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Basti News: अस्पताल की जांच मशीन बिगड़ी...दलालों की सेटिंग तगड़ी
Fri, 04 Oct 2024 04:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 04 Oct 2024 04:02 AM IST
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मामूली परेशानी पर भी लिखी जा रही है अल्ट्रासाउंड जांच पर अस्पताल की मशीन है खराब
अल्ट्रासाउंड जांच देखते ही सक्रिय हो जा रहे दलाल, मरीजों को कर रहे जेब ढीली
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला अस्पताल में दलालों का नेटवर्क टूटने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल की खराब अल्ट्रासाउंड और बंद एक्सरे मशीन इनके नेटवर्क को और मजबूत कर रही हैं। हालात ये हो गए हैं कि मजबूर मरीज और उनके तीमारदारों की जेब ढीली करने के लिए सक्रिय दलाल अस्पताल परिसर में क्षेत्र का बंटवारा तक कर चुके हैं। यहां आने वालों लोगों का मानना है कि जानबूझकर मशीनें खराब रखकर अस्पताल प्रशासन इनके धंधे को और बढ़ावा दे रहा है।
जिला अस्पताल के गेट संख्या दो और तीन के पास ओपीडी संचालित होती है। ऐसे में दोनों गेट के सामने संचालित हो रहे अल्ट्रासाउंड सेंटरों के दलाल ओपीडी में मंंडराते रहते हैं। गेट नंबर एक के बाहर खोले गए अल्ट्रासाउंड सेंटरों के दलाल इमरजेंसी और मेडिकल वार्ड तक सक्रिय रहते हैं। इन्हें अस्पताल के डॉक्टर अच्छी तरह जानते-पहचानते हैं।
मुंडेरवा से मरीज के साथ आए प्रहलाद गुप्ता बताते हैं कि दलालों के इस खेल में चिकित्सक की भी रजामंदी साफ जाहिर होती है। मरीज को जांच के लिए बाहर भेजते समय डॉक्टर कुछ बोलते नहीं है। पर सब इशारे और कोड वर्ड में होता है।
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मेडिसिन विभाग में हो रहा ज्यादा खेल
ओपीडी के मेडिसिन विभाग में जांच के नाम पर ज्यादा खेल हो रहा है। जैसे ही उल्टी-दस्त, पेट दर्द, भूख न लगने आदि की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं, डॉक्टर तत्काल उन्हें अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दे रहे हैं। एक अनुमान के मेडिसिन विभाग में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें से 40 से 50 मरीजों के पर्चे पर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिखा जा रहा है।
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बाहर 800 रुपये में होती है अल्ट्रासाउंड जांच
बाहर के सेंटरों में मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच 800 रुपये में की जाती है। पर्चे पर मरीज के नाम के आगे डॉक्टर का नाम लिखा जा रहा है। निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जिस डॉक्टर का पर्चा पहुंचता है, उनका नाम मरीज के साथ नोट कर लिया जाता है, ताकि कमीशन देने में दिक्कत न आए।
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रेडियोलॉजिस्ट नहीं, बंद हो गया अल्ट्रासाउंड सेंटर
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद चल रहा है। यहां छह माह से रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इस वजह से दलालों की चांदी हो गई है। भवन की मरम्मत भी हो रही है। भवन के बाहर अल्ट्रासाउंड सेंटर तो लिखा है पर जान पाना मुश्किल है।
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अन्य जांच के लिए भी मरीज किए जा रहे गुमराह
आर्थो एवं सर्जरी विभाग में भी जांच के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। यहां मरीजों के पर्चे पर डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन कराने की सलाह दी जा रही है। अस्पताल में दोनों जांच की व्यवस्था की गई है। मगर, डिजिटल एक्स-रे बंद है जबकि सीटी स्कैन गिनती के मरीजों का हो रहा है।
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कोट
अस्पताल के अंदर किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। यदि दलाल आ रहे हैं तो जांच कराई जाएगी। रेडियोलॉजिस्ट की मांग शासन से की गई है। पैथोलॉजी और एक्स-रे जांच अस्पताल में हो रही है।
-डॉ. वीके सोनकर, एसआईसी
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अल्ट्रासाउंड जांच देखते ही सक्रिय हो जा रहे दलाल, मरीजों को कर रहे जेब ढीली
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला अस्पताल में दलालों का नेटवर्क टूटने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल की खराब अल्ट्रासाउंड और बंद एक्सरे मशीन इनके नेटवर्क को और मजबूत कर रही हैं। हालात ये हो गए हैं कि मजबूर मरीज और उनके तीमारदारों की जेब ढीली करने के लिए सक्रिय दलाल अस्पताल परिसर में क्षेत्र का बंटवारा तक कर चुके हैं। यहां आने वालों लोगों का मानना है कि जानबूझकर मशीनें खराब रखकर अस्पताल प्रशासन इनके धंधे को और बढ़ावा दे रहा है।
जिला अस्पताल के गेट संख्या दो और तीन के पास ओपीडी संचालित होती है। ऐसे में दोनों गेट के सामने संचालित हो रहे अल्ट्रासाउंड सेंटरों के दलाल ओपीडी में मंंडराते रहते हैं। गेट नंबर एक के बाहर खोले गए अल्ट्रासाउंड सेंटरों के दलाल इमरजेंसी और मेडिकल वार्ड तक सक्रिय रहते हैं। इन्हें अस्पताल के डॉक्टर अच्छी तरह जानते-पहचानते हैं।
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मुंडेरवा से मरीज के साथ आए प्रहलाद गुप्ता बताते हैं कि दलालों के इस खेल में चिकित्सक की भी रजामंदी साफ जाहिर होती है। मरीज को जांच के लिए बाहर भेजते समय डॉक्टर कुछ बोलते नहीं है। पर सब इशारे और कोड वर्ड में होता है।
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मेडिसिन विभाग में हो रहा ज्यादा खेल
ओपीडी के मेडिसिन विभाग में जांच के नाम पर ज्यादा खेल हो रहा है। जैसे ही उल्टी-दस्त, पेट दर्द, भूख न लगने आदि की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं, डॉक्टर तत्काल उन्हें अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दे रहे हैं। एक अनुमान के मेडिसिन विभाग में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें से 40 से 50 मरीजों के पर्चे पर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिखा जा रहा है।
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बाहर 800 रुपये में होती है अल्ट्रासाउंड जांच
बाहर के सेंटरों में मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच 800 रुपये में की जाती है। पर्चे पर मरीज के नाम के आगे डॉक्टर का नाम लिखा जा रहा है। निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जिस डॉक्टर का पर्चा पहुंचता है, उनका नाम मरीज के साथ नोट कर लिया जाता है, ताकि कमीशन देने में दिक्कत न आए।
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रेडियोलॉजिस्ट नहीं, बंद हो गया अल्ट्रासाउंड सेंटर
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद चल रहा है। यहां छह माह से रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इस वजह से दलालों की चांदी हो गई है। भवन की मरम्मत भी हो रही है। भवन के बाहर अल्ट्रासाउंड सेंटर तो लिखा है पर जान पाना मुश्किल है।
अन्य जांच के लिए भी मरीज किए जा रहे गुमराह
आर्थो एवं सर्जरी विभाग में भी जांच के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। यहां मरीजों के पर्चे पर डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन कराने की सलाह दी जा रही है। अस्पताल में दोनों जांच की व्यवस्था की गई है। मगर, डिजिटल एक्स-रे बंद है जबकि सीटी स्कैन गिनती के मरीजों का हो रहा है।
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कोट
अस्पताल के अंदर किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। यदि दलाल आ रहे हैं तो जांच कराई जाएगी। रेडियोलॉजिस्ट की मांग शासन से की गई है। पैथोलॉजी और एक्स-रे जांच अस्पताल में हो रही है।
-डॉ. वीके सोनकर, एसआईसी