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ठंड में बढ़ जाता है हृदयाघात का खतरा
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ठंड में बढ़ जाता है हृदयाघात का खतरा
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ का पद ही सृजित नहीं हुआ
बस्ती। ठंड का मौसम हृदयाघात के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। चिकित्सकों की मानें तो इस मौसम में हृदयरोगियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि मंडल मुख्यालय होने के बावजूद जिले में हृदय रोग के इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में दो दशक से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती ही नहीं हुई है। पूर्वांचल का मिनी पीजीआई कहे जाने वाले ओपेक कैली अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद ही सृजित नहीं है।
चिकित्सकों का कहना है कि हृदयाघात के इलाज में शुरुआत आधे घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में जरा सी असावधानी भारी पड़ सकती है, लेकिन जिले में हृदय रोग के इलाज के लिहाज से आधे घंटे या इससे कहीं अधिक वक्त डॉक्टर की तलाश में गुजर जाएंगे। जिला अस्पताल में हृदय रोग विभाग में दो दशक पहले डॉ. बीपी सिंह की तैनाती हुई थी। उनका तबादला बहराइच होने के बाद से किसी अन्य हृदयरोग विशेषश्र की तैनाती नहीं हुई। ऐसे में यहां जो भी हृदयरोग का मरीज आता है, उसे गोरखपुर या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है।
ओपेक कैली अस्पताल के हृदय रोग विभाग में अब दूसरे रोग के चिकित्सक मरीजों का इलाज करते हैं। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि हृदय रोग विभाग में चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इसके लिए कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है। ऐसे में फिजीशियन ही हृदय रोगियों का उपचार करते हैं। गंभीर रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि यहां हृदय रोगियों के इलाज के लिए फिजीशियन उपलब्ध हैं, मगर हृदय रोग विभाग के लिए पद सृजित नहीं है।
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ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. बीएल कन्नौजिया ने बताया कि ठंड के मौसम में हृदय रोगियों को सावधान रहना चाहिए। हृदयाघात के लक्षण सीने में दर्द अथवा अचानक पसीना आना है। कंधे में दर्द भी हृदय रोग का लक्षण होता है। मधुमेह मरीजों में अधिकांश के हृदयाघात में दर्द नहीं होता। उन्हें अचानक पसीना आने लगता है। घबराहट व बेचैनी के अलावा कभी-कभार उल्टी होने लगती है। यदि यह स्थिति पैदा हो तो तत्काल चिकित्सक के संपर्क में आ जाएं। हृदयाघात वाले मरीजों के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ का पद ही सृजित नहीं हुआ
बस्ती। ठंड का मौसम हृदयाघात के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। चिकित्सकों की मानें तो इस मौसम में हृदयरोगियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि मंडल मुख्यालय होने के बावजूद जिले में हृदय रोग के इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में दो दशक से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती ही नहीं हुई है। पूर्वांचल का मिनी पीजीआई कहे जाने वाले ओपेक कैली अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद ही सृजित नहीं है।
चिकित्सकों का कहना है कि हृदयाघात के इलाज में शुरुआत आधे घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में जरा सी असावधानी भारी पड़ सकती है, लेकिन जिले में हृदय रोग के इलाज के लिहाज से आधे घंटे या इससे कहीं अधिक वक्त डॉक्टर की तलाश में गुजर जाएंगे। जिला अस्पताल में हृदय रोग विभाग में दो दशक पहले डॉ. बीपी सिंह की तैनाती हुई थी। उनका तबादला बहराइच होने के बाद से किसी अन्य हृदयरोग विशेषश्र की तैनाती नहीं हुई। ऐसे में यहां जो भी हृदयरोग का मरीज आता है, उसे गोरखपुर या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है।
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ओपेक कैली अस्पताल के हृदय रोग विभाग में अब दूसरे रोग के चिकित्सक मरीजों का इलाज करते हैं। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि हृदय रोग विभाग में चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इसके लिए कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है। ऐसे में फिजीशियन ही हृदय रोगियों का उपचार करते हैं। गंभीर रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि यहां हृदय रोगियों के इलाज के लिए फिजीशियन उपलब्ध हैं, मगर हृदय रोग विभाग के लिए पद सृजित नहीं है।
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ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. बीएल कन्नौजिया ने बताया कि ठंड के मौसम में हृदय रोगियों को सावधान रहना चाहिए। हृदयाघात के लक्षण सीने में दर्द अथवा अचानक पसीना आना है। कंधे में दर्द भी हृदय रोग का लक्षण होता है। मधुमेह मरीजों में अधिकांश के हृदयाघात में दर्द नहीं होता। उन्हें अचानक पसीना आने लगता है। घबराहट व बेचैनी के अलावा कभी-कभार उल्टी होने लगती है। यदि यह स्थिति पैदा हो तो तत्काल चिकित्सक के संपर्क में आ जाएं। हृदयाघात वाले मरीजों के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।