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Basti News: कोई आहट न लगी भनक कुछ घंटों में ही सब खत्म
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दिवंगत एसओ को कंधा देते एसपी डा. यशवीर सिंह व अन्य पुलिस कर्मी
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बस्ती। न कोई आहट, न कोई भनक और कुछ घंटों में सब कुछ खत्म। थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद पुलिसकर्मियों और परिवार के लोगों को यही सवाल सबसे ज्यादा बेचैन करता रहा।
दोपहर करीब 12 बजे तक थानाध्यक्ष स्टाफ के साथ सामान्य रूप से थे। इसके बाद कमरे में चले गए और करीब छह बजे उनके साथ कमरे में रहने वाले बलराम गौड़ ने कमरे में जाकर घटना की जानकारी पाई। कुछ घंटों का यह अंतराल अब कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है।
पोस्टमार्टम हाउस पर रविवार को सहकर्मियों के बीच उनकी कार्यशैली की चर्चा होती रही। एक इंस्पेक्टर ने बताया कि सूर्य प्रकाश सिंह ने कभी किसी का अहित नहीं किया। किसी की मदद नहीं कर पाते तो साफ कह देते थे। वह काम को लेकर गंभीर रहते थे और कहते थे कि लोग काम नहीं करना चाहते हैं तो अब सख्ती करनी पड़ेगी।
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सभी को एक-एक पत्र रिसीव कराने की बात भी कही थी। बताया कि विवेचना के संबंध में एक एसओ ने उन्हें फोन किया था, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इससे पहले उनसे हुई बातचीत सामान्य थी और वह खुश थे।
बेहद करीबी बलराम गौड़ से भी छिपाए राज : परिवार के सदस्य आकाश सिंह ने बताया कि उप निरीक्षक बलराम गौड़ और सूर्य प्रकाश सिंह की नजदीकी काफी पुरानी थी। दोनों ने लंबे समय तक साथ में नौकरी की थी। बलराम उनके साथ कमरे में रहते थे। सूर्य प्रकाश उन्हें लगभग हर बात बताते थे। वह परिवार के सदस्य की तरह हो गए थे। इसके बावजूद उन कुछ घंटों में क्या हुआ, यह बलराम भी नहीं समझ पा रहे हैं। उनके दिल पर किस तरह का बोझ था, ये राज उन्होंने बलराम से भी छिपाए रखा। ‘ऐसा थानाध्यक्ष नहीं मिलेगा’ : परिजन और सहकर्मियों के मुताबिक सूर्य प्रकाश हर किसी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते थे। किसी भी परेशानी में होने पर परिवार को संबल प्रदान करते थे। इसी वजह से उनका यह कदम लोगों को और हजम नहीं हो रहा है। पुलिसकर्मी भी उनके इसी सहयाेगी और विनम्र स्वभाव के कायल थे।
शायद इसीलिए आपस में बात करते हुए एक उपनिरीक्षक ने रोते हुए कहा कि ‘ऐसा थानाध्यक्ष कभी नहीं मिलेगा।’ हालांकि, मोबाइल की जांच से उन अनुत्तरित सवालों की कुछ कड़ियां जुड़ने की उम्मीद है, जिनका जवाब परिवार और सहकर्मी तलाश रहे हैं। संवाद
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दोपहर करीब 12 बजे तक थानाध्यक्ष स्टाफ के साथ सामान्य रूप से थे। इसके बाद कमरे में चले गए और करीब छह बजे उनके साथ कमरे में रहने वाले बलराम गौड़ ने कमरे में जाकर घटना की जानकारी पाई। कुछ घंटों का यह अंतराल अब कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है।
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पोस्टमार्टम हाउस पर रविवार को सहकर्मियों के बीच उनकी कार्यशैली की चर्चा होती रही। एक इंस्पेक्टर ने बताया कि सूर्य प्रकाश सिंह ने कभी किसी का अहित नहीं किया। किसी की मदद नहीं कर पाते तो साफ कह देते थे। वह काम को लेकर गंभीर रहते थे और कहते थे कि लोग काम नहीं करना चाहते हैं तो अब सख्ती करनी पड़ेगी।
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सभी को एक-एक पत्र रिसीव कराने की बात भी कही थी। बताया कि विवेचना के संबंध में एक एसओ ने उन्हें फोन किया था, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इससे पहले उनसे हुई बातचीत सामान्य थी और वह खुश थे।
बेहद करीबी बलराम गौड़ से भी छिपाए राज : परिवार के सदस्य आकाश सिंह ने बताया कि उप निरीक्षक बलराम गौड़ और सूर्य प्रकाश सिंह की नजदीकी काफी पुरानी थी। दोनों ने लंबे समय तक साथ में नौकरी की थी। बलराम उनके साथ कमरे में रहते थे। सूर्य प्रकाश उन्हें लगभग हर बात बताते थे। वह परिवार के सदस्य की तरह हो गए थे। इसके बावजूद उन कुछ घंटों में क्या हुआ, यह बलराम भी नहीं समझ पा रहे हैं। उनके दिल पर किस तरह का बोझ था, ये राज उन्होंने बलराम से भी छिपाए रखा। ‘ऐसा थानाध्यक्ष नहीं मिलेगा’ : परिजन और सहकर्मियों के मुताबिक सूर्य प्रकाश हर किसी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते थे। किसी भी परेशानी में होने पर परिवार को संबल प्रदान करते थे। इसी वजह से उनका यह कदम लोगों को और हजम नहीं हो रहा है। पुलिसकर्मी भी उनके इसी सहयाेगी और विनम्र स्वभाव के कायल थे।
शायद इसीलिए आपस में बात करते हुए एक उपनिरीक्षक ने रोते हुए कहा कि ‘ऐसा थानाध्यक्ष कभी नहीं मिलेगा।’ हालांकि, मोबाइल की जांच से उन अनुत्तरित सवालों की कुछ कड़ियां जुड़ने की उम्मीद है, जिनका जवाब परिवार और सहकर्मी तलाश रहे हैं। संवाद