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Basti News: पंचतत्व में विलीन हुए प्रो. माता प्रसाद त्रिपाठी
Sun, 12 Jan 2025 11:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 12 Jan 2025 11:31 PM IST
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बस्ती। गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष रहे यश भारती पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार प्रो. माता प्रसाद त्रिपाठी का शनिवार को आकस्मिक निधन हो गया। उनके पैतृक गांव सुनसुन में ही नहीं, बल्कि समूचे क्षेत्र में शोक की लहर है। खराब मौसम के बावजूद शुभचिंतकों का उनके घर पर तांता लगा रहा।
करीब 74 वर्षीय प्रोफेसर त्रिपाठी के शव का शनिवार को ही अयोध्या में सरयू नदी के तट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर काफी संख्या में क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे। साहित्यकार व कवि डॉ. रामनरेश सिंह ''मंजुल'' की अध्यक्षता में हरैया में शोकसभा हुई। शोकसभा में लोगों ने दो का मौन रखकर ईश्वर से गतात्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इतिहास के प्रोफेसर होने के बाद भी वह हिंदी के प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने आठ से ज्यादा किताबें लिखी थीं। सेवानिवृत्त होने के बाद वह गांव में रहते थे। शोक सभा में शोभाराम पांडेय, गणेश शंकर पांडेय, प्रो. अखिलेशवर प्रताप शुक्ल, आशीष पाण्डेय व अन्य ने श्रद्धांजलि अर्पित की। संवाद
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करीब 74 वर्षीय प्रोफेसर त्रिपाठी के शव का शनिवार को ही अयोध्या में सरयू नदी के तट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर काफी संख्या में क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे। साहित्यकार व कवि डॉ. रामनरेश सिंह ''मंजुल'' की अध्यक्षता में हरैया में शोकसभा हुई। शोकसभा में लोगों ने दो का मौन रखकर ईश्वर से गतात्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इतिहास के प्रोफेसर होने के बाद भी वह हिंदी के प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने आठ से ज्यादा किताबें लिखी थीं। सेवानिवृत्त होने के बाद वह गांव में रहते थे। शोक सभा में शोभाराम पांडेय, गणेश शंकर पांडेय, प्रो. अखिलेशवर प्रताप शुक्ल, आशीष पाण्डेय व अन्य ने श्रद्धांजलि अर्पित की। संवाद
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