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Basti News: चिकित्सक न जांच की सुविधा...दर्जा एफआरयू का
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भानपुर, मंगलवार को चादर से ढकी मिला एक्स-रे जांच मशीन का प्रिंटर संवाद
भानपुर। तहसील क्षेत्र के मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भानपुर को एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट यानी प्रथम संदर्भन इकाई) का दर्जा दिया गया था। इसके बावजूद यहां मरीजों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी नहीं है। सामान्य सर्जन नहीं होने से ऑपरेशन के लिए दूसरे अस्पताल से चिकित्सक बुलाने पड़ते हैं।
करीब दो लाख की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने वाले सीएचसी में जरूरी चिकित्सा उपकरणों की भी कमी है। अस्पताल में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन उपलब्ध है लेकिन मंगलवार को इससे एक भी जांच नहीं हुई। अस्पताल कर्मियों के अनुसार मशीन कभी-कभार ही संचालित होती है। हेल्थ एटीएम की सुविधा भी नहीं है। सीएचसी में एमओ के तौर पर डॉ. सचिन चौधरी, जनरल फिजिशियन डॉ. उत्कर्ष श्रीवास्तव, एमबीबीएस डॉ. राजनबाबू, एनेस्थीसिया में डॉ. बृजेश सिंह, गायनी में डॉ. मनीषा सिंह और एमओ के रूप में डॉ. संजू कन्नौजिया की तैनाती बताई गई है।
मंगलवार को डॉ. सचिन चौधरी और डॉ. उत्कर्ष श्रीवास्तव ही अस्पताल में मिले। अन्य चिकित्सक मौजूद नहीं थे। एक्स-रे संचालन के लिए टेक्नीशियन मनोज कुमार और डेंटल हाइजीनिस्ट के तौर पर विमल कुमार चौधरी तैनात हैं। विमल कुमार ने बताया कि दंत कक्ष में लगी डेंटल चेयर का हाइड्रोलिक सिस्टम खराब है। इससे मरीजों की जांच और उपचार में असुविधा होती है। इसके लिए इंडेंट भेजा गया है।
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आंखों की जांच के लिए नेत्र परीक्षण अधिकारी प्रमोद हर्ष तैनात हैं। फार्मेसी में तीन पद स्वीकृत हैं और तीनों पर तैनाती है। चीफ फार्मासिस्ट वीरेंद्र मिश्रा तथा फार्मासिस्ट सूर्यनाथ यादव और देवेंद्र कुमार पटेल तैनात हैं। देवेंद्र पटेल पीएचसी सगरा में संबद्ध हैं। अस्पताल में आकस्मिक सेवा के लिए निर्धारित 241 के सापेक्ष 203 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं।
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छह माह से प्रभावित हैं कई जांचें
पैथोलॉजी में एलटी के तौर पर भवानी शंकर दूबे, अरविंद कुमार त्रिपाठी और वंदना चौधरी तैनात हैं। यहां एचबी, शुगर, आरवीएस, एचआईबी, बीडीआरएल, एचसीवी, ब्लड ग्रुप और रिएजेंट उपलब्ध होने पर सीबीसी की जांच होती है। मलेरिया, टाइफाइड, एल्ब्यूमिन, शुगर, एएफबी और ट्रू-नॉट की जांच भी की जाती है। सेमी-ऑटो एनालाइजर मशीन का रिएजेंट उपलब्ध नहीं होने से एलएफटी, केएफटी और लिपिड प्रोफाइल की जांच करीब छह माह से प्रभावित है। इससे मरीजों को इन जांचों के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।-- -- -- -
प्रसव की सुविधा, लेकिन विशेषज्ञों की कमी
प्रसव कक्ष में स्टाफ नर्स अनुपम गौड़, संगीता वर्मा और जनक नंदिनी सिंह तैनात हैं। एनबीएसयू वार्ड में सरोजदेवी, प्रियंका और पूजा स्टाफ नर्स हैं। एमओआईसी के अनुसार एमओ के पांच पद स्वीकृत हैं और सभी पर तैनाती है। हालांकि आर्थो सर्जन और बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। ऑपरेशन के लिए रुधौली से चिकित्सक बुलाए जाते हैं। एफआरयू में पिछले माह पांच सिजेरियन प्रसव हुए थे, जबकि इस माह अभी तक एक भी सीजर नहीं हुआ है। प्रसव के बाद नवजात की विशेषज्ञ से जांच की जरूरत पड़ने पर भी समस्या सामने आती है। सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण बच्चों को दूसरे अस्पताल भेजना पड़ सकता है।
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बोले- तीमारदार
अस्पताल में मरीजों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच-चेयर नहीं हैं। अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने से बाहर जांच करानी पड़ती है, जिसमें 700 से 800 रुपये खर्च हो जाते हैं।
-कृष्ण नारायण मिश्र, कटया
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दवा तो मिल जाती है, लेकिन जरूरी जांच के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड जांच नहीं होती, जबकि अस्पताल एफआरयू में है। गर्भवती महिलाएं कहां जाएं।
-अंजनी देवी, उकड़ा
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अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है। सामान्य चिकित्सक ही उपचार करते हैं। दवा तो मिल जाती है, लेकिन सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
-शारजहां, जमोहना
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जरूरी दवाएं मिल जाती हैं। अस्पताल में सुधार की जरूरत है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के साथ अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि मरीजों को इसका लाभ मिल सके।
-कैलाशपति, खरहराजप्ती
कोट
सीएचसी भानपुर एफआरयू के रूप में संचालित है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के जो पद रिक्त हैं, उन्हें भरने का प्रयास किया जाएगा। अल्ट्रासाउंड मशीन और चिकित्सक की उपलब्धता के लिए भी प्रयास होगा।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती
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करीब दो लाख की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने वाले सीएचसी में जरूरी चिकित्सा उपकरणों की भी कमी है। अस्पताल में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन उपलब्ध है लेकिन मंगलवार को इससे एक भी जांच नहीं हुई। अस्पताल कर्मियों के अनुसार मशीन कभी-कभार ही संचालित होती है। हेल्थ एटीएम की सुविधा भी नहीं है। सीएचसी में एमओ के तौर पर डॉ. सचिन चौधरी, जनरल फिजिशियन डॉ. उत्कर्ष श्रीवास्तव, एमबीबीएस डॉ. राजनबाबू, एनेस्थीसिया में डॉ. बृजेश सिंह, गायनी में डॉ. मनीषा सिंह और एमओ के रूप में डॉ. संजू कन्नौजिया की तैनाती बताई गई है।
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मंगलवार को डॉ. सचिन चौधरी और डॉ. उत्कर्ष श्रीवास्तव ही अस्पताल में मिले। अन्य चिकित्सक मौजूद नहीं थे। एक्स-रे संचालन के लिए टेक्नीशियन मनोज कुमार और डेंटल हाइजीनिस्ट के तौर पर विमल कुमार चौधरी तैनात हैं। विमल कुमार ने बताया कि दंत कक्ष में लगी डेंटल चेयर का हाइड्रोलिक सिस्टम खराब है। इससे मरीजों की जांच और उपचार में असुविधा होती है। इसके लिए इंडेंट भेजा गया है।
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आंखों की जांच के लिए नेत्र परीक्षण अधिकारी प्रमोद हर्ष तैनात हैं। फार्मेसी में तीन पद स्वीकृत हैं और तीनों पर तैनाती है। चीफ फार्मासिस्ट वीरेंद्र मिश्रा तथा फार्मासिस्ट सूर्यनाथ यादव और देवेंद्र कुमार पटेल तैनात हैं। देवेंद्र पटेल पीएचसी सगरा में संबद्ध हैं। अस्पताल में आकस्मिक सेवा के लिए निर्धारित 241 के सापेक्ष 203 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं।
छह माह से प्रभावित हैं कई जांचें
पैथोलॉजी में एलटी के तौर पर भवानी शंकर दूबे, अरविंद कुमार त्रिपाठी और वंदना चौधरी तैनात हैं। यहां एचबी, शुगर, आरवीएस, एचआईबी, बीडीआरएल, एचसीवी, ब्लड ग्रुप और रिएजेंट उपलब्ध होने पर सीबीसी की जांच होती है। मलेरिया, टाइफाइड, एल्ब्यूमिन, शुगर, एएफबी और ट्रू-नॉट की जांच भी की जाती है। सेमी-ऑटो एनालाइजर मशीन का रिएजेंट उपलब्ध नहीं होने से एलएफटी, केएफटी और लिपिड प्रोफाइल की जांच करीब छह माह से प्रभावित है। इससे मरीजों को इन जांचों के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।
प्रसव की सुविधा, लेकिन विशेषज्ञों की कमी
प्रसव कक्ष में स्टाफ नर्स अनुपम गौड़, संगीता वर्मा और जनक नंदिनी सिंह तैनात हैं। एनबीएसयू वार्ड में सरोजदेवी, प्रियंका और पूजा स्टाफ नर्स हैं। एमओआईसी के अनुसार एमओ के पांच पद स्वीकृत हैं और सभी पर तैनाती है। हालांकि आर्थो सर्जन और बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। ऑपरेशन के लिए रुधौली से चिकित्सक बुलाए जाते हैं। एफआरयू में पिछले माह पांच सिजेरियन प्रसव हुए थे, जबकि इस माह अभी तक एक भी सीजर नहीं हुआ है। प्रसव के बाद नवजात की विशेषज्ञ से जांच की जरूरत पड़ने पर भी समस्या सामने आती है। सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण बच्चों को दूसरे अस्पताल भेजना पड़ सकता है।
बोले- तीमारदार
अस्पताल में मरीजों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच-चेयर नहीं हैं। अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने से बाहर जांच करानी पड़ती है, जिसमें 700 से 800 रुपये खर्च हो जाते हैं।
-कृष्ण नारायण मिश्र, कटया
दवा तो मिल जाती है, लेकिन जरूरी जांच के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड जांच नहीं होती, जबकि अस्पताल एफआरयू में है। गर्भवती महिलाएं कहां जाएं।
-अंजनी देवी, उकड़ा
अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है। सामान्य चिकित्सक ही उपचार करते हैं। दवा तो मिल जाती है, लेकिन सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
-शारजहां, जमोहना
जरूरी दवाएं मिल जाती हैं। अस्पताल में सुधार की जरूरत है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के साथ अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि मरीजों को इसका लाभ मिल सके।
-कैलाशपति, खरहराजप्ती
कोट
सीएचसी भानपुर एफआरयू के रूप में संचालित है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के जो पद रिक्त हैं, उन्हें भरने का प्रयास किया जाएगा। अल्ट्रासाउंड मशीन और चिकित्सक की उपलब्धता के लिए भी प्रयास होगा।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती