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Basti News: चुनाव से पहले रिंग रोड दिखाने की थी योजना... अभी कागजी प्रक्रिया में उलझी

Mon, 11 Dec 2023 12:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Mon, 11 Dec 2023 12:24 AM IST
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There was a plan to show the ring road before the elections... now it is stuck in the paper process.
बस्ती। चुनाव से पहले शहर के चारों तरफ रिंग रोड बनाकर दिखाने की योजना धराशाई होती नजर आ रही है। सरकारी नुमाइंदों ने इस हिसाब से कदम ताल ही नहीं किया। थ्री-डी की कार्रवाई हुए छह माह बीतने के बाद भी रिंग रोड की कागजी प्रक्रिया उलझी हुई हैं। 54 गांवों में प्रस्तावित रिंग रोड के लिए महज 40 गांवों में ही एवार्ड की प्रक्रिया पूरी की जा सकी है। 14 गांवों की आपत्तियों की सुनवाई होनी अभी भी बाकी है। वहीं विभिन्न विभागों के अधीन जमीनों का मूल्यांकन कार्य भी अवशेष है।
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बस्ती रिंग रोड परियोजना शुरू होने में अभी देरी है। 10 अक्तूबर तक टेंडर प्रक्रिया पूरी करने का दावा हवा- हवाई साबित हुआ। अभी तक जमीनों के अधिग्रहण की कार्रवाई ही उलझी हुई हैं। एनएचएआई ने छह महीने पहले जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर किनारा कस लिया। इसके बाद प्रशासन को अधिग्रहण क्षेत्र में पड़ने वाली जमीन, जंगल, मकान, बोरिंग आदि के मूल्यांकन का कार्य करना था। कच्छप गति से बढ़ाई जा रही यह प्रकि्रया विलंब होने के बाद भी पूरी नहीं हो पाई। अभी इस माह पूरी होने की उम्मीद भी नहीं हैं। इधर साल 2023 गुजर जाएगा और परियोजना कागज से निकलकर धरातल पर नहीं दिखेगी।
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54 में 40 गांवों में पूर्ण हुई एवार्ड की प्रक्रिया
अधिग्रहण की जमीनों के प्रकाशन के बाद मूल्यांकन कार्य होना था। इसमें काश्तकार एवं अन्य किस्म की आपत्तियों की सुनवाई कर जमीनों का मूल्यांकन करना होता है। इसे एवार्ड कहते हैं। इसके बाद भुगतान के साथ रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूर्ण कराई जाती है। अभी तक 40 गांवों की आपत्तियों पर सुनवाई कर एवार्ड प्रक्रिया पूरी हो सकी है। 14 गांवों में यह प्रक्रिया अभी शेष हैं।
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इन विभागों से भी मांगा गया था मूल्यांकन रिपोर्ट
विशेष भूमि आधिपत्य विभाग की ओर से अधिग्रहण क्षेत्र में पड़ने वाली वन विभाग, पीडब्ल्यूडी, जलनिगम, विद्युत आदि विभागों से संबंधित संपत्तियों के मूल्यांकन की रिपोर्ट मांगी गई है। अभी तक अधिकांश विभागों ने मूल्यांकन की रिपोर्ट के साथ एनओसी नहीं दी है। जिससे अधिग्रहण की कार्रवाई लटकी हुई हैं।
अधिग्रहण के लिए नहीं हो सका एनएचएआई से धन का डिमांड
मूल्यांकन कार्य खत्म करने के बाद विशेष भूमि आधिपत्य विभाग एनएचएआई से अधिग्रहण के लिए धन का डिमांड करेगा। इसके बाद काश्तकारों को भुगतान के साथ रजिस्ट्री प्रक्रिया पूर्ण कराई जानी है। मगर मूल्यांकन न होने के चलते जमीन अधिग्रहण पर आने वाले कुल खर्च का आंकलन ही नहीं हो सका है। जिससे डिमांड नहीं भेजी जा सकी हैं।
1138.72 करोड़ लागत से बननी है फोरलेन रिंगरोड
रिंग रोड शहर से दस किलोमीटर दूर गोटवा बाजार से शुरू होकर हड़िया चौराहे होते हुए फिर उसी स्थान पर ले जाकर समाप्त की जाएगी। इसकी कुल लंबाई 22.15 किलोमीटर है। 40 से 60 मीटर चौड़ी फोरलेन सड़क और उसके किनारे के कॉमर्शियल कांपलेक्स बनाने के लिए कुल 1138.72 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अभी यहां से डिमांड न भेजे जाने के कारण एनएचएआई मुख्यालय से फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है।
54 गांवों के 500 किसानों से अधिग्रहत की जानी है जमीन

रिंग रोड परियोजना के लिए तैयार खाका के अनुसार बस्ती सदर तहसील के कुल 54 गांवों से होकर यह सड़क गुजरनी है। इसमें सदर तहसील के ग्राम पंचायत बकैनियाद्वीप, बक्सर, बल्लीपट्टी, बनकटा, बरवनियां, बायपोखर, बेलवाडाड़, भदेश्वरनाथ, भटहा, देवराव खास, देवरिया, डीघा, गोटवा, कड़रखास, कटया, खुटहन, कोपवा, कोपिया, मछिया, निविया, नौगढ़, ओठगनपुर कला, पचौरा, परसाजाफर, परसा डफाली, परसादपुर, पिपरा मेघउ, पोखरभिटवा, पुरैना, राजा चक, राजाजोत, रिठौली, सबदेइया कला, समसपुर व सेखुई ग्राम पंचायत शामिल हैं। यहां के 500 किसानों की कुल 90.8488 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। अधिग्रहण के लिए अधिसूचना छह माह पहले ही जारी कर दी गई है।

दो राष्ट्रीय राजमार्ग पर होगी क्रासिंग
यह रिंग रोड दो राष्ट्रीय राजमार्ग को क्रास करेगा। गोरखपुर-लखनऊ फोरलेन और लुंबिनी दुद्धी मार्ग को दो जगहों पर क्रास करेगा। इसके अलावा बस्ती-डुमरियागंज मार्ग से भी रिंग रोड का जुड़ाव होगा। रिंग रोड के चलते कुआनो नदी पर ब्रिज का निर्माण भी कराया जाएगा। इस रिंग रोड के जरिए किसी भी मार्ग की यात्रा सुलभ होगी।

आठ साल पहले हुई थी घोषणा
सांसद हरीश द्विवेदी की पहल पर वर्ष 2015 में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यहां कलवारी में जनसभा के दौरान शहर के चारों तरफ रिंग रोड बनाए जाने की घोषणा की थी। इस प्रस्ताव को 2023 में स्वीकृति मिली। इसके बाद सांसद ने जनपदवासियों से वादा किया कि इसी साल 10 अक्तूबर तक टेंडर प्रकि्रया पूरी कर निर्माण शुरू हो जाएगा।
110 हेक्टेयर भूमि को लेकर वन विभाग ने फंसाया पेंच
रिंग रोड परियोजना के लिए प्रस्तावित क्षेत्र में वन विभाग के अधीन 110 हेक्टेयर भूमि वन्य क्षेत्र की हैं। इसमें कुछ भूमि काश्तकारों की भी शामिल हैं। जिन्हें मुआवजा दिया जाएगा। जबकि वन विभाग को जमीनों के बदले अन्यत्र जमीन दिए जाने की योजना है। मगर वन विभाग ने यह कहकर अडंगा पैदा कर दिया कि उसे इकट्ठा जमीन चाहिए वह भी जंगल क्षेत्र के निकट। इसके लिए प्रशासन ने एसडीएम भानपुर, एसडीएम बस्ती सदर और सिंचाई विभाग को जमीन उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है।

रिंग रोड परियोजना के लिए एवार्ड की कार्रवाई पूरी की जा रही है। 14 गांवों में यह कार्रवाई शेष हैं जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। वन विभाग को जमीन के बदले इकट्ठा जमीन दिए जाने का प्रयास चल रहा है। उम्मीद इस माह में ही अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
-रमेश यादव, विशेष भूमि आधिपत्य अधिकारी
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