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Basti News: रास्ता साफ देख साथी देते हैं हरी झंडी...फिर बढ़ती है तस्करों की गाड़ीग
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बस्ती। पशुओं को लादकर जिले से निकलने वाली गाड़ी के आगे एक दूसरी गाड़ी में तस्करों के मुखबिर चलते हैं। रास्ते में पुलिस की गश्त या पहरा देखकर पिछली गाड़ी में सवार साथियों को अलर्ट कर उनका रास्ता बदलवा देते हैं अगर रास्ता साफ है तभी गाड़ी आगे बढ़ती है। इन मुखबिरों का काम सिर्फ जिले की सीमा तक होता है। अगले जिले में दूसरी टीम मदद करती है। यही वजह है कि पुलिस पशु तस्करों का तिलिस्म तोड़ नहीं पा रही है।
अफसर कितने भी दावे करें लेकिन पशु तस्कर बेलगाम हैं। आए दिन हो रही पशुओं की चोरी इसकी तस्दीक कर रही है। सूत्रों के मुताबिक जिले में गोंडा, आंबेडकर नगर के अलावा पश्चिमी यूपी के पशु तस्कर भी सक्रिय हैं। इस समय पश्चिम के तस्कर ज्यादा सक्रिय बताए जा रहे हैं और गांव-गांव में नेटवर्क खड़ा कर रखा है।
इनके नेटवर्क में शामिल स्थानीय युवा दिन में रेकी कर बताते हैं कि किन गांवों से गाय-भैंस की चोरी की जा सकती है। फिर रात में तस्करों के गुर्गे पशु चोरी कर बताए ठिकाने पर पहुंचा देते हैं। इसके बाद फोरलेन या रामजानकी मार्ग को पकड़ते हुए कलवारी थाने के सामने से होकर टांडा पुल पार करते हुए आंबेडकर नगर जिले में प्रवेश कर जाते है। बताया जा रहा है कि तस्करों के गुर्गे आधी रात के बाद पिकअप में पशु लादकर निकलते हैं। उनकी पिकअप के आगे या पीछे एक वाहन भी रहता है, ताकि पकड़े जाने की नौबत आए तो उन्हें निकाला जा सके।
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इसके अलावा तस्कर छावनी, विक्रमजोत होकर अयोध्या पुल पार कर जुबेरगंज चले जाते हैं। कलवारी क्षेत्र के कुसौरी गांव में तस्करों की गाड़ियां भी सुनसान जगहों पर खड़ी रहतीं हैं। दुबौलिया थाना क्षेत्र में परखती घाट, चिलबिला, कप्तानगंज के गौरा, वाल्टरगंज के जमदा शाही, पैकोलिया के करनपुर और कुरदा भी पशु तस्करों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। तस्कर अपनी गाड़ियों की नंबर प्लेट पर कीचड़ या मिट्टी का लेप लगा देते है जिससे सीसीटीवी फुटेज से गाड़ियाें का नंबर पता नहीं चल पाता।
चार साल पहले कप्तानगंज थाना क्षेत्र के परिवारपुर गांव के निकट संतकबीरनगर के पशु तस्करों को ग्रामीणों ने पकड़ा गया था। क्षेत्र के विजय पाल सिंह, वरुण तिवारी, राम गोपाल मिश्रा, प्रमोद पांडेय ने बताया कि यदि पुलिस सक्रिय हो जाय तो तस्करों का बड़ा गिरोह पकड़ा जा सकता है।
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अफसर कितने भी दावे करें लेकिन पशु तस्कर बेलगाम हैं। आए दिन हो रही पशुओं की चोरी इसकी तस्दीक कर रही है। सूत्रों के मुताबिक जिले में गोंडा, आंबेडकर नगर के अलावा पश्चिमी यूपी के पशु तस्कर भी सक्रिय हैं। इस समय पश्चिम के तस्कर ज्यादा सक्रिय बताए जा रहे हैं और गांव-गांव में नेटवर्क खड़ा कर रखा है।
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इनके नेटवर्क में शामिल स्थानीय युवा दिन में रेकी कर बताते हैं कि किन गांवों से गाय-भैंस की चोरी की जा सकती है। फिर रात में तस्करों के गुर्गे पशु चोरी कर बताए ठिकाने पर पहुंचा देते हैं। इसके बाद फोरलेन या रामजानकी मार्ग को पकड़ते हुए कलवारी थाने के सामने से होकर टांडा पुल पार करते हुए आंबेडकर नगर जिले में प्रवेश कर जाते है। बताया जा रहा है कि तस्करों के गुर्गे आधी रात के बाद पिकअप में पशु लादकर निकलते हैं। उनकी पिकअप के आगे या पीछे एक वाहन भी रहता है, ताकि पकड़े जाने की नौबत आए तो उन्हें निकाला जा सके।
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इसके अलावा तस्कर छावनी, विक्रमजोत होकर अयोध्या पुल पार कर जुबेरगंज चले जाते हैं। कलवारी क्षेत्र के कुसौरी गांव में तस्करों की गाड़ियां भी सुनसान जगहों पर खड़ी रहतीं हैं। दुबौलिया थाना क्षेत्र में परखती घाट, चिलबिला, कप्तानगंज के गौरा, वाल्टरगंज के जमदा शाही, पैकोलिया के करनपुर और कुरदा भी पशु तस्करों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। तस्कर अपनी गाड़ियों की नंबर प्लेट पर कीचड़ या मिट्टी का लेप लगा देते है जिससे सीसीटीवी फुटेज से गाड़ियाें का नंबर पता नहीं चल पाता।
चार साल पहले कप्तानगंज थाना क्षेत्र के परिवारपुर गांव के निकट संतकबीरनगर के पशु तस्करों को ग्रामीणों ने पकड़ा गया था। क्षेत्र के विजय पाल सिंह, वरुण तिवारी, राम गोपाल मिश्रा, प्रमोद पांडेय ने बताया कि यदि पुलिस सक्रिय हो जाय तो तस्करों का बड़ा गिरोह पकड़ा जा सकता है।