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Basti News: बाल क्षय रोगियों की पहचान व उपचार में मदद करेंगी स्टाफ नर्स
Fri, 28 Mar 2025 12:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 28 Mar 2025 12:41 AM IST
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बस्ती। सरकारी और निजी अस्पतालों में कार्यरत स्टाफ नर्स और बाल रोग विशेषज्ञ बाल क्षय रोगियों की पहचान और उपचार में सहयोग करेंगे। बृहस्पतिवार को एएनएम प्रशिक्षण केंद्र में स्टाफ नर्स को बाल क्षय रोगियों की पहचान के संबंध में प्रशिक्षित किया गया। उन्हें जरूरी टिप्स भी दिए गए।
वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स संस्था के माध्यम से एक दिवसीय प्रशिक्षण में जिलेभर की चिह्नित पीडियाट्रिक से संबंधित स्टाफ नर्स और चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया। उन्हें प्रशिक्षित किया गया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि बच्चों में क्षय रोग यानी टीबी की पहचान करना वयस्कों की तुलना में अधिक चुनौती पूर्ण होता है। इसलिए स्टाफ नर्सों को इस कार्य में विशेष दक्ष बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्टाफ नर्स अस्पताल में आने वाले बच्चों में टीबी के संभावित लक्षणों की पहचान कर उन्हें जांच के लिए प्रेरित करेंगी। इससे समय से उनका उपचार शुरू हो सकेगा। स्टेट नर्स मेंटर दिलशाद बानो ने बताया कि बच्चों में लगातार लंबे समय से खांसी आना, वजन कम होना, बुखार और सुस्ती जैसे लक्षण टीबी के संकेत हो सकते हैं। स्टाफ नर्सों को इन लक्षणों की पहचान कर टीबी जांच कराने और फिर उपचार शुरू करने के लिए तौर-तरीके सुझाए गए। स्टाफ नर्सों को डेमो के जरिये जानकारी दी। जिला कार्यक्रम समन्वयक डब्ल्यूएचपी अभिमात चौधरी, डॉ. बबिता पांडेय, ममता कश्यप, कल्पना मिश्रा, रीना कुमारी, लक्ष्मी त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स संस्था के माध्यम से एक दिवसीय प्रशिक्षण में जिलेभर की चिह्नित पीडियाट्रिक से संबंधित स्टाफ नर्स और चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया। उन्हें प्रशिक्षित किया गया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि बच्चों में क्षय रोग यानी टीबी की पहचान करना वयस्कों की तुलना में अधिक चुनौती पूर्ण होता है। इसलिए स्टाफ नर्सों को इस कार्य में विशेष दक्ष बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्टाफ नर्स अस्पताल में आने वाले बच्चों में टीबी के संभावित लक्षणों की पहचान कर उन्हें जांच के लिए प्रेरित करेंगी। इससे समय से उनका उपचार शुरू हो सकेगा। स्टेट नर्स मेंटर दिलशाद बानो ने बताया कि बच्चों में लगातार लंबे समय से खांसी आना, वजन कम होना, बुखार और सुस्ती जैसे लक्षण टीबी के संकेत हो सकते हैं। स्टाफ नर्सों को इन लक्षणों की पहचान कर टीबी जांच कराने और फिर उपचार शुरू करने के लिए तौर-तरीके सुझाए गए। स्टाफ नर्सों को डेमो के जरिये जानकारी दी। जिला कार्यक्रम समन्वयक डब्ल्यूएचपी अभिमात चौधरी, डॉ. बबिता पांडेय, ममता कश्यप, कल्पना मिश्रा, रीना कुमारी, लक्ष्मी त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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