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ओपेक चिकित्सालय कैली में चार साल से एमआरआई मशीन का इंतजार
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मेडिकल कॉलेज बस्ती।
- फोटो : BASTI
ओपेक चिकित्सालय कैली में चार साल से एमआरआई मशीन का इंतजार
- सचिव चिकित्सा शिक्षा के आश्वासन के बाद भी नहीं मिल सकी मशीन
बस्ती। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली में चार साल से एमआरआई मशीन का इंतजार है। हालांकि पिछले दिनों दौरे पर आए सचिव चिकित्सा शिक्षा ने यहां जल्द ही मशीन देने का वादा किया था, मगर यह वादा भी कागजी ही साबित हुआ और अस्पताल में अब तक एमआरआई मशीन नहीं लग सकी है।
जिले में 2018 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना को हरी झंडी मिली और यह कॉलेज बनकर तैयार हो गया। 2019 से संचालित भी हो रहा है। चार साल से संचालित मेडिकल कॉलेज ने ओपेक चिकित्सालय कैली को ओपीडी तथा अन्य चिकित्सा सेवा के लिए संबद्ध कर लिया है। संबद्धीकरण के बाद यह तय हुआ था कि यहां विभिन्न उपकरण जो बंद पड़े हैं, उन्हें पीपीपी मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत कैली में डायलिसिस संचालित किया जा रहा है। इधर, ओपेक चिकित्सालय कैली को चिकित्सा शिक्षा के तहत संबद्ध कर लिए जाने के बाद से इसके संचालन के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है, मगर अब तक एमआरआई मशीन नहीं मिल सकी है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि कॉलेज को एक एमआरआई मशीन केंद्र सरकार की ओर से संस्तुति कर दी गई है। इसे इमरजेंसी कोविड रिस्पांस पैकेज-2 के तहत दिया गया है। कॉलेज प्रशासन ने मशीन की मांग भेज दी है। केंद्र सरकार ने भी यहां उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को जिम्मेदारी दी है, मगर शासन स्तर पर इसे लेकर क्या चल रहा है। यह संज्ञान में नहीं है। अपने यहां भवन तैयार है। जैसे ही मशीन मिलेगी, स्थापित करा कर संचालित किया जाने लगेगा। कहा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन लगातार प्रयास में जुटा है कि जल्द से जल्द मशीन मिल जाए, जिससे आम लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। प्राचार्य ने कहा कि जिले में तकरीबन 12 से पंद्रह एमआरआई के मरीज हर दिन आते हैं।
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जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं है सुविधा
जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में एमआरआई की सुविधा नहीं है। ऐसे में जरूरतमंदों को छह हजार रुपये खर्च कर निजी सेंटरो पर एमआरआई करानी पड़ती है।
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- सचिव चिकित्सा शिक्षा के आश्वासन के बाद भी नहीं मिल सकी मशीन
बस्ती। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली में चार साल से एमआरआई मशीन का इंतजार है। हालांकि पिछले दिनों दौरे पर आए सचिव चिकित्सा शिक्षा ने यहां जल्द ही मशीन देने का वादा किया था, मगर यह वादा भी कागजी ही साबित हुआ और अस्पताल में अब तक एमआरआई मशीन नहीं लग सकी है।
जिले में 2018 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना को हरी झंडी मिली और यह कॉलेज बनकर तैयार हो गया। 2019 से संचालित भी हो रहा है। चार साल से संचालित मेडिकल कॉलेज ने ओपेक चिकित्सालय कैली को ओपीडी तथा अन्य चिकित्सा सेवा के लिए संबद्ध कर लिया है। संबद्धीकरण के बाद यह तय हुआ था कि यहां विभिन्न उपकरण जो बंद पड़े हैं, उन्हें पीपीपी मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत कैली में डायलिसिस संचालित किया जा रहा है। इधर, ओपेक चिकित्सालय कैली को चिकित्सा शिक्षा के तहत संबद्ध कर लिए जाने के बाद से इसके संचालन के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है, मगर अब तक एमआरआई मशीन नहीं मिल सकी है।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि कॉलेज को एक एमआरआई मशीन केंद्र सरकार की ओर से संस्तुति कर दी गई है। इसे इमरजेंसी कोविड रिस्पांस पैकेज-2 के तहत दिया गया है। कॉलेज प्रशासन ने मशीन की मांग भेज दी है। केंद्र सरकार ने भी यहां उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को जिम्मेदारी दी है, मगर शासन स्तर पर इसे लेकर क्या चल रहा है। यह संज्ञान में नहीं है। अपने यहां भवन तैयार है। जैसे ही मशीन मिलेगी, स्थापित करा कर संचालित किया जाने लगेगा। कहा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन लगातार प्रयास में जुटा है कि जल्द से जल्द मशीन मिल जाए, जिससे आम लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। प्राचार्य ने कहा कि जिले में तकरीबन 12 से पंद्रह एमआरआई के मरीज हर दिन आते हैं।
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जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं है सुविधा
जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में एमआरआई की सुविधा नहीं है। ऐसे में जरूरतमंदों को छह हजार रुपये खर्च कर निजी सेंटरो पर एमआरआई करानी पड़ती है।