{"_id":"5fc289288ebc3e9bf6238192","slug":"tourism-building-looking-forward-to-the-leaders-basti-news-gkp374923817","type":"story","status":"publish","title_hn":"रहनुमाओं की राह देख रहा पर्यटन भवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रहनुमाओं की राह देख रहा पर्यटन भवन
विज्ञापन
बड़ेवन चौराहे स्थित पर्यटन भवन में उगे घास-फूस।
- फोटो : BASTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रहनुमाओं की राह देख रहा पर्यटन भवन
बस्ती। शहर के बड़ेबन के समीप हाईवे के किनारे 25 लाख रुपये खर्च कर पर्यटन भवन का निर्माण कराया गया। इसका उद्देश्य था कि दूर-दराज की यात्रा कर बस्ती आने वाले लोगों को एक ही छत के नीचे रुकने और भोजन आदि की सुविधा मुहैया कराई जा सके, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जिम्मेदारों की उपेक्षा के चलते भवन करीब 55 प्रतिशत तक जर्जर हो गया है। परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं। खिड़की, जंगले, दरवाजे आदि नहीं हैं।
करीब 16 वर्ष पहले डेढ एकड़ की भूमि में पर्यटन मंत्रालय की ओर से निर्मित इस भवन में चार कमरों के अलावा एक बड़ा हाल, शौचालय का निर्माण कराया गया। परिसर में कई तरह के फूल के पौधे लगाए गए थे। इसके संचालन की जिम्मेदारी राज्य पर्यटन विकास निगम को सौंपी गई थी। विभाग की ओर से इस भवन का संचालन 11 वर्ष तक नहीं कराया जा सका। सूत्रों की मानें तो वर्ष-2016 में इस भवन के संचालन की जिम्मेदारी सपा सरकार में कद्दावर नेता रहे एक व्यक्ति को सौंपी गई, अभी भवन के संचालन की तैयारियां चल ही रही थी कि उनकी शिकायत कुछ राजनैतिक व्यक्तियों ने शासन में कर दी, जिसमें कहा गया कि सपा नेता की छवि ठीक नहीं है। उनके ऊपर कई मुकदमे हैं, मामला जांच की जद में आ गया, जिसके बाद से यह भवन उपेक्षित पड़ा हुआ है। इस संबंध में क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अरविंद राय का कहना है कि उक्त भवन के संचालन के लिए प्रयास किया जा रहा है, उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है, निर्देश प्राप्त होते ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
बस्ती। शहर के बड़ेबन के समीप हाईवे के किनारे 25 लाख रुपये खर्च कर पर्यटन भवन का निर्माण कराया गया। इसका उद्देश्य था कि दूर-दराज की यात्रा कर बस्ती आने वाले लोगों को एक ही छत के नीचे रुकने और भोजन आदि की सुविधा मुहैया कराई जा सके, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जिम्मेदारों की उपेक्षा के चलते भवन करीब 55 प्रतिशत तक जर्जर हो गया है। परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं। खिड़की, जंगले, दरवाजे आदि नहीं हैं।
करीब 16 वर्ष पहले डेढ एकड़ की भूमि में पर्यटन मंत्रालय की ओर से निर्मित इस भवन में चार कमरों के अलावा एक बड़ा हाल, शौचालय का निर्माण कराया गया। परिसर में कई तरह के फूल के पौधे लगाए गए थे। इसके संचालन की जिम्मेदारी राज्य पर्यटन विकास निगम को सौंपी गई थी। विभाग की ओर से इस भवन का संचालन 11 वर्ष तक नहीं कराया जा सका। सूत्रों की मानें तो वर्ष-2016 में इस भवन के संचालन की जिम्मेदारी सपा सरकार में कद्दावर नेता रहे एक व्यक्ति को सौंपी गई, अभी भवन के संचालन की तैयारियां चल ही रही थी कि उनकी शिकायत कुछ राजनैतिक व्यक्तियों ने शासन में कर दी, जिसमें कहा गया कि सपा नेता की छवि ठीक नहीं है। उनके ऊपर कई मुकदमे हैं, मामला जांच की जद में आ गया, जिसके बाद से यह भवन उपेक्षित पड़ा हुआ है। इस संबंध में क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अरविंद राय का कहना है कि उक्त भवन के संचालन के लिए प्रयास किया जा रहा है, उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है, निर्देश प्राप्त होते ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन