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Basti News: पांच सेंटीमीटर घटा सरयू का जलस्तर, मैरुंड गांवों की दुश्वारियां बरकरार
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नाव के सहारे स्कूल जाते बलुईया गांव के बच्चे संवाद
बस्ती। नेपाल के बैराजों से सरयू नदी में पानी का डिस्चार्ज कम होने के बाद शनिवार को नदी के जलस्तर में करीब पांच सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। हालांकि, नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जलस्तर घटने के साथ तटवर्ती इलाकों में कटान का खतरा बढ़ गया है। कई स्थानों पर कटान शुरू होने से किसानों की फसल नदी में समाने लगी है। बाढ़ प्रभावित मैरुंड गांवों में ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। कई गांवों के लोग अब भी नाव और मोटरबोट के सहारे आवागमन कर रहे हैं।
केंद्रीय जल आयोग के अयोध्या कार्यालय के अनुसार शनिवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.95 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 92.73 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर में कमी के बावजूद तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। इसे देखते हुए बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन कई जगह अब भी जलभराव है। पानी उतरने के बाद गांवों में कीचड़ और गंदगी की समस्या बढ़ गई है। जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
दुबौलिया क्षेत्र के मैरुंड गांव सुविका बाबू और आंशिक रूप से टेढ़वा के ग्रामीण मोटरबोट के सहारे रोजमर्रा के काम निपटा रहे हैं। बलुईया, सतहा और विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती के आसपास भरा पानी भी धीरे-धीरे उतर रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के कारण खेती और गृहस्थी प्रभावित हुई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी नाव या मोटरबोट से तटबंध तक पहुंचना पड़ रहा है।
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फसलें जलमग्न, किसानों की बढ़ी चिंता
माझा क्षेत्र में अब भी बड़ी मात्रा में फसलें जलमग्न हैं। किसानों को परवल समेत अन्य फसलों के खराब होने की चिंता सता रही है। किसानों राजेंद्र और पुजारी ने बताया कि खेतों में पानी भरा होने से परवल की फसल प्रभावित हो रही है। उमरिया रिंग बांध के पास पिछले सप्ताह हुए कटान स्थल पर मरम्मत का काम और निगरानी जारी है। जलस्तर घटने के साथ कटान की आशंका बढ़ने से बाढ़ खंड के कर्मचारी तटबंधों पर नजर रख रहे हैं।
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विक्रमजोत में भी कटान का खतरा
विक्रमजोत। सरयू का जलस्तर शुक्रवार तक स्थिर रहने के बाद अब धीरे-धीरे घटने लगा है। अपस्ट्रीम के स्टेशनों पर भी जलस्तर में कमी के संकेत मिले हैं। इससे आने वाले दिनों में बाढ़ का पानी और कम होने की उम्मीद है। हालांकि, पानी घटने के साथ दलदली हुई जमीन और तटबंधों के आसपास कटान का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार, कई गांवों के चारों ओर अब भी पानी भरा है। इससे आवागमन और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हैं। मवेशियों के लिए हरे चारे की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो रहा है। नदी और तटबंध के बीच स्थित हजारों बीघा फसल बाढ़ की चपेट में आने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। आपदा प्रभावित गांवों में पानी उतरना शुरू होने के बाद बाढ़ खंड ने कटान प्रभावित गांवों और तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी है। बीडी तटबंध पर दुधौरा के पास कटान रोकने के लिए कर्मचारी डटे हुए हैं। संवाद
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कोट
नदी का जलस्तर कम होने पर कटान का खतरा बढ़ जाता है। विभाग की टीम पूरी तरह सतर्क है। अभी तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। तटबंध के कमजोर स्थानों को चिह्नित कर वहां मजबूती का काम कराया जा रहा है।
-प्रदीप कुमार, जेई बाढ़ खंड
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केंद्रीय जल आयोग के अयोध्या कार्यालय के अनुसार शनिवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.95 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 92.73 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर में कमी के बावजूद तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। इसे देखते हुए बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन कई जगह अब भी जलभराव है। पानी उतरने के बाद गांवों में कीचड़ और गंदगी की समस्या बढ़ गई है। जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
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दुबौलिया क्षेत्र के मैरुंड गांव सुविका बाबू और आंशिक रूप से टेढ़वा के ग्रामीण मोटरबोट के सहारे रोजमर्रा के काम निपटा रहे हैं। बलुईया, सतहा और विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती के आसपास भरा पानी भी धीरे-धीरे उतर रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के कारण खेती और गृहस्थी प्रभावित हुई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी नाव या मोटरबोट से तटबंध तक पहुंचना पड़ रहा है।
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फसलें जलमग्न, किसानों की बढ़ी चिंता
माझा क्षेत्र में अब भी बड़ी मात्रा में फसलें जलमग्न हैं। किसानों को परवल समेत अन्य फसलों के खराब होने की चिंता सता रही है। किसानों राजेंद्र और पुजारी ने बताया कि खेतों में पानी भरा होने से परवल की फसल प्रभावित हो रही है। उमरिया रिंग बांध के पास पिछले सप्ताह हुए कटान स्थल पर मरम्मत का काम और निगरानी जारी है। जलस्तर घटने के साथ कटान की आशंका बढ़ने से बाढ़ खंड के कर्मचारी तटबंधों पर नजर रख रहे हैं।
विक्रमजोत में भी कटान का खतरा
विक्रमजोत। सरयू का जलस्तर शुक्रवार तक स्थिर रहने के बाद अब धीरे-धीरे घटने लगा है। अपस्ट्रीम के स्टेशनों पर भी जलस्तर में कमी के संकेत मिले हैं। इससे आने वाले दिनों में बाढ़ का पानी और कम होने की उम्मीद है। हालांकि, पानी घटने के साथ दलदली हुई जमीन और तटबंधों के आसपास कटान का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार, कई गांवों के चारों ओर अब भी पानी भरा है। इससे आवागमन और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हैं। मवेशियों के लिए हरे चारे की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो रहा है। नदी और तटबंध के बीच स्थित हजारों बीघा फसल बाढ़ की चपेट में आने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। आपदा प्रभावित गांवों में पानी उतरना शुरू होने के बाद बाढ़ खंड ने कटान प्रभावित गांवों और तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी है। बीडी तटबंध पर दुधौरा के पास कटान रोकने के लिए कर्मचारी डटे हुए हैं। संवाद
कोट
नदी का जलस्तर कम होने पर कटान का खतरा बढ़ जाता है। विभाग की टीम पूरी तरह सतर्क है। अभी तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। तटबंध के कमजोर स्थानों को चिह्नित कर वहां मजबूती का काम कराया जा रहा है।
-प्रदीप कुमार, जेई बाढ़ खंड