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Basti News: असत्य पर सत्य की विजय के लिए राम गए वन
Thu, 27 Mar 2025 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 27 Mar 2025 12:16 AM IST
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कलवारी। कलियुग के प्राणी का मन मलिन और चरित्र पतित होने पर मानव कर्तव्य और धर्म से विचलित हो जाता है और समाज में विकृति फैल जाती है। ऐसे में रामकथा के श्रवण से मन निर्मल और चरित्र पावन हो जाता है। राम कथा मनुष्य को आदर्श जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है।
ये बातें अवध धाम से आई कथावाचिका प्रतिभा मिश्रा ने यज्ञ के आठवें दिन अगौना स्थित हट्ठी माता मंदिर परिसर में श्रीराम कथा का रसपान करा रही थीं। उन्होंने कहा कि असत्य पर सत्य की विजय के लिए भगवान राम तपस्वी भेज में वनवास को जाते हैं। राम को वनवास पहुंचाने के लिए मां सरस्वती मंथरा के जिह्वा पर बैठ जाती हैं और कैकेई कोप भवन में चली जाती हैं। माता के आदेश पर भगवान राम राजमहल से बनवास के लिए निकलते हैं। पूरे महल में रुदन मचा है। राजा दशरथ ...हे राम, हे राम...कहते हुए जमीन पर गिर पड़ते हैं। राज्य की जनता भगवान राम के साथ बन जाने के लिए निकल पड़ती है। तमसा नदी के तट पर सबको छोड़ कर निषादराज के साथ वन जाने के लिए नदी पार करते है। गंगा नदी पार करते समय भगवान राम और केवट में इशारों में कई जन्मों के गूढ़तत्व की चर्चा होती है। वनमार्ग में दीनदयाल प्रभु श्रीराम ऋषि पत्नी अहिल्या, गंधर्व से राक्षस हुए कबंध, भक्त जटायु का उद्धार करते हुए मातंग ऋषि की बातों को याद करते हुए भक्तिमूर्ति मां शबरी के आश्रम में पहुंचते हैं। प्रेम विह्वल प्रभु श्रीराम मां शबरी के हाथों जूठे बेर खाकर जाति पाति, छुआ-छूत के भेदभाव से दूर रहने का संदेश देते हैं।
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ये बातें अवध धाम से आई कथावाचिका प्रतिभा मिश्रा ने यज्ञ के आठवें दिन अगौना स्थित हट्ठी माता मंदिर परिसर में श्रीराम कथा का रसपान करा रही थीं। उन्होंने कहा कि असत्य पर सत्य की विजय के लिए भगवान राम तपस्वी भेज में वनवास को जाते हैं। राम को वनवास पहुंचाने के लिए मां सरस्वती मंथरा के जिह्वा पर बैठ जाती हैं और कैकेई कोप भवन में चली जाती हैं। माता के आदेश पर भगवान राम राजमहल से बनवास के लिए निकलते हैं। पूरे महल में रुदन मचा है। राजा दशरथ ...हे राम, हे राम...कहते हुए जमीन पर गिर पड़ते हैं। राज्य की जनता भगवान राम के साथ बन जाने के लिए निकल पड़ती है। तमसा नदी के तट पर सबको छोड़ कर निषादराज के साथ वन जाने के लिए नदी पार करते है। गंगा नदी पार करते समय भगवान राम और केवट में इशारों में कई जन्मों के गूढ़तत्व की चर्चा होती है। वनमार्ग में दीनदयाल प्रभु श्रीराम ऋषि पत्नी अहिल्या, गंधर्व से राक्षस हुए कबंध, भक्त जटायु का उद्धार करते हुए मातंग ऋषि की बातों को याद करते हुए भक्तिमूर्ति मां शबरी के आश्रम में पहुंचते हैं। प्रेम विह्वल प्रभु श्रीराम मां शबरी के हाथों जूठे बेर खाकर जाति पाति, छुआ-छूत के भेदभाव से दूर रहने का संदेश देते हैं।
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