की ओर भागने लगे। कुछ ही देर में बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सभी घर, मकान छोड़ बाहर खुले मैदान में आ खड़े हुए।
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कंपन खत्म होने के काफी देर बाद भी लोगों में घबराहट बनी रही। लोग भय के चलते घरों में नहीं प्रवेश कर रहे थे। आधा घंटे तक लोगों ने भूकंप के दूसरे झटके का इंतजार किया। थोड़ा राहत मिली तो घर से दूर रहने वाले करीबियों की चिंता सताने लगी। लोग फोन के सहारे एक-दूसरे का हालचाल जानने लगे। हर ओर से भूकंप आने की खबर प्रसारित होने लगी। सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की अफवाहें तैरनी लगीं। कयास लगाया जा रहा था कि दूसरा झटका और तेज होगा। इससे दहशत में रहे। कई लोगों को पूरी रात नींद नहीं आई। लोगों के जेहन में दहशत व्याप्त रही।
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सुबह होते ही शुरू हो गई भूकंप की चर्चा
जब शनिवार को सुबह हुई तो पहली चर्चा भूकंप को लेकर छिड़ी। हर कोई एक-दूसरे से यही पूछता नजर आया कि आपको भूकंप का एहसास हुआ था। कुछ ने हां में सिर हिलाया तो कुछ ने कहा कि नहीं हम तो सो गए थे। बाद में जब शोर हुआ तब पता चला। इसी के साथ चर्चा आगे बढ़ती गई। रात का वाकया लोग एक-दूसरे से साझा करते नजर आए। जो घरों में सोए रह गए उन्हें पड़ोसियों ने न जगने की उलाहना भी दी। भूकंप के झटके का एहसास करने वालों ने बताया कि झटका तेज था। अचानक धरती हिलने से दिल दहल गया।
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जानिये, इनकी जुबानी भूकंप की दास्तां..
बिस्तर पर लेटकर मोबाइल फोन देख रहा था। अचानक बेड हिलने लगा। खटपट की आवाज भी होने लगी। मैं कुछ समझ पाता तभी पत्नी बोली- बेड क्यो हिला रहा है? बात समझ में आ गई। मैं बोला.. भागो यह भूकंप है। इसके बाद तो घर में शोर मचने लगा। माता-पिता और बच्चे सब कमरों से निकलकर बाहर आ गए। फटाफट गेट खुला और सभी लोग मकान छोड़ खुले मैदान में पहुंच गए। धीरे-धीरे आसपास के लोग भी भागकर वहीं आए। काफी देर तक भूकंप पर ही चर्चा हुई। करीब आबा घंटे बाद हम लोग घर में गए। मगर, दहशत पूरी रात बनी रही।
- दिवाकर मणि त्रिपाठी
...
अस्पताल में मची भगदड़
भूकंप आने के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों में भी भगदड़ मच गई। जैसे ही लोगों को भूकंप के झटके का एहसास हुआ तीमारदार और मरीज वार्ड से बाहर की ओर भागने लगे। वहां तैनात स्टाफ, कर्मचारी सभी वार्डों से निकलकर परिसर में आ गए। गंभीर रूप घायल मरीज ही बेड पर बचे रह गए। मगर, वह भी भूकंप का झटका महसूस कर चिल्लाने लगे। जिला अस्पताल का मेडिकल वार्ड लगभग खाली हो गया था। चिल्ड्रेन वार्ड प्रथम तल पर होने की वजह से शोरगुल के बीच भर्ती बच्चों को लेकर लोग तेजी के साथ जीने से उतरकर बाहर की ओर भागते नजर आए। महिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में भी यहीं दृश्य देखने को मिला। चलने-फिरने वाले मरीज तीमारदारों के साथ परिसर में आ गए। आधी रात तक अस्पताल परिसरों में भीड़ लगी रही।
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जर्जर आवासीय काॅलोनियों में बनी रही दहशत
भूकंप आने की वजह से मुख्यालय की पुरानी जीर्णशीर्ण सरकारी काॅलोनियों में पूरी रात दहशत बनी रही। सिंचाई विभाग काॅलोनी गांवगोड़िया, तहसील के पास स्थित टाइप- 2 , टाइप- 3 कर्मचारी आवास, कोतवाली के पीछे स्थित पुलिस कर्मियों के आवासीय भवन काफी जर्जर हो चुके हैं। यहां रहने वाले कर्मचारी और उनके परिवारीजन भूकंप के झटके महसूस करने के बाद बाहर आ गए। उन्हें इस बात की चिंता सता रही थी कि दोबारा कहीं भूकंप आया तो उनके जीर्णशीर्ण आवास गिर सकते हैं। बहरहाल इस तरह की कोई घटना सामने नहीं आई।
...
लोगों से भर गए मैदान और सार्वजनिक जगह
भूकंप का झटका महसूस करते ही मोहल्लों के मैदान, सार्वजनिक एवं खाली जगह लोगाें से भर गए। महिलाएं, बच्चे, पुरुष सभी सुरक्षित स्थान तलाश कर खुले मैदान में आ गए। बच्चे कुछ समझ नहीं पा रहे थे, लेकिन बड़ों में दहशत देखकर वह भी सन्न रहे। शोरगुल की आहट पाकर नवजात बच्चे रोने लगे। माताएं उन्हें चुप करा रही थीं।
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अच्छी तरह याद है आठ साल पहले आया था भूकंप
मड़वानगर चौराहे पर सुबह चर्चा के दौरान युवक धर्मेंद्र ने कहा कि संयोग है कि हम अपने जीवन में दो बार भूकंप का झटका महसूस कर सके हैं। आठ साल पहले 25 अप्रैल 2015 को दिन में ही भूकंप का झटका देर तक महसूस किया गया था। तब धरती करीब एक मिनट तक कंपन की थी। उस समय का दृश्य और भयावह था। विद्युत पोल, मकान, टीनशेड सब हिल रहे थे। घर के आसपास भगदड़ मच गई थी। कई दिन तक लोग दहशत में थे। इस बार रात में भूकंप आया, लेकिन तब भी हम जग रहे थे। यह झटका भी दिल दहलाने वाला था। मेज पर रखा पानी का जग गिरा तो हमें लगा बिल्ली आ गई। मगर, जब धरती हिलने का एहसास हुआ तब भूकंप समझ में आया।