{"_id":"5e25ec228ebc3e4b2c33dff7","slug":"ramprasad-chaudhary-joined-sp-basti-news-gkp3379904130","type":"story","status":"publish","title_hn":"बसपा से निष्कासन का चौधरी ने दिया करारा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बसपा से निष्कासन का चौधरी ने दिया करारा जवाब
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बसपा से निष्कासन का चौधरी ने दिया करारा जवाब
बस्ती। लगभग दो माह पूर्व मायावती द्वारा पार्टी से निकाले गए दिग्गज कुर्मी नेता राम प्रसाद चौधरी ने पंचायत चुनाव से ठीक पहले बसपा को करारा झटका दिया है। उन्होंने सोमवार को एक पूर्व सांसद, तीन पूर्व विधायक, पिछले चुनाव के एक प्रत्याशी, एक पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, सात पूर्व ब्लॉक प्रमुख और डेढ़ हजार से अधिक बसपा कार्यकर्ताओं के साथ सपा का दामन थाम लिया। चौधरी के इस कदम से मंडल की सियासत गरमा गई है।
पंचायत व स्थानीय निकाय चुनाव में किसी समय तीन चौथाई पदों पर अपने खासम-खास को काबिज कराने में कामयाब रहे कुर्मी क्षत्रप मतदाताओं को एक बार फिर मन-माफिक मतदान कराने में कामयाब हो जाएंगे, इसे लेकर असमंजस है। माना जा रहा है कि कुर्मी-यादव कैमेस्ट्री कारगर हुई तभी बात बन पाएगी। अपवाद को छोड़ दिया जाए तो बस्ती मंडल की सियासत में जातीय मुद्दा सबसे ज्यादा हाबी रहा है। इस लिहाज से अब सपाई खेमा सबसे मजबूत दिख रहा है। यादव-मुस्लिम-क्षत्रिय के एकजुट होने के कारण पंचायत व विधानसभा चुनाव में सपा को काफी लीड मिलती रही है। मगर पिछले कुछ चुनावों से यादव के अलावा बाकी बिरादरी के किनारा कर लेने के बाद उसकी हालत पतली हो गई थी। अब कुर्मी वोटर यदि जुड़े तो उसकी दोबारा लाटरी लग सकती है। ऐसा मानकर कार्यकर्ता उत्साहित हैं। कटी पतंग बनी पार्टी को थोक के भाव झंडाबरदार की दरकार थी। सो सपा को मांगी मुराद मिल गई। सपाई मंच हाथी से उतरे दिग्गजों से अब सज गया है। जानकार मानते हैं कि एकाएक बसपाई टीम को हजम करना सपा के लिए भी आसान नहीं होगा। पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का इल्जाम लगाकर बसपा प्रमुख मायावती ने 23 नवंबर को पूर्व मंत्री रामप्रसाद चौधरी समेत चार पूर्व विधायकों को पार्टी से निकाल दिया था। उनमें सदर सीट से दो बार विधायक रहे जितेन्द्र चौधरी, महदेवा सीट से विधायक रहे दूधराम, रुधौली से विधायक रहे राजेन्द्र चौधरी शामिल रहे। ये सभी चौधरी के साथ सपा में शामिल हो गए हैं। इनके साथ पूर्व सांसद चौधरी के भतीजे अरविंद चौधरी भी साइकिल पर सवार हो गए हैं। सत्ता पक्ष यानी भारतीय जनता पार्टी में इस परिवर्तन को भले ही ज्यादा तवज्जो न दी जा रही हो, मगर कांग्रेसी सन्न हैं। चूंकि असंतुष्ट होकर कांग्रेस में शिफ्ट होने वाले कई सपा के कद्दावर नेता थे। अब जबकि दूसरा मजबूत खेमा पूरे कुनबे के साथ सपा में आ चुका है। पार्टी की जमीनी हालत देखते हुए माना जा रहा है कि कांग्रेस के लिए सबसे मुश्किल दौर आने वाला है। वहीं बसपा को वजूद की छटपटाहट सहज महसूस की सकती है।
विज्ञापन
बस्ती। लगभग दो माह पूर्व मायावती द्वारा पार्टी से निकाले गए दिग्गज कुर्मी नेता राम प्रसाद चौधरी ने पंचायत चुनाव से ठीक पहले बसपा को करारा झटका दिया है। उन्होंने सोमवार को एक पूर्व सांसद, तीन पूर्व विधायक, पिछले चुनाव के एक प्रत्याशी, एक पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, सात पूर्व ब्लॉक प्रमुख और डेढ़ हजार से अधिक बसपा कार्यकर्ताओं के साथ सपा का दामन थाम लिया। चौधरी के इस कदम से मंडल की सियासत गरमा गई है।
पंचायत व स्थानीय निकाय चुनाव में किसी समय तीन चौथाई पदों पर अपने खासम-खास को काबिज कराने में कामयाब रहे कुर्मी क्षत्रप मतदाताओं को एक बार फिर मन-माफिक मतदान कराने में कामयाब हो जाएंगे, इसे लेकर असमंजस है। माना जा रहा है कि कुर्मी-यादव कैमेस्ट्री कारगर हुई तभी बात बन पाएगी। अपवाद को छोड़ दिया जाए तो बस्ती मंडल की सियासत में जातीय मुद्दा सबसे ज्यादा हाबी रहा है। इस लिहाज से अब सपाई खेमा सबसे मजबूत दिख रहा है। यादव-मुस्लिम-क्षत्रिय के एकजुट होने के कारण पंचायत व विधानसभा चुनाव में सपा को काफी लीड मिलती रही है। मगर पिछले कुछ चुनावों से यादव के अलावा बाकी बिरादरी के किनारा कर लेने के बाद उसकी हालत पतली हो गई थी। अब कुर्मी वोटर यदि जुड़े तो उसकी दोबारा लाटरी लग सकती है। ऐसा मानकर कार्यकर्ता उत्साहित हैं। कटी पतंग बनी पार्टी को थोक के भाव झंडाबरदार की दरकार थी। सो सपा को मांगी मुराद मिल गई। सपाई मंच हाथी से उतरे दिग्गजों से अब सज गया है। जानकार मानते हैं कि एकाएक बसपाई टीम को हजम करना सपा के लिए भी आसान नहीं होगा। पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का इल्जाम लगाकर बसपा प्रमुख मायावती ने 23 नवंबर को पूर्व मंत्री रामप्रसाद चौधरी समेत चार पूर्व विधायकों को पार्टी से निकाल दिया था। उनमें सदर सीट से दो बार विधायक रहे जितेन्द्र चौधरी, महदेवा सीट से विधायक रहे दूधराम, रुधौली से विधायक रहे राजेन्द्र चौधरी शामिल रहे। ये सभी चौधरी के साथ सपा में शामिल हो गए हैं। इनके साथ पूर्व सांसद चौधरी के भतीजे अरविंद चौधरी भी साइकिल पर सवार हो गए हैं। सत्ता पक्ष यानी भारतीय जनता पार्टी में इस परिवर्तन को भले ही ज्यादा तवज्जो न दी जा रही हो, मगर कांग्रेसी सन्न हैं। चूंकि असंतुष्ट होकर कांग्रेस में शिफ्ट होने वाले कई सपा के कद्दावर नेता थे। अब जबकि दूसरा मजबूत खेमा पूरे कुनबे के साथ सपा में आ चुका है। पार्टी की जमीनी हालत देखते हुए माना जा रहा है कि कांग्रेस के लिए सबसे मुश्किल दौर आने वाला है। वहीं बसपा को वजूद की छटपटाहट सहज महसूस की सकती है।
विज्ञापन