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Basti News: मनोरमा की सफाई अभियान को मिली धार, महंत ने भी किया श्रमदान
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पोखरा बाजार के बगल स्थित मनोरमा नदी की सफ़ाई करते महंत व ग्रामीण।-संवाद
नगर बाजार। मनोरमा नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए चलाए जा रहे सफाई अभियान को बृहस्पतिवार को और गति मिली। नगर थाना क्षेत्र में ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने नदी में उतरकर श्रमदान किया। अभियान में पोखरा पीठाधीश्वर महंत गिरजेश दास भी शामिल हुए। उन्होंने ग्रामीणों के साथ नदी की सफाई की।
सड़वलिया घाट स्थित स्वर्णेश्वर महादेव मंदिर से मेढ़ौवा तक करीब पांच किलोमीटर नदी की धारा को साफ करने का संकल्प लिया गया है। मनोरमा की बदहाल स्थिति और जलकुंभी से पटती धारा को देखकर आसपास के गांवों के निषाद समाज और ग्रामीणों ने सफाई की जिम्मेदारी उठाई है। बृहस्पतिवार को करीब 50 ग्रामीण नदी में उतरे और दिनभर श्रमदान किया। इस दौरान करीब 500 मीटर नदी की धारा को जलकुंभी से मुक्त किया गया। अभियान में युवा और बुजुर्गों ने एक साथ जुटकर सफाई की।
महंत गिरजेश दास ने कहा कि मनोरमा केवल नदी नहीं, बल्कि मां के समान है। यह हमारी विरासत है। इसी क्षेत्र के मखौड़ा धाम में भगवान श्रीराम के जन्म की कामना को लेकर चक्रवर्ती सम्राट दशरथ ने श्रृंगी ऋषि और महर्षि वशिष्ठ के मार्गदर्शन में पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था। ग्रामीणों ने बताया कि इस समय नदी में पानी का बहाव तेज है। ऐसे में जलकुंभी निकालने का यह उचित समय है। अभियान में चंद्रमणि पांडेय, सुदामा, रूपेंद्र सिंह, तुलसी तिवारी, राजेश निषाद और मनजीत निषाद समेत अन्य लोग शामिल रहे।
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सड़वलिया घाट स्थित स्वर्णेश्वर महादेव मंदिर से मेढ़ौवा तक करीब पांच किलोमीटर नदी की धारा को साफ करने का संकल्प लिया गया है। मनोरमा की बदहाल स्थिति और जलकुंभी से पटती धारा को देखकर आसपास के गांवों के निषाद समाज और ग्रामीणों ने सफाई की जिम्मेदारी उठाई है। बृहस्पतिवार को करीब 50 ग्रामीण नदी में उतरे और दिनभर श्रमदान किया। इस दौरान करीब 500 मीटर नदी की धारा को जलकुंभी से मुक्त किया गया। अभियान में युवा और बुजुर्गों ने एक साथ जुटकर सफाई की।
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महंत गिरजेश दास ने कहा कि मनोरमा केवल नदी नहीं, बल्कि मां के समान है। यह हमारी विरासत है। इसी क्षेत्र के मखौड़ा धाम में भगवान श्रीराम के जन्म की कामना को लेकर चक्रवर्ती सम्राट दशरथ ने श्रृंगी ऋषि और महर्षि वशिष्ठ के मार्गदर्शन में पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था। ग्रामीणों ने बताया कि इस समय नदी में पानी का बहाव तेज है। ऐसे में जलकुंभी निकालने का यह उचित समय है। अभियान में चंद्रमणि पांडेय, सुदामा, रूपेंद्र सिंह, तुलसी तिवारी, राजेश निषाद और मनजीत निषाद समेत अन्य लोग शामिल रहे।
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