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कुछ को भाया, कुछ को रुलाया

Thu, 01 Feb 2018 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती Updated Thu, 01 Feb 2018 11:47 PM IST
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Some, brother, some rolled up
budget
बस्ती। आम बजट-2018 में जेटली ने अपनी पोटली से कुछ न कुछ तोहफा देकर रिझाने का प्रयास किया। सत्ता पक्ष इसे ऐतिहासिक बताते नहीं थक रहा, जबकि विपक्षी तमाम मीन-मेख निकालने में जुटे हैं। आम आवाम ने मिशन 2019 के टारगेट पर काम कर रही मोदी सरकार के लोक-लुभावन सौगात की आस लगा रखा था मगर उन्हें निराशा हाथ लगी। 
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कृषि में लागत कम करते उपज का वाजिब दाम दिलाने का बिना पुख्ता इंतजाम बताए किसानों की आय डेढ़ गुना बढ़ाने का वादा किस आधार पर किया जा रहा है, वह कैसे होगा इसका खाका नहीं खींचा गया। जितनी एक्साइज ड्यूटी घटाई गई उतना सेस के रूप में (टैक्स पर टैक्स) बढ़ा दिया। सीमा शुल्क बढ़ाने से कारें, एलसीडी और एलईडी टीवी, मोबाइल फोन, सोना-चांदी, परफ्यूम, डेंटल हाइजीन, आफ्टर शेव, ड्योडरेंट, रूम फ्रेशनर, बालों में इस्तेमाल होने वाले ऐसे उत्पाद महंगे होंगे, जिसकी खपत ज्यादा है। जबकि आयातित काजू, सोलर टेंपर्ड ग्लास, श्रवण यंत्र और प्रत्यारोपण से जुड़े उपकरण, बॉल स्क्रू, लिनियर मोशन गाइड जैसी चुनिंदा वस्तुओं को सस्ता किया गया। आम लोगों में इस बजट को लेकर ठंडी प्रतिक्रिया जताई जा रही है। जानकार इसे अच्छे दिन के सपने दिखाने वाला बजट बता रहे हैं। 
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