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Basti News: 176 दिन में विभाग ने खोज डाले 4055 क्षय रोगी...25 की हो गई मृत्यु

Fri, 18 Sep 2026 01:07 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2026 01:07 AM IST
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The department identified 4,055 tuberculosis patients in 176 days... 25 died.
आयुष्मान आरोग्य मंदिर बेलहरा में अ​भियान के तहत स्क्रीनिंग करते कर्मी संवाद
बस्ती। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम में टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। 176 दिन में लगे 715 स्वास्थ्य शिविर में 77,222 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें से 30,894 लोगों की बलगम जांच हुई, इसमें 4055 टीबी के मरीज मिले हैं। इनका उपचार शुरू कर दिया है। मरीजों में सबसे अधिक वह लोग शामिल हैं, जो अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त हैं। वहीं अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है।
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सरकार ने देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। जिसके क्रम में जनपद में 24 मार्च से 100 दिन का विशेष टीबी मरीज खोज अभियान चल रहा है, जिसे आगे बढ़ा दिया गया है। टीम घर-घर जा रही है। संदिग्ध टीबी का मरीज चिह्नित होने पर उसका निक्षय पोषण योजना में पंजीकरण किया जा रहा है। इसमें ऐसे भी रोगी मिले हैं जो घर में छिपे थे, यानी जांच के डरे थे, उन्हें किसी तरह से जांच के लिए राजी किया गया।
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सर्वे में 822 गांवों को हाई रिस्क में रखा गया है। विभागीय आंकड़ों में जनवरी से अब तक 546 टीबी मरीज दवा, डाइट के जरिये खुद को स्वस्थ करते हुए टीबी को हरा चुके हैं। वहीं, इस दौरान 50 ऐसे रोगी जिनकी दवा चल रही थी और बीच में छोड़कर गायब हो गए, अब विभाग उन्हें फिर से खोज रहा है। इसमें, 47 मरीज प्राइवेट सेक्टर के जबकि तीन मरीज सरकारी संस्था के जरिये चिह्नित किए गए थे।
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टीबी रोग खोज अभियान में अब तक 25 रोगियों की मृत्यु भी हो चुकी है, जिसमें आठ प्राइवेट अस्पतालों के थे और 17 सरकारी संस्थाओं में उपचार करा रहे थे। विभाग के अनुसार, जिले में 1187 ग्राम पंचायतों में 228 पंचायतें टीबी से पूरी तरह मुक्त हो चुकी हैं। संवाद
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4055 क्षय रोगियों में मिले 20 एमडीआर के रोगी
जनपद में संचालित टीबी रोग खोज अभियान के दौरान 4055 क्षय रोगियों की खोज हुई, जिसमें 20 रोगी एमडीआर-टीबी (मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस) के मिले हैं। इनकी दवा अब मेडिकल कॉलेज बस्ती से शुरू करा दी गई है। यह रोग काफी खतरनाक होता है। टीबी की प्रारंभिक दवा है ऐसे मरीजों में काम करना बंद कर देती है। ऐसे रोगियों की दवा विशेष दवा चलाकर ठीक किया जाता है। बताया गया कि ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 60 प्रतिशत है। मोबाइल टीम, आरबीएसके समेत अन्य टीमों ने गांवों में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करने की जिम्मेदारी संभाली।

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टीबी के लक्षण
- दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी आना।
- खांसी में बलगम या खून आना। बलगम के साथ खून का थक्का निकलना।
- सीने में दर्द, सांस लेते या खांसते समय दर्द महसूस होना।
- शाम या रात को हल्का या तेज बुखार आना। रात में सोते समय अचानक बहुत पसीना आना और वजन का कम होना।
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ऐसे करें बचाव
- खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को रुमाल या टिश्यू से ढकें।
- भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए हरी सब्जियों का सेवन करें।
- टीबी के लक्षण प्रतीत होने पर तुरंत ही बलगम की जांच कराएं।
कोट

टीबी रोगियों के खोज के लिए गांवों में स्क्रीनिंग की जा रही है। 77,222 लाेगों के एक्स-रे किए गए। जिसमें टीबी के 4055 नए रोगी मिलने पर उनका उपचार शुरू कर दिया गया है।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।
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