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Basti News: फव्वारों से बिखरती थी अनुपम छटा, अब खो गई रौनक
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शास्त्री चौक पर बंद पड़ा फौव्वारा
बस्ती। शहर के प्रमुख तिराहों और चौराहों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लगाए गए फव्वारे अब बदहाली के शिकार हैं। कभी रंगीन रोशनी के बीच पानी की फुहारें लोगों को आकर्षित करती थीं लेकिन रखरखाव के अभाव में अब इनकी रौनक गायब हो गई है। सुभाष तिराहा और शास्त्री चौक पर लगे फव्वारे लंबे समय से बंद पड़े हैं।
सुभाष तिराहे पर कुछ समय पहले तक फव्वारा आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। अंधेरा होते ही रंगीन रोशनी के बीच पानी की फुहारें लोगों का ध्यान खींचती थीं। राहगीर कुछ देर रुककर मनोरम दृश्य देखते थे। बच्चे भी यहां घूमने आते थे, जबकि महिलाएं सेल्फी लेने के साथ कुछ समय बिताती थीं।
अब रखरखाव के अभाव में फव्वारे बंद हैं। इसके उपकरण धीरे-धीरे खराब हो रहे हैं। आसपास लगाए गए फूल-पौधे भी सूखकर नष्ट हो चुके हैं। इससे तिराहे की खूबसूरती भी प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फव्वारा बंद होने से यहां पहले जैसी चहल-पहल नहीं रही।
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शास्त्री चौक का फव्वारा भी सूखा : शास्त्री चौक पर लगे फव्वारे का भी यही हाल है। कुछ साल पहले चौक पर पार्क विकसित किया गया था। चारों ओर रेलिंग लगाकर फूल-पौधे लगाए गए थे और बीच में फव्वारा बनाया गया था। शाम के समय लोग यहां बैठकर कुछ समय बिताते थे और फव्वारे की फुहारें पार्क की खूबसूरती बढ़ाती थीं।
लंबे समय से फव्वारा नहीं चलने और फूल-पौधों के सूख जाने से पार्क की रौनक भी फीकी पड़ गई है। उपकरणों के खराब होने के साथ ही रखरखाव की कमी साफ नजर आ रही है। लोगों का कहना है कि नियमित देखभाल और संचालन से इन स्थानों की पुरानी रौनक लौट सकती है।र
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सुभाष तिराहे पर कुछ समय पहले तक फव्वारा आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। अंधेरा होते ही रंगीन रोशनी के बीच पानी की फुहारें लोगों का ध्यान खींचती थीं। राहगीर कुछ देर रुककर मनोरम दृश्य देखते थे। बच्चे भी यहां घूमने आते थे, जबकि महिलाएं सेल्फी लेने के साथ कुछ समय बिताती थीं।
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अब रखरखाव के अभाव में फव्वारे बंद हैं। इसके उपकरण धीरे-धीरे खराब हो रहे हैं। आसपास लगाए गए फूल-पौधे भी सूखकर नष्ट हो चुके हैं। इससे तिराहे की खूबसूरती भी प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फव्वारा बंद होने से यहां पहले जैसी चहल-पहल नहीं रही।
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शास्त्री चौक का फव्वारा भी सूखा : शास्त्री चौक पर लगे फव्वारे का भी यही हाल है। कुछ साल पहले चौक पर पार्क विकसित किया गया था। चारों ओर रेलिंग लगाकर फूल-पौधे लगाए गए थे और बीच में फव्वारा बनाया गया था। शाम के समय लोग यहां बैठकर कुछ समय बिताते थे और फव्वारे की फुहारें पार्क की खूबसूरती बढ़ाती थीं।
लंबे समय से फव्वारा नहीं चलने और फूल-पौधों के सूख जाने से पार्क की रौनक भी फीकी पड़ गई है। उपकरणों के खराब होने के साथ ही रखरखाव की कमी साफ नजर आ रही है। लोगों का कहना है कि नियमित देखभाल और संचालन से इन स्थानों की पुरानी रौनक लौट सकती है।र