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तीन हजार आवासीय मानचित्र निरस्त

Tue, 08 Dec 2015 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 08 Dec 2015 12:18 AM IST
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बस्ती। महायोजना 2021 लागू होने के बाद लोगों की मुसीबतें बढ़ गई हैं।
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लोगों के मानचित्र स्वीकृति नहीं हो रहे हैं। तीन हजार से अधिक मानचित्र निरस्त हो चुके हैं। लगभग तीन सौ निरस्त होने के कगार पर हैं।

स्थिति यह है कि लोग बिना मानचित्र स्वीकृत कराए निर्माण कार्य करा रहे हैं। विभिन्न विकास योजनाओं के लिए आरक्षित जमीनों पर भी धड़ल्ले से निर्माण हो रहा है। एसडीएम सदर का कहना है कि बिना मानचित्र स्वीकृत कराए और भू उपयोग के विपरीत अगर किसी ने निर्माण करा लिया है तो उसे ध्वस्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।

25 जुलाई 2015 को महायोजना 2021 लागू हुई। इसके बाद से दाखिल मानचित्र तकनीकी कारणों से निरस्त कर दिए गए। 25 जुलाई 2015 के पहले कार्यालय में लंबित करीब 100 मानचित्र लटक गए।

जानकारी के अभाव में लोग जमीनों का बैनामा तो करा ले रहे हैं, मगर आवासीय मानचित्र जब नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र कार्यालय में जमा करता है तो उसे पता चलता है कि वह जमीन पार्क, औद्योगिक, स्कूल आदि उद्देश्यों के लिए आरक्षित है।

नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र एसडीएम सदर राम प्रसाद कहते हैं कि महायोजना में नगर पालिका सहित उसके आसपास के 69 गांवों को शामिल किया गया है। आरक्षित जमीन पर आवासीय मानचित्र स्वीकृत नहीं होगा। इसके लिए उसे वर्ष 2021 तक इंतजार करना पड़ेगा। इसके बाद ही भू उपयोग परिवर्तित हो सकता है।

भूखंड खरीद कर आवासीय भवन का निर्माण करने की इच्छा रखने वाले अगर रजिस्ट्री कराने से पहले सावधानी नहीं बरती और बिना मानचित्र स्वीकृत कराए भवन का निर्माण करा लिया तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उनका बना बनाया भवन ध्वस्त हो सकता है। रजिस्ट्री कराने वाले को सलाह दी गई है कि वह रजिस्ट्री से पहले नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र कार्यालय में छानबीन कर लें कि भूखंड आरक्षित तो नहीं है। कार्यालय में आरक्षित किए गए जमीनों का गांववार और गाटावार सूचना उपलब्ध है।

सब रजिस्ट्रार राजेश कुमार सिंह ने बताया कि महायोजना लागू होने के बाद रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या कम हो गई है। इसका सीधा प्रभाव राजस्व पर पड़ा है। औसतन 10 फीसदी बैनामे हर महीने प्रभावित हो रहे हैं।
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