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Basti News: रियल टाइम खतौनी...चढ़ावे से बचेंगे, चूके तो लंबा फंसेंगे

Fri, 26 May 2023 01:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Fri, 26 May 2023 01:36 AM IST
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Real time khatauni, if missed, will be stuck for a long time
सदर तहसील में खतौनी लेने के लिए लगी लाइन।
बस्ती। चंद महीनों के भीतर ऐसी व्यवस्था लागू हो जाएगी कि जमीन का बैनामा कराने के बाद खतौनी पर नाम चढ़वाने के लिए तहसील के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। न ही चढ़ावा चढ़ाना पड़ेगा। यह संभव होगा रियल टाइम खतौनी से। इसके तहत बैनामा होने के 24 घंटे के भीतर ही खतौनी पर नाम चढ़ जाएगा। इसके लिए तहसीलों से लेकर राजस्व परिषद तक में तैयारियां तेजी से चल रही हैं। ट्रायल के तौर पर जिले में 120 बैनामों में रियल टाइम खतौनी सिस्टम लागू भी किया गया, मगर इसमें कुछ तकनीकी गड़बड़ी सामने आ गई। इसकी रिपोर्ट राजस्व परिषद को भेजी गई है ताकि सॉफ्टवेयर में जरूरी सुधार किए जा सकें। उधर, शासन ने नई व्यवस्था लागू होने के पहले 31 जुलाई तक खतौनी से जुड़ी सभी खामियां दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके व्यवहार में आ जाने के बाद खतौनी में नाम सुधार जैसी कई खामियों को दुरुस्त नहीं कराया जा सकेगा। हालांकि खतौनी से जुड़ी खामियों को दुरुस्त करने की रफ्तार अभी बहुत धीमी है। इस रफ्तार से जुलाई तक लक्ष्य पूरा कर पाना आसान नहीं होगा। सूत्रों के मुताबिक, जिले में अभी 20 से 25 फीसदी ही काम हुआ है। रियल टाइम खतौनी 19 कॉलम की होगी। अभी खतौनी सिर्फ 13 कॉलम की है।
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-------- ऐसे काम करेगी रियल टाइम खतौनी व्यवस्था
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संपत्ति का बैनामा कराने के बाद नामांतरण के लिए विलेख की एक प्रति तहसील चली जाती है। वहां 45 दिनों में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यानी विक्रेता का नाम काटकर क्रेता का नाम दर्ज किया जाता है। इसके बाद अमल दरामद के लिए फाइल जाती है। खतौनी में नाम चढ़ने में दो से तीन महीने का समय लग जाता है। नाम जल्द चढ़वाने के लिए आवेदकों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू होने के बाद बैनामा होने के 24 घंटे के भीतर ही क्रेता का नाम खतौनी में चढ़ जाएगा। बीच की उलझाऊ प्रक्रिया से निजात मिल जाएगी।
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------ केस- 1
सात माह गुजरे मगर मिली नहीं खतौनी
कोतवाली क्षेत्र के सराय घाट मिश्रौलिया निवासी राजकुमार पुत्र स्व. श्रीराम बृहस्पतिवार को तहसील में पहुंचे थे। उनके पिता की मौत के बाद वरासत में नाम चढ़ा, मगर उनका नाम राजकुमार के बजाय विभागीय त्रुटि से रामकुमार चढ़ गया। सात माह गुजर गए न तो लेखपाल ने इसे ठीक कराने की जहमत उठाई और न ही अब तक उनको अपने नाम की खतौनी मिल सकी। राजकुमार के अनुसार वरासत के समय सुविधा शुल्क दिया था, मगर फिर से लेखपाल नाम ठीक कराने के लिए रुपये मांग रहे हैं।
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केस- 2 कलवारी के बभनियांवा बुजुर्ग गांव निवासी अखिलेश सिंह का कहना है कि उनके परिवार को पांच साल से खतौनी नहीं मिल पा रही है। इसका कारण नामांतरण के गड़बडी है। खतौनी में तीन नाम चढ़ गए, जबकि दो नाम आज तक नहीं चढ़ सके। तमाम चढ़ावा भी चढ़ाया गया, मगर केवल ''''ठीक है हो जाएगा'''' समझा कर वापस भेज दिया जाता है।
------- जांच करते लेखपाल, तब पूरी होती प्रक्रिया भूमि के विक्रेता का नाम हटाकर उसकी जगह क्रेता का नाम चढ़ाने के लिए तहसील में फाइल जाती है। तब इसकी जांच लेखपाल करते हैं। लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया होती है। तमाम लोग शिकायत कर चुके हैं कि इस दौरान जिसने चढ़ावा दे दिया, उसके खारिज दाखिल में कोई दिक्कत नहीं आती। आसानी से उसका नाम खतौनी में चढ़ जाता है। यदि किसी ने भेंट देने में कोई चूक की तो उसे तहसील का चक्कर लगाना ही पड़ता है। कभी लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लग पाती है, तो कभी अधिकारी नहीं मिलते हैैं। अधिकांश मामलों में लेखपाल की रिपोर्ट में विलंब होता है। इस चक्कर में 45 दिन के बजाय तीन से चार महीन लगते हैं। प्रशासनिक अधिकारी इससे इन्कार करते हैं। कहते हैं कि जिस मामले में कोई आपत्ति होती है या गड़बड़ी पाई जाती है, उसमें ही दिक्कत आती है।
-------- नई व्यवस्था से राहत, मगर फर्जीवाड़े का तोड़ जरूरी शासन की ओर से रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू किए जाने के बाद लोगों को तहसीलों की दौड़ लगाने और चढ़ावा देने से तो राहत मिल जाएगी। नई व्यवस्था में खाताधारकों का अंश तय करने में भी दिक्कत नहीं होगी। इससे कोई भी व्यक्ति अपने अंश से अधिक दूसरे का अंश नहीं बेच पाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे जमीन का फर्जीवाड़ा भी बढ़ेगा। बैनामा के 24 घंटे के भीतर ही खतौनी पर नाम चढ़ जाने से जबतक जमीन के फर्जीवाड़े की जानकारी होगी, तब तक जमीन दूसरे के नाम यानी जमीन खरीदने वाले के नाम दर्ज हो जाएगी। इसके बाद वह किसी और को और वह किसी और को दो से तीन दिन के भीतर जमीन का बैनामा कर सकेगा। मौजूदा व्यवस्था में नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान क्रेता, विक्रेता दोनों को सूचना भेजी जाती है।
आपत्ति दाखिल करने से मिलती है राहत फर्जीवाड़े के मामले में आपत्ति दाखिल होती है और कई लोगों को राहत भी मिलती है। कई अधिवक्ता भी इसकी आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि बैनामा के बाद इश्तिहार की प्रक्रिया होती है। क्रेता और विक्रेता के पास इसे भेजकर जानकारी दी जाती है। लेकिन रियल टाइम खतौनी होने से इश्तिहार नहीं दिया जा सकेगा। इन दिक्कतों का तोड़ निकालना जरूरी है।
------- रियल टाइम खतौनी के लाभ - भूमि का बैनामा होने के 24 घंटे के बाद ही नई खतौनी जारी हो जाएगी। विक्रेता की जगह क्रेता का नाम चढ़ जाएगा। - इस खतौनी से गाटा संख्या में खातेदारों के नाम के आगे अंश (उनके हिस्से की कितनी भूमि है) उसका जिक्र होगा। - अंश का जिक्र होने से कोई व्यक्ति अपने हिस्से से अधिक भूमि नहीं बेच सकेगा। कोई किसी की भूमि पर अधिक कब्जा नहीं कर सकेगा। - खतौनी के लिए तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। काम कराने के नाम पर दलाल वसूली नहीं कर पाएंगे। - जमीन के कारोबारी या खरीदार, किसी लालच में पड़कर आपत्ति नहीं लगा सकेंगे।
----- सदर तहसील में 120 रियल टाइम खतौनी
ट्रायल के तौर पर की गई थीं लेकिन, इसमें गड़बड़ी होने की वजह से राजस्व परिषद को सुधार के लिए भेजा गया है। रियल टाइम खतौनी में मृतक और वरासत के संशोधन की व्यवस्था नहीं है। अन्य भी कई दिक्कत आ रही है। साफ्टवेयर दुरुस्त होते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। -राधेश्याम, तहसीलदार सदर
------ कदम जनहित में है नई व्यवस्था से बैनामा के बाद ही क्रेता की खतौनी उनको मिल जाएगी। अभी तो नामांतरण की प्रक्रिया में तीन से चार माह लग रहे हैं। लोग भटकते रहते हैं। इसे जल्द से जल्द लागू करना चाहिए। जनहित में है। -विनोद कुमार भट्ट, अधिवक्ता
--------- बैनामा गलत हुआ तो परेशानी इससे खतौनी तो 24 घंटे में मिल जाएगी लेकिन, गलत बैनामा होने, कम जमीन का पैसा देकर अधिक भूमि लिखवा लेने सहित अन्य मामलों में दिक्कत आएगी। जब तक कोई शिकायत होगी, तब तक फर्जीवाड़ा करने वाले एक ही भूमि को कई लोगों को बेच चुके होंगे। -रमाशंकर पांडेय, अधिवक्ता फर्जी चेक के भुगतान की दिक्क्त
खतौनी लेने के लिए काफी समय लग रहा है। नई व्यवस्था ठीक तो है, लेकिन फर्जी चेक या गड़बड़ी की स्थिति में भुगतान नहीं होने पर खारिज दाखिल नहीं रुक सकेगा। क्रेता और विक्रेता के लेनदेन में गड़बड़ी होने पर लोग कोई रोक नहीं लगा सकेंगे। -शशि यादव, अधिवक्ता

-------- कई बार कम रुपये देकर लोग अधिक जमीन लिखवा लेते हैैं। गरीब और अनपढ़ लोगों के साथ अक्सर ऐसी शिकायत आती है। किसी ने 60 बिस्वा जमीन बेची और खरीदार ने 160 बिस्वा लिखवा ली तो दिक्कत आएगी। खतौनी पर नाम चढ़ने के बाद क्रेता तत्काल मालिक हो जाएगा। अभी अधिक समय मिलने की वजह से लोग आपत्ति लगा देते हैं। नई व्यवस्था में ऐसा नहीं हो सकेगा। ऐसे में रजिस्ट्री के पहले क्रास चेकिंग गहनता से करानी होगी। -अनिल कुमार पांडेय, अधिवक्ता
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