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Basti News: सरकारी अस्पताल से मरीज लेकर भागना मजबूरी... निजी अस्पताल उठा रहे फायदा

Tue, 18 Mar 2025 12:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Tue, 18 Mar 2025 12:23 AM IST
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Running away with patients from government hospitals is a compulsion... Private hospitals are taking advantage
प्राइवेट एंबुलेंस से शव ले जाते परिजन
संवाद न्यूज एजेंसी
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बस्ती। यूं ही लोग मरीज माफिया के चंगुल में नहीं आ रहे हैं। इनके झांसे में आकर मरीज को निजी अस्पताल तक पहुंचाना कहीं न कहीं मजबूरी भी है। यदि सरकारी अस्पतालों में मरहम, पट्टी से आगे की सुविधा मिलनी शुरू हो जाए तो मरीज माफिया का तिकड़म फेल हो जाए।
जिले में सरकारी चिकित्सा व्यवस्था धड़ाम हो चुकी है। तहसील और जिला स्तरीय अस्पताल हो या फिर मेडिकल कॉलेज, हर जगह सामान्य इलाज से अधिक कोई सुविधा नहीं है।
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अस्पतालों में मार्ग दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल, हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए इमरजेंसी में सूई, दवाई, मरहम, पट्टी के अतिरिक्त कोई सुविधा नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, एंजियोग्रॉफी जैसी जांच की सुविधा मयस्सर नहीं हो पा रही है।
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मेडिकल कॉलेज स्तर के अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद हैं और न ही आईसीयू, वेंटिलेटर, मॉड्यूलर ओटी उपलब्ध है। रात के समय इमरजेंसी कॉल पर सर्जन, आर्थो सर्जन, एमडी मेडिसिन जैसे विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं पहुंच रहे हैं।
नतीजतन जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज दोनों जगहों पर गंभीर मरीजों का इलाज ईएमओ पर ही निर्भर हो गया है। इसीलिए प्राथमिक उपचार के बाद ऐसे मरीजों को रेफर कर दिया जा रहा है।
इसका पूरा फायदा मरीज माफिया उठा रहे हैं। तीमारदार भी इनके जाल में फंसने को मजबूर हो जाते हैं। मरीज को तत्काल राहत दिलाने के चक्कर में इनके बताए हुए निजी अस्पताल में पहुंच जाते हैं। जहां इलाज कम बिल बढ़ाने का खेल ज्यादा हो रहा है। प्रदीप कुमार बताते है कि कैली से रेफर होने के बाद वह अपने मरीज को लेकर स्टेशन रोड स्थित एक निजी अस्पताल में लेकर पहुंचे।
यहां 4-6 घंटे के ही इलाज में 20 हजार से अधिक बिल तैयार हो गया। मरीज को जब राहत नहीं मिली तो बाद में लखनऊ ले जाने की सलाह दे दी गई। दवा से ज्यादा जांच और फीस जमा करने का नाटक देखने को मिला।

मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में अब तक आईसीयू, एमआरआई, एंजियोग्राॅफी, इंडोस्कोपी जैसी उच्च तकनीक की जांच की सुविधा सुलभ नहीं हो सकी है। इस लेबल के विशेषज्ञों की तैनाती भी नहीं है। 10 बेड का आईसीयू वार्ड और माड्यूलर ओटी बनने के बाद भी छह माह से यह संचालित नहीं हो पा रहा है। इन असुविधाओं की मार मरीजों को झेलनी पड़ रही है।
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