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आरपीएफ ने पेश की ईमानदारी की मिसाल
basti
Updated Fri, 06 Jul 2018 11:00 PM IST
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शाकिर को रुपयों से भरा बैग सौंपती आरपीएफ की टीम।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। इस जमाने में भी ईमानदारों की कमी नहीं है। तभी तो मजदूरी कर रुपये जुटाने वाले गोंडा के शाकिर अली को रुपये से भरा गायब बैग मिल गया। देर शाम आरपीएफ के थानेदार नरेंद्र कुमार यादव ने शाकिर अली के हवाले कर दिया।
बैग में 1.10 लाख रुपये थे। जिसे लेकर बांद्रा एक्सप्रेस से गोंडा के थाना करनैलगंज ग्राम परसा गोडरी निवासी शाकिर अली घर जा रहे थे। उनके पास सामान ज्यादा था। आपाधापी में रुपये भरा बैग बोगी में छोड़कर उतर गए। गाड़ी जब बस्ती पहुंची तो कांस्टेबल मानसिंह व शेर बहादुर प्रजापति जांच करते हुए सीट पर पहुंचे। यहां बैग मिला। यात्रियों से पूछा तो लोगों ने बताया कि बैग का मालिक गोंडा में उतर गया है। जब इन दोनों ने बैग खोला तो उनके पैरों तले की जमीन सरक गई। क्योंकि 1.10 लाख रुपये नकदी के अलावा बैग में कुछ अन्य कीमती सामान व आधार कार्ड पैन कार्ड मिला। इतने रुपये देखने के बाद भी सिपाहियों का मन नहीं डोला, ईमानदारी दिखाते हुए दोनों सिपाही बैग लेकर आरपीएफ इंस्पेक्टर के पास पहुंचे और बैग उनके हवाले कर दिया। इसके बाद थानेदार ने तत्काल गोंडा आरपीएफ से संपर्क साधा जहां शाकिर अली रिपोर्ट लिखवाने पहुंचे थे। बस्ती बुलाने के बाद उनसे पूछताछ की गई। शाकिर ने बताया कि वह मजदूरी कर एक-एक रुपये जुटाए थे। यह उनकी मेहनत की कमाई है। आरपीएफ औपचारिकता पूरी कराने के बाद बैग शाकिर को सौंप दिया।
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बैग में 1.10 लाख रुपये थे। जिसे लेकर बांद्रा एक्सप्रेस से गोंडा के थाना करनैलगंज ग्राम परसा गोडरी निवासी शाकिर अली घर जा रहे थे। उनके पास सामान ज्यादा था। आपाधापी में रुपये भरा बैग बोगी में छोड़कर उतर गए। गाड़ी जब बस्ती पहुंची तो कांस्टेबल मानसिंह व शेर बहादुर प्रजापति जांच करते हुए सीट पर पहुंचे। यहां बैग मिला। यात्रियों से पूछा तो लोगों ने बताया कि बैग का मालिक गोंडा में उतर गया है। जब इन दोनों ने बैग खोला तो उनके पैरों तले की जमीन सरक गई। क्योंकि 1.10 लाख रुपये नकदी के अलावा बैग में कुछ अन्य कीमती सामान व आधार कार्ड पैन कार्ड मिला। इतने रुपये देखने के बाद भी सिपाहियों का मन नहीं डोला, ईमानदारी दिखाते हुए दोनों सिपाही बैग लेकर आरपीएफ इंस्पेक्टर के पास पहुंचे और बैग उनके हवाले कर दिया। इसके बाद थानेदार ने तत्काल गोंडा आरपीएफ से संपर्क साधा जहां शाकिर अली रिपोर्ट लिखवाने पहुंचे थे। बस्ती बुलाने के बाद उनसे पूछताछ की गई। शाकिर ने बताया कि वह मजदूरी कर एक-एक रुपये जुटाए थे। यह उनकी मेहनत की कमाई है। आरपीएफ औपचारिकता पूरी कराने के बाद बैग शाकिर को सौंप दिया।
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