फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   There was no warning, no inkling; it was all over in just a few hours.

Basti News: कोई आहट न लगी भनक कुछ घंटों में ही सब खत्म

Mon, 31 Aug 2026 01:17 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2026 01:17 AM IST
विज्ञापन
There was no warning, no inkling; it was all over in just a few hours.
दिवंगत एसओ को कंधा देते एसपी डा. यशवीर सिंह  व अन्य पुलिस कर्मी
बस्ती। न कोई आहट, न कोई भनक और कुछ घंटों में सब कुछ खत्म। थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद पुलिसकर्मियों और परिवार के लोगों को यही सवाल सबसे ज्यादा बेचैन करता रहा।
विज्ञापन

दोपहर करीब 12 बजे तक थानाध्यक्ष स्टाफ के साथ सामान्य रूप से थे। इसके बाद कमरे में चले गए और करीब छह बजे उनके साथ कमरे में रहने वाले बलराम गौड़ ने कमरे में जाकर घटना की जानकारी पाई। कुछ घंटों का यह अंतराल अब कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है।
विज्ञापन

पोस्टमार्टम हाउस पर रविवार को सहकर्मियों के बीच उनकी कार्यशैली की चर्चा होती रही। एक इंस्पेक्टर ने बताया कि सूर्य प्रकाश सिंह ने कभी किसी का अहित नहीं किया। किसी की मदद नहीं कर पाते तो साफ कह देते थे। वह काम को लेकर गंभीर रहते थे और कहते थे कि लोग काम नहीं करना चाहते हैं तो अब सख्ती करनी पड़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

सभी को एक-एक पत्र रिसीव कराने की बात भी कही थी। बताया कि विवेचना के संबंध में एक एसओ ने उन्हें फोन किया था, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इससे पहले उनसे हुई बातचीत सामान्य थी और वह खुश थे।
बेहद करीबी बलराम गौड़ से भी छिपाए राज : परिवार के सदस्य आकाश सिंह ने बताया कि उप निरीक्षक बलराम गौड़ और सूर्य प्रकाश सिंह की नजदीकी काफी पुरानी थी। दोनों ने लंबे समय तक साथ में नौकरी की थी। बलराम उनके साथ कमरे में रहते थे। सूर्य प्रकाश उन्हें लगभग हर बात बताते थे। वह परिवार के सदस्य की तरह हो गए थे। इसके बावजूद उन कुछ घंटों में क्या हुआ, यह बलराम भी नहीं समझ पा रहे हैं। उनके दिल पर किस तरह का बोझ था, ये राज उन्होंने बलराम से भी छिपाए रखा। ‘ऐसा थानाध्यक्ष नहीं मिलेगा’ : परिजन और सहकर्मियों के मुताबिक सूर्य प्रकाश हर किसी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते थे। किसी भी परेशानी में होने पर परिवार को संबल प्रदान करते थे। इसी वजह से उनका यह कदम लोगों को और हजम नहीं हो रहा है। पुलिसकर्मी भी उनके इसी सहयाेगी और विनम्र स्वभाव के कायल थे।

शायद इसीलिए आपस में बात करते हुए एक उपनिरीक्षक ने रोते हुए कहा कि ‘ऐसा थानाध्यक्ष कभी नहीं मिलेगा।’ हालांकि, मोबाइल की जांच से उन अनुत्तरित सवालों की कुछ कड़ियां जुड़ने की उम्मीद है, जिनका जवाब परिवार और सहकर्मी तलाश रहे हैं। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed