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Basti News: कृत्रिम आंसू डालकर दूर कर रहे आंखों का सूखा
Sun, 07 Jul 2024 03:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 07 Jul 2024 03:22 AM IST
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लगातार मोबाइल फोन देखने से सूख रहा आंखों का पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। लगातार आंखें खुली रखकर मोबाइल फोन चलाने वालों के आंसू सूख रहे हैं। इससे आंखों में जख्म होने लगे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना ऐसे 25 से 30 मरीज आ रहे हैं। अब चिकित्सक उनकी आंखों में कृत्रिम आंसू डाल रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते इलाज नहीं कराया गया तो आंखों की रोशनी जा सकती है।
जिला अस्पताल के नेत्र सर्जन डा. बीके यादव बताते हैं कि चिकित्सा विज्ञान में आंसुओं को लुब्रिकेंट कहते हैं। यह लुब्रिकेंट पुतली के ऊपर छाई रहने वाली टीयर फिल्म बनाती है। मगर, जब कोई बिना पलक झपकाए लगातार मोबाइल का डिस्प्ले देखता है तो पलक और टीयर फिल्म में घर्षण बंद हो जाने के चलते कॉर्निया पर लुब्रिकेट आना बंद हो जाता है।
कई बार लंबी दूरी तक आंखों का बचाव किए बिना कार या बाइक चलाने से भी लुब्रिकेंट सूख जाता है। इसके चलते कॉर्निया खराब होने लगती है। ऐसे मरीजों का इलाज आंखों में नकली आंसू डालकर किया जाता है। चिकित्सक बताते हैं कि आमतौर पर सामान्य आंखों के लिए एक मिनट में आठ से दस बार पलक झपकाना जरूरी होता है
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शोध में पाया गया है कि जिन लोगों के आंसू सूख गए हैं, वे एक मिनट में तीन से चार बार पलक झपका पा रहे हैं। ऐसे लोगों की आंखों में आर्टिफिशियल टीयर लिक्विड डाला जा रहा है।
..
ये बरतें उपाय, आंखें बची रहेंगी
- एकटक मोबाइल न देखें।
- कार में एसी के सामने ऐसे न बैठे, जिससे हवा आंखों पर सीधे पड़े।
- लंबी दूरी तक बाइक चलाना है तो आंखों को समय-समय पर साफ पानी से धोते रहें।
- आंखें लाल हों या सिर भारी हो तो चश्मे का नंबर चेक कराएं।
...
कोट
यदि किसी को आंखों में जलन, खुजली और आंसू नहीं आ रहे हैं तो वह तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। देर करने पर रोशनी भी जा सकती है।
-डॉ. बीके यादव, वरिष्ठ नेत्र सर्जन, जिला अस्पताल
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। लगातार आंखें खुली रखकर मोबाइल फोन चलाने वालों के आंसू सूख रहे हैं। इससे आंखों में जख्म होने लगे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना ऐसे 25 से 30 मरीज आ रहे हैं। अब चिकित्सक उनकी आंखों में कृत्रिम आंसू डाल रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते इलाज नहीं कराया गया तो आंखों की रोशनी जा सकती है।
जिला अस्पताल के नेत्र सर्जन डा. बीके यादव बताते हैं कि चिकित्सा विज्ञान में आंसुओं को लुब्रिकेंट कहते हैं। यह लुब्रिकेंट पुतली के ऊपर छाई रहने वाली टीयर फिल्म बनाती है। मगर, जब कोई बिना पलक झपकाए लगातार मोबाइल का डिस्प्ले देखता है तो पलक और टीयर फिल्म में घर्षण बंद हो जाने के चलते कॉर्निया पर लुब्रिकेट आना बंद हो जाता है।
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कई बार लंबी दूरी तक आंखों का बचाव किए बिना कार या बाइक चलाने से भी लुब्रिकेंट सूख जाता है। इसके चलते कॉर्निया खराब होने लगती है। ऐसे मरीजों का इलाज आंखों में नकली आंसू डालकर किया जाता है। चिकित्सक बताते हैं कि आमतौर पर सामान्य आंखों के लिए एक मिनट में आठ से दस बार पलक झपकाना जरूरी होता है
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शोध में पाया गया है कि जिन लोगों के आंसू सूख गए हैं, वे एक मिनट में तीन से चार बार पलक झपका पा रहे हैं। ऐसे लोगों की आंखों में आर्टिफिशियल टीयर लिक्विड डाला जा रहा है।
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ये बरतें उपाय, आंखें बची रहेंगी
- एकटक मोबाइल न देखें।
- कार में एसी के सामने ऐसे न बैठे, जिससे हवा आंखों पर सीधे पड़े।
- लंबी दूरी तक बाइक चलाना है तो आंखों को समय-समय पर साफ पानी से धोते रहें।
- आंखें लाल हों या सिर भारी हो तो चश्मे का नंबर चेक कराएं।
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कोट
यदि किसी को आंखों में जलन, खुजली और आंसू नहीं आ रहे हैं तो वह तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। देर करने पर रोशनी भी जा सकती है।
-डॉ. बीके यादव, वरिष्ठ नेत्र सर्जन, जिला अस्पताल