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अतिक्रमण से जाम की समस्या हुई गंभीर
Fri, 24 May 2019 11:49 PM IST
राकेश पांडेय
बस्ती (ब्यूरो)
बस्ती (ब्यूरो)
Published by: राकेश पांडेय
Updated Fri, 24 May 2019 11:49 PM IST
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अतिक्रमण से जाम की समस्या हुई गंभीर
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। शहर की प्रमुख सड़कों पर अतिक्रमण के कारण आए दिन जाम लग रहा है। नगर पालिका प्रशासन व अन्य जिम्मेदार तमाम प्रयासों के बाद भी शहर की प्रमुख सड़कों से अतिक्रमण हटवाकर जाम की समस्या का निराकरण नहीं करा पा रहे हैं। इसका खामियाजा शहरवासियों को जाम में फंसकर भुगतना पड़ता है।
हालांकि समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई भी की जाती है लेकिन उसके कुछ दिन बाद उन स्थानों पर अतिक्रमण हो जाता है। बात पुरानी बस्ती से शुरू करते हैं। यहां रेलवे क्रासिंग से पहले दोनो पटरियों पर कई व्यवसायियों ने अतिक्रमण कर रखा है। हालांकि नई बाजार में तो सड़क चौड़ी है, मगर यहां भी अतिक्रमण के चलते सड़क संकरी हो जाती है, क्योंकि अतिक्रमणकारी पटरियों तक काबिज हैं और यातायात अथवा पैदल आने जाने वालों के लिए सहारा सड़क ही है। करुआ बाबा चौक से दो रास्ते बन जाते हैं। जहां से एक रास्ता रेलवे स्टेशन होते हुए दक्षिण दरवाजा पहुंचता है तो दूसरा रास्ता सीधे मंगल बाजार होते हुए दक्षिण दरवाजा चौराहे पर पहुंच जाता है। इन दोनो रास्तों पर यात्रा आसान नहीं है। क्योंकि यहां भी पटरियों पर कई व्यापारियों का कब्जा है। दक्षिण दरवाजा होते हुए अस्पताल मार्ग व रोडवेज तक जाने वाले मार्ग की चौड़ाई तो बढ़ाई गई है, मगर पटरियों पर कब्जा के चलते यहां के भी हालात अच्छे नहीं हैं। यही मार्ग सीधे गांधीनगर, कंपनी बाग पहुंच जाता है। गांधी नगर के हालात तो बदतर हैं ही, मालवीय मार्ग की स्थिति भी दयनीय है। नेहरू तिराहे पर ही एक ओर बैंक व एक माल के पास वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था पटरियों पर है तो दूसरी ओर टैक्सी स्टैंड है, जिसे अवैध बताया जाता है। इस मार्ग पर सुभाष चौक तक रंजीत चौराहा, रौता चौराहा, बैरिहवां चौराहा व सुभाष चौराहा तक पटरियों पर कहीं भवन सामग्री के दुकानदारों व आटो मोबाइल के प्रतिष्ठानों ने कब्जा कर लिया है तो कहीं वाहनों की धुलाई करने वालों ने नाले पर कब्जा कर लिया है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण का कहना है कि अतिक्रमण करने वालों पर प्रशासन के सहयोग से शिकंजा कसा जाएगा। इसके लिए रणनीति बनाई जाएगी।
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हालांकि समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई भी की जाती है लेकिन उसके कुछ दिन बाद उन स्थानों पर अतिक्रमण हो जाता है। बात पुरानी बस्ती से शुरू करते हैं। यहां रेलवे क्रासिंग से पहले दोनो पटरियों पर कई व्यवसायियों ने अतिक्रमण कर रखा है। हालांकि नई बाजार में तो सड़क चौड़ी है, मगर यहां भी अतिक्रमण के चलते सड़क संकरी हो जाती है, क्योंकि अतिक्रमणकारी पटरियों तक काबिज हैं और यातायात अथवा पैदल आने जाने वालों के लिए सहारा सड़क ही है। करुआ बाबा चौक से दो रास्ते बन जाते हैं। जहां से एक रास्ता रेलवे स्टेशन होते हुए दक्षिण दरवाजा पहुंचता है तो दूसरा रास्ता सीधे मंगल बाजार होते हुए दक्षिण दरवाजा चौराहे पर पहुंच जाता है। इन दोनो रास्तों पर यात्रा आसान नहीं है। क्योंकि यहां भी पटरियों पर कई व्यापारियों का कब्जा है। दक्षिण दरवाजा होते हुए अस्पताल मार्ग व रोडवेज तक जाने वाले मार्ग की चौड़ाई तो बढ़ाई गई है, मगर पटरियों पर कब्जा के चलते यहां के भी हालात अच्छे नहीं हैं। यही मार्ग सीधे गांधीनगर, कंपनी बाग पहुंच जाता है। गांधी नगर के हालात तो बदतर हैं ही, मालवीय मार्ग की स्थिति भी दयनीय है। नेहरू तिराहे पर ही एक ओर बैंक व एक माल के पास वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था पटरियों पर है तो दूसरी ओर टैक्सी स्टैंड है, जिसे अवैध बताया जाता है। इस मार्ग पर सुभाष चौक तक रंजीत चौराहा, रौता चौराहा, बैरिहवां चौराहा व सुभाष चौराहा तक पटरियों पर कहीं भवन सामग्री के दुकानदारों व आटो मोबाइल के प्रतिष्ठानों ने कब्जा कर लिया है तो कहीं वाहनों की धुलाई करने वालों ने नाले पर कब्जा कर लिया है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण का कहना है कि अतिक्रमण करने वालों पर प्रशासन के सहयोग से शिकंजा कसा जाएगा। इसके लिए रणनीति बनाई जाएगी।
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