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Basti News: घट रही बोर्ड परीक्षार्थियों की संख्या इस बार कम हो सकते हैं केंद्र
Sun, 09 Nov 2025 12:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 09 Nov 2025 12:59 AM IST
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बस्ती। माध्यमिक शिक्षा परिषद में साल दर साल बोर्ड परीक्षार्थियों की संख्या कम होती जा रही है। हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट में पिछले तीन सालों में 15 हजार के आसपास छात्र संख्या में कमी आई है।
पिछले वर्ष की तुलना में देखा जाए तो 5531 परीक्षार्थियों की संख्या इस बार फिर घट गई है। जबकि पिछले साल वर्ष 2024 में 88559 परीक्षार्थियों की संख्या कम हुई थी। इस हिसाब से हर साल परीक्षा केंद्र भी घटते जा रहे हैं। इधर तीन वर्षों में 152 की जगह केंद्रों की संख्या घटकर 124 हो गई है। इस बार केंद्रों की संख्या में और कमी होने की संभावना है। माध्यमिक शिक्षा परिषद को सुदृढ़ बनाने के लिए शासन स्तर से भले ही लाख कोशिश की जा रही हो लेकिन, विद्यार्थियों का मोह लगातार भंग होता जा रहा है।
जानकार बताते हैं कि राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में शैक्षिक वातावरण बेहतर न हो पाने के कारण छात्र संख्या में साल दर साल गिरावट आ रही है। पुराने साख वाले स्कूल भी अब शिक्षक और विद्यार्थियों के अभाव में साल भर सन्नाटे में गुजार ले रहे हैं। अभी पांच साल पहले तक बोर्ड परीक्षार्थियों की संख्या जिले में एक लाख से अधिक हुआ करती थी। इनके परीक्षा के लिए 150 से अधिक केंद्र बनाने पड़ते रहे।
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इधर, छात्र संख्या में लगातार गिरावट होने की वजह से केंद्रों की भी संख्या लगातार घटती जा रही है। यह हाल तब है जबकि राजकीय विद्यालयों की संख्या दो दशक में बढ़ाई गई है। अब जिले में 22 राजकीय विद्यालय संचालित हैं। दो मुख्यालय पर स्थित है। इसके अलावा 20 राजकीय विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में है। जबकि 70 विद्यालय सहायता प्राप्त संचालित है। इसके अलावा 309 विद्यालय वित्तविहीन संचालित है। एक सरकारी शिक्षक बताते हैं पिछले दो दशक में राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों का काफी क्षरण हुआ है।
विज्ञान, गणित, अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की सेवानिवृत्त होने के बाद कई सालों से उनके पद रिक्त चल रहे हैं। इससे पढ़ाई के स्तर में काफी हद तक गिरावट आ गई है। सामर्थ्यवान लोग अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करा रहे हैं। गनीमत है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय ही बोर्ड परीक्षार्थियों की संख्या बचाने में कुछ हद तक कामयाब है। वरना राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में तो नाम मात्र की छात्र संख्या रह गई है।
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पिछले वर्ष की तुलना में देखा जाए तो 5531 परीक्षार्थियों की संख्या इस बार फिर घट गई है। जबकि पिछले साल वर्ष 2024 में 88559 परीक्षार्थियों की संख्या कम हुई थी। इस हिसाब से हर साल परीक्षा केंद्र भी घटते जा रहे हैं। इधर तीन वर्षों में 152 की जगह केंद्रों की संख्या घटकर 124 हो गई है। इस बार केंद्रों की संख्या में और कमी होने की संभावना है। माध्यमिक शिक्षा परिषद को सुदृढ़ बनाने के लिए शासन स्तर से भले ही लाख कोशिश की जा रही हो लेकिन, विद्यार्थियों का मोह लगातार भंग होता जा रहा है।
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जानकार बताते हैं कि राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में शैक्षिक वातावरण बेहतर न हो पाने के कारण छात्र संख्या में साल दर साल गिरावट आ रही है। पुराने साख वाले स्कूल भी अब शिक्षक और विद्यार्थियों के अभाव में साल भर सन्नाटे में गुजार ले रहे हैं। अभी पांच साल पहले तक बोर्ड परीक्षार्थियों की संख्या जिले में एक लाख से अधिक हुआ करती थी। इनके परीक्षा के लिए 150 से अधिक केंद्र बनाने पड़ते रहे।
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इधर, छात्र संख्या में लगातार गिरावट होने की वजह से केंद्रों की भी संख्या लगातार घटती जा रही है। यह हाल तब है जबकि राजकीय विद्यालयों की संख्या दो दशक में बढ़ाई गई है। अब जिले में 22 राजकीय विद्यालय संचालित हैं। दो मुख्यालय पर स्थित है। इसके अलावा 20 राजकीय विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में है। जबकि 70 विद्यालय सहायता प्राप्त संचालित है। इसके अलावा 309 विद्यालय वित्तविहीन संचालित है। एक सरकारी शिक्षक बताते हैं पिछले दो दशक में राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों का काफी क्षरण हुआ है।
विज्ञान, गणित, अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की सेवानिवृत्त होने के बाद कई सालों से उनके पद रिक्त चल रहे हैं। इससे पढ़ाई के स्तर में काफी हद तक गिरावट आ गई है। सामर्थ्यवान लोग अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करा रहे हैं। गनीमत है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय ही बोर्ड परीक्षार्थियों की संख्या बचाने में कुछ हद तक कामयाब है। वरना राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में तो नाम मात्र की छात्र संख्या रह गई है।