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Basti News: प्रतिभाओं की कमी नहीं, प्रशिक्षकों के अभाव में पिछड़ रहे खिलाड़ी

Mon, 19 Oct 2026 03:05 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 03:05 AM IST
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There is no shortage of talent; athletes are falling behind due to a lack of coaches.
बस्ती। जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के अभाव में खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का पूरा मौका नहीं मिल पा रहा है। शहीद सत्यवान सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, वॉलीबाल, कबड्डी, खो-खो और वेटलिफ्टिंग के प्रशिक्षक तैनात नहीं हैं। ऐसे में इन खेलों में करियर बनाने का सपना देख रहे खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास के बावजूद तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में कई खिलाड़ियों को निजी एकेडमी का रुख करना पड़ रहा है, जिससे उनके अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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स्टेडियम में हैंडबॉल, हॉकी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, बास्केटबॉल और कुश्ती के प्रशिक्षक तैनात हैं। इन खेलों के खिलाड़ियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं, प्रशिक्षकों की कमी वाले खेलों में रुचि रखने वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा खुद ही अभ्यास करने को मजबूर हैं। मैदान पर घंटों पसीना बहाने के बावजूद उन्हें अपनी तकनीकी कमियों को पहचानने और उनमें सुधार करने का उचित अवसर नहीं मिल पा रहा है। खेल की बारीकियों, फिटनेस, रणनीति और बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी मार्गदर्शन की कमी उनकी राह में बाधा बन रही है।
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क्रिकेट खिलाड़ी आंजनेय और शिवम का कहना है कि स्टेडियम में नियमित रूप से क्रिकेट प्रशिक्षक की तैनाती होने से खिलाड़ियों को काफी लाभ मिलेगा। तकनीक और फिटनेस का सही मार्गदर्शन मिलने पर वे मंडल और प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। बैडमिंटन खिलाड़ी अवनीश और संदीप ने बताया कि जिले में बड़ी संख्या में युवा इस खेल का अभ्यास करते हैं, लेकिन प्रशिक्षक नहीं होने से उन्हें परेशानी होती है। वहीं, आलोक वर्मा और संजय यादव का कहना है कि विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की तैनाती से जिले की खेल प्रतिभाओं को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है।
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निजी एकेडमी में अभ्यास करना मजबूरी

स्टेडियम में प्रशिक्षकों की कमी के कारण खिलाड़ियों को निजी एकेडमी का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे अभिभावकों को प्रशिक्षण पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। क्रिकेट खिलाड़ी शिवम ने बताया कि स्टेडियम में क्रिकेट कोच नहीं होने के कारण वह अपने बच्चे को निजी एकेडमी में अभ्यास करा रहे हैं। उनका कहना है कि स्टेडियम में प्रशिक्षकों की तैनाती के साथ खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।



क्रिकेट समेत अन्य खेलों के प्रशिक्षकों की तैनाती के लिए खेल निदेशालय को कई बार पत्राचार किया गया है। निदेशालय से प्रशिक्षक उपलब्ध होने पर उनकी तैनाती की जाएगी, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिल सके। उन्होंने बताया कि अन्य खेलों के शिविर भी संचालित किए जा रहे हैं और खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए बाहर जा रहे हैं।

दिलीप कुमार, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी, बस्ती।
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