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Basti News: ओपीडी में डॉक्टर दो और लाइन में 350 गर्भवती
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महिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़। संवाद
बस्ती। जिला महिला अस्पताल में बुधवार की सुबह की शिफ्ट में ओपीडी में सिर्फ दो महिला डॉक्टरों की ड्यूटी थी। गर्भवतियों को एक से डेढ़ घंटे तक लाइन में लगना पड़ा, तब जाकर डॉक्टर को दिखाने का नंबर आया।
कतार में खड़े-खड़े थक चुकीं कई महिलाएं फर्श पर ही बैठ कर अपनी बारी का इंतजार करती देखी गईं। ओपीडी में करीब 350 मरीज मौजूद रहे। ऐसे में एक डॉक्टर के हिस्से में 150 से अधिक मरीज आए। कुछ गर्भवतियों ने कहा कि ऐसे हालात में एक से डेढ़ घंटे लाइन में खड़े रहना उनके लिए मुश्किल हो गया था।
मौजूदा वक्त में महिला अस्पताल में तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ महिला डॉक्टरों की तैनाती है। दो डॉक्टर अटैच हैं, जबकि छह महिला डॉक्टरों के पद है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड, पैथाेलॉजी और बेहोशी के डॉक्टर भी तैनात हैं। बुधवार को डॉ. सीमा चौधरी अवकाश पर थीं, इसलिए डॉ. ममता रानी और डॉ. अनम पर ओपीडी में मरीजों को देखने की जिम्मेदारी थी। डॉ. पीएल गुप्ता की ड्यूटी इंमरजेंसी में लगाई गई थी।
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सुबह करीब 11 बजे ओपीडी के बरामदे में महिला मरीजों की लंबी लाइन दोनों तरफ लगी थी। चूंकि बरामदे की चौड़ाई कम होने से मरीजों के बीच से लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा था। महिला सुरक्षा गार्ड महिलाओं को लाइन में सीधे खड़े रहने की बार-बार हिदायत दे रही थीं। ओपीडी के ऊपरी मंजिल पर सीएमएस का चैंबर हैं। इसके अलावा कार्यालय भी, इसलिए जरूरतमंदों को बार-बार उनके पास जाना पड़ रहा था। ऐसे में लाइन में महिलाएं असहज महसूस कर रही थीं।
इमरजेंसी के बाहर भी मरीजों की भीड़ देखने को मिली। हालांकि, मुख्य गेट पर तैनाम महिला गार्ड एक साथ सिर्फ दो लोगों को इमरजेंसी में जाने की इजाजत दे रही थी। इसके बाद लोग इमरजेंसी में प्रवेश के लिए लोग परेशान दिखे।
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कोट
एक डॉक्टर के अवकाश की वजह से मरीजों को समस्या हुई, मगर सभी मरीजों को बारी-बारी देखा गया। जिलेभर की गर्भवतियों का पूरा भार महिला अस्पताल पर है, इसलिए यहां भीड़ रहती है। उपलब्ध संसाधनों में मरीजों का समुचित इलाज किया जा रहा है।
-डॉ. सुधांशु द्विवेदी, प्रभारी सीएमएस, महिला अस्पताल
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कतार में खड़े-खड़े थक चुकीं कई महिलाएं फर्श पर ही बैठ कर अपनी बारी का इंतजार करती देखी गईं। ओपीडी में करीब 350 मरीज मौजूद रहे। ऐसे में एक डॉक्टर के हिस्से में 150 से अधिक मरीज आए। कुछ गर्भवतियों ने कहा कि ऐसे हालात में एक से डेढ़ घंटे लाइन में खड़े रहना उनके लिए मुश्किल हो गया था।
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मौजूदा वक्त में महिला अस्पताल में तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ महिला डॉक्टरों की तैनाती है। दो डॉक्टर अटैच हैं, जबकि छह महिला डॉक्टरों के पद है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड, पैथाेलॉजी और बेहोशी के डॉक्टर भी तैनात हैं। बुधवार को डॉ. सीमा चौधरी अवकाश पर थीं, इसलिए डॉ. ममता रानी और डॉ. अनम पर ओपीडी में मरीजों को देखने की जिम्मेदारी थी। डॉ. पीएल गुप्ता की ड्यूटी इंमरजेंसी में लगाई गई थी।
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सुबह करीब 11 बजे ओपीडी के बरामदे में महिला मरीजों की लंबी लाइन दोनों तरफ लगी थी। चूंकि बरामदे की चौड़ाई कम होने से मरीजों के बीच से लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा था। महिला सुरक्षा गार्ड महिलाओं को लाइन में सीधे खड़े रहने की बार-बार हिदायत दे रही थीं। ओपीडी के ऊपरी मंजिल पर सीएमएस का चैंबर हैं। इसके अलावा कार्यालय भी, इसलिए जरूरतमंदों को बार-बार उनके पास जाना पड़ रहा था। ऐसे में लाइन में महिलाएं असहज महसूस कर रही थीं।
इमरजेंसी के बाहर भी मरीजों की भीड़ देखने को मिली। हालांकि, मुख्य गेट पर तैनाम महिला गार्ड एक साथ सिर्फ दो लोगों को इमरजेंसी में जाने की इजाजत दे रही थी। इसके बाद लोग इमरजेंसी में प्रवेश के लिए लोग परेशान दिखे।
कोट
एक डॉक्टर के अवकाश की वजह से मरीजों को समस्या हुई, मगर सभी मरीजों को बारी-बारी देखा गया। जिलेभर की गर्भवतियों का पूरा भार महिला अस्पताल पर है, इसलिए यहां भीड़ रहती है। उपलब्ध संसाधनों में मरीजों का समुचित इलाज किया जा रहा है।
-डॉ. सुधांशु द्विवेदी, प्रभारी सीएमएस, महिला अस्पताल