{"_id":"693878e93f5a58317b08955a","slug":"sir-entangled-in-mappingdifficult-to-find-data-basti-news-c-207-1-bst1001-149184-2025-12-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: मैपिंग में उलझा एसआईआर...डाटा ढूंढना दुश्वार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: मैपिंग में उलझा एसआईआर...डाटा ढूंढना दुश्वार
विज्ञापन
रामनगर बूथ संख्या- 59 पर एसआईआर प्रक्रिया पूरी करते बीएलओ एवं सहयोगी गण।
- फोटो : बौद्ध परिपथ पर छाया घना कोहरा।
बस्ती। अभिलेख में प्रथम चरण के एसआईआर की प्रगति भले ही संतोषजनक हो लेकिन, सच्चाई में अभी बमुश्किल पचास प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग वर्ष 2003 के रिकाॅर्ड से नहीं हो सकी हैं। शुरूआत में ही अफसर से लेकर सुपरवाइजर तक का दबाव बीएलओ पर भारी पड़ गया।
चुनाव आयोग के सुझाए गए दिशा निर्देश को दरकिनार कर मतदाताओं का डाटा जैसे तैसे फीड कर दिया गया। लेकिन, मैपिंग में मामला आकर फंस गया। बड़ी संख्या में मतदाताओं की पुरानी पृष्टिभूमि नए एसआईआर में नहीं दर्ज हो पाई है। अब बीएलओ को लगाकर इस कार्य को फिर से कराया जा रहा है।
अंदरखाने की खबर हैं कि एसआईआर की डाटा फीडिंग का आंकड़ा जिले भर में 90 प्रतिशत के आसपास पहुंच गया है। लेकिन, पचास प्रतिशत मतदाताओं के डाटा में ही स्पष्टता है। शेष 40 फीसदी मतदाताओं के एसआईआर डाटा में उनकी पुरानी पृष्टि भूमि से जुड़े डाटा मेल नहीं खा रहे हैं। इस वजह से अधिकांश बीएलओ को दोबारा मतदाताओं के डाटा फीडिंग का जिम्मा सौंपा गया है।
विज्ञापन
सूत्र बताते हैं कि समय की बाध्यता में एसआईआर प्रक्रिया पूरा करने के दबाव में तमाम मतदाताओं की डाटा फीडिंग गलत कर दी गई है। शिफ्टेड एवं मृतक मतदाता भी गलत फीड हो गए हैं। इसको लेकर अब शिकायतें आने लगी हैं। अधिकांश बूथ पर 10 से 20 मतदाता ऐसे मिल रहे हैं जिन्हें शिफ्टेड अथवा मृतक की श्रेणी में डाल दिया गया है। प्रशासन अब ऐसे मतदाताओं की फिर से खोजबीन करा रहा है।
जिले में 19,00430 मतदाताओं का होना है एसआईआर : जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में कुल मतदाताओं की संख्या 1900430 है। चुनाव आयोग की तरफ से इतने मतदाताओं का डिजिटल एसआईआर फार्म भी जारी किया जा चुका है। यह फार्म दो प्रतियों में है।
एक मतदाता के पास रहेगा दूसरा फार्म बीएलओ को भरकर देना होता है। इसी के आधार पर डाटा फीडिंग कराई जा रही है। एक सप्ताह पहले तक जिले भर में 1617762 मतदाताओं की एसआईआर प्रक्रिया पूरी बताई गई। लेकिन, इस आंकड़े में तमाम त्रुटियां सामने आने लगी। बताया जा रहा है कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने वाले मतदाताओं में से लगभग 40 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग 2003 की सूची तालमेल नहीं खा रही है। इस वजह से मैपिंग का कार्य फिर से कराया जा रहा है।
ऐसे पूरी करनी थी एसआईआर प्रक्रिया : जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में मतदाता का वर्ष 2003 का रिकाॅर्ड और आधार या उसकी जगह पर अन्य किसी पहचान पत्र का ब्योरा फीड करना है। यदि वर्तमान का मतदाता वर्ष 2003 में मतदाता नहीं हैं तो उनकी जगह पर परिवार के किसी सदस्य जैसे माता-पिता का मतदाता विवरण भरना है।
इसके अलावा यदि मतदाता का 2003 का निवास बदलकर दूसरे जगह हो गया है तो उसके पुराने निवास स्थल के मतदाता होने का प्रमाणित डाटा भरना जरूरी है। मामला वर्ष 2003 का डाटा ढूंढ़ने में ही उलझ जा रहा है। निवास स्थल बदलने वाले मतदाताओं या किन्हीं कारण वश 2003 की मतदाता सूची नाम रहने के कारण तमाम मतदाताओं की एसआईआर प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण हो रही है।
विज्ञापन
चुनाव आयोग के सुझाए गए दिशा निर्देश को दरकिनार कर मतदाताओं का डाटा जैसे तैसे फीड कर दिया गया। लेकिन, मैपिंग में मामला आकर फंस गया। बड़ी संख्या में मतदाताओं की पुरानी पृष्टिभूमि नए एसआईआर में नहीं दर्ज हो पाई है। अब बीएलओ को लगाकर इस कार्य को फिर से कराया जा रहा है।
विज्ञापन
अंदरखाने की खबर हैं कि एसआईआर की डाटा फीडिंग का आंकड़ा जिले भर में 90 प्रतिशत के आसपास पहुंच गया है। लेकिन, पचास प्रतिशत मतदाताओं के डाटा में ही स्पष्टता है। शेष 40 फीसदी मतदाताओं के एसआईआर डाटा में उनकी पुरानी पृष्टि भूमि से जुड़े डाटा मेल नहीं खा रहे हैं। इस वजह से अधिकांश बीएलओ को दोबारा मतदाताओं के डाटा फीडिंग का जिम्मा सौंपा गया है।
विज्ञापन
सूत्र बताते हैं कि समय की बाध्यता में एसआईआर प्रक्रिया पूरा करने के दबाव में तमाम मतदाताओं की डाटा फीडिंग गलत कर दी गई है। शिफ्टेड एवं मृतक मतदाता भी गलत फीड हो गए हैं। इसको लेकर अब शिकायतें आने लगी हैं। अधिकांश बूथ पर 10 से 20 मतदाता ऐसे मिल रहे हैं जिन्हें शिफ्टेड अथवा मृतक की श्रेणी में डाल दिया गया है। प्रशासन अब ऐसे मतदाताओं की फिर से खोजबीन करा रहा है।
जिले में 19,00430 मतदाताओं का होना है एसआईआर : जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में कुल मतदाताओं की संख्या 1900430 है। चुनाव आयोग की तरफ से इतने मतदाताओं का डिजिटल एसआईआर फार्म भी जारी किया जा चुका है। यह फार्म दो प्रतियों में है।
एक मतदाता के पास रहेगा दूसरा फार्म बीएलओ को भरकर देना होता है। इसी के आधार पर डाटा फीडिंग कराई जा रही है। एक सप्ताह पहले तक जिले भर में 1617762 मतदाताओं की एसआईआर प्रक्रिया पूरी बताई गई। लेकिन, इस आंकड़े में तमाम त्रुटियां सामने आने लगी। बताया जा रहा है कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने वाले मतदाताओं में से लगभग 40 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग 2003 की सूची तालमेल नहीं खा रही है। इस वजह से मैपिंग का कार्य फिर से कराया जा रहा है।
ऐसे पूरी करनी थी एसआईआर प्रक्रिया : जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में मतदाता का वर्ष 2003 का रिकाॅर्ड और आधार या उसकी जगह पर अन्य किसी पहचान पत्र का ब्योरा फीड करना है। यदि वर्तमान का मतदाता वर्ष 2003 में मतदाता नहीं हैं तो उनकी जगह पर परिवार के किसी सदस्य जैसे माता-पिता का मतदाता विवरण भरना है।
इसके अलावा यदि मतदाता का 2003 का निवास बदलकर दूसरे जगह हो गया है तो उसके पुराने निवास स्थल के मतदाता होने का प्रमाणित डाटा भरना जरूरी है। मामला वर्ष 2003 का डाटा ढूंढ़ने में ही उलझ जा रहा है। निवास स्थल बदलने वाले मतदाताओं या किन्हीं कारण वश 2003 की मतदाता सूची नाम रहने के कारण तमाम मतदाताओं की एसआईआर प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण हो रही है।