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Basti News: सरयू का पानी घटा, अब 25 गांवों में संक्रामक बीमारी का खतरा, कटान देख सहमे लोग
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बस्ती। सरयू का जलस्तर अब लगातार घटने लगा है। खेत-खलिहान और गांवों से बाढ़ का पानी उतरने के बाद 25 बाढ़ प्रभावित गांवों में अब संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश प्रभावित गांवों में अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है। ऐसे में समय रहते साफ-सफाई, दवा वितरण और छिड़काव नहीं हुआ तो बीमारी फैलने की आशंका है। वहीं कटान देख ग्रामीण सहमे हुए हैं।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेतों में कई दिनों से डूबी फसल और घास-वनस्पतियां सड़ने लगी हैं। इससे आसपास दुर्गंध फैल रही है। वहीं, घरों और गांवों के आसपास गड्ढों व निचले स्थानों में पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, बुखार, दस्त और त्वचा संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। लोगों ने प्रभावित इलाकों में तत्काल दवा का छिड़काव और जल निकासी कराने की मांग की है।
दुबौलिया संवाद के अनुसार, केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार शुक्रवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.360 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान से 37 सेंटीमीटर नीचे है। पिछले 24 घंटे में जलस्तर करीब 13 सेंटीमीटर घटा है। जलस्तर कम होने से मैरुंड गांव सुविका में बाढ़ का पानी तेजी से उतर रहा है। पगडंडियां भी धीरे-धीरे सूखने लगी हैं। ग्रामीण रामनाथ ने बताया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। देवलाल ने बताया कि ऊंचे खेतों की फसल तो बच गई, लेकिन निचले खेतों में कई दिनों तक पानी में डूबी फसल खराब हो गई। सड़ रही फसल और वनस्पतियों से दुर्गंध उठ रही है। गांव के आसपास जमा पानी में मच्छरों की संख्या भी बढ़ गई है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं।
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विक्रमजोत संवाद के अनुसार, बीडी तटबंध और सरयू नदी के बीच बसे शंभूपुर, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत करीब 20 गांवों में बाढ़ के बाद दुश्वारियां बढ़ गई हैं। ग्रामीण रामनेवास, राम केवल और दीनानाथ ने बताया कि समय रहते बचाव कार्य नहीं कराया गया तो बच्चों और पशुओं में संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, पीने के लिए स्वच्छ पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। खेत-खलिहान से दुर्गंध उठने के कारण वातावरण दूषित हो रहा है। अभी तक कई गांवों में छिड़काव और दवा वितरण नहीं कराया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवारों में लोग बीमारी की चपेट में हैं। कुछ गांवों में कटान का खतरा भी बना हुआ है। उपचार के लिए ग्रामीणों को विक्रमजोत और हर्रैया सीएचसी जाना पड़ रहा है।
बीमारी से बचाव के लिए चिकित्सक की सलाह
फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी के अनुसार बाढ़ के बाद दूषित पानी और खराब स्वच्छता से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने लोगों को इन सावधानियों की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि बाढ़ के पानी या संदिग्ध स्रोत का पानी पीने से बचें। पीने और खाना बनाने के लिए उबला या सुरक्षित पानी इस्तेमाल करें। दस्त या उल्टी होने पर शरीर में पानी की कमी न होने दें और ओआरएस का घोल लें। खाना खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं। जमा पानी में मच्छरों की संख्या बढ़ सकती है, इसलिए मच्छरदानी और अन्य बचाव के उपाय अपनाएं। बाढ़ के पानी के संपर्क में आई खाद्य सामग्री का इस्तेमाल न करें। तेज बुखार, लगातार दस्त-उल्टी, चक्कर, त्वचा संक्रमण या चोट होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें।
सरयू का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। तटबंधों पर फिलहाल खतरा नहीं है। फिर भी तटबंध और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और पानी साफ करने के लिए क्लोरीन की गोलियां वितरित की जा रही हैं।
- इं. दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड
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बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेतों में कई दिनों से डूबी फसल और घास-वनस्पतियां सड़ने लगी हैं। इससे आसपास दुर्गंध फैल रही है। वहीं, घरों और गांवों के आसपास गड्ढों व निचले स्थानों में पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, बुखार, दस्त और त्वचा संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। लोगों ने प्रभावित इलाकों में तत्काल दवा का छिड़काव और जल निकासी कराने की मांग की है।
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दुबौलिया संवाद के अनुसार, केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार शुक्रवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.360 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान से 37 सेंटीमीटर नीचे है। पिछले 24 घंटे में जलस्तर करीब 13 सेंटीमीटर घटा है। जलस्तर कम होने से मैरुंड गांव सुविका में बाढ़ का पानी तेजी से उतर रहा है। पगडंडियां भी धीरे-धीरे सूखने लगी हैं। ग्रामीण रामनाथ ने बताया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। देवलाल ने बताया कि ऊंचे खेतों की फसल तो बच गई, लेकिन निचले खेतों में कई दिनों तक पानी में डूबी फसल खराब हो गई। सड़ रही फसल और वनस्पतियों से दुर्गंध उठ रही है। गांव के आसपास जमा पानी में मच्छरों की संख्या भी बढ़ गई है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं।
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विक्रमजोत संवाद के अनुसार, बीडी तटबंध और सरयू नदी के बीच बसे शंभूपुर, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत करीब 20 गांवों में बाढ़ के बाद दुश्वारियां बढ़ गई हैं। ग्रामीण रामनेवास, राम केवल और दीनानाथ ने बताया कि समय रहते बचाव कार्य नहीं कराया गया तो बच्चों और पशुओं में संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, पीने के लिए स्वच्छ पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। खेत-खलिहान से दुर्गंध उठने के कारण वातावरण दूषित हो रहा है। अभी तक कई गांवों में छिड़काव और दवा वितरण नहीं कराया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवारों में लोग बीमारी की चपेट में हैं। कुछ गांवों में कटान का खतरा भी बना हुआ है। उपचार के लिए ग्रामीणों को विक्रमजोत और हर्रैया सीएचसी जाना पड़ रहा है।
बीमारी से बचाव के लिए चिकित्सक की सलाह
फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी के अनुसार बाढ़ के बाद दूषित पानी और खराब स्वच्छता से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने लोगों को इन सावधानियों की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि बाढ़ के पानी या संदिग्ध स्रोत का पानी पीने से बचें। पीने और खाना बनाने के लिए उबला या सुरक्षित पानी इस्तेमाल करें। दस्त या उल्टी होने पर शरीर में पानी की कमी न होने दें और ओआरएस का घोल लें। खाना खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं। जमा पानी में मच्छरों की संख्या बढ़ सकती है, इसलिए मच्छरदानी और अन्य बचाव के उपाय अपनाएं। बाढ़ के पानी के संपर्क में आई खाद्य सामग्री का इस्तेमाल न करें। तेज बुखार, लगातार दस्त-उल्टी, चक्कर, त्वचा संक्रमण या चोट होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें।
सरयू का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। तटबंधों पर फिलहाल खतरा नहीं है। फिर भी तटबंध और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और पानी साफ करने के लिए क्लोरीन की गोलियां वितरित की जा रही हैं।
- इं. दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड