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Basti News: तीन घंटे बाधित रही हर्रैया 132 केवी बिजली घर से आपूर्ति
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बस्ती। प्रदेश में बिजली संकट गहरा रहा है। ग्रामीण इलाकों में अघोषित कटौती की जा रही है, जिसे ट्रांसमिशन प्रबंधन आपात रोस्टिंग बता रहा है। शुक्रवार रात हर्रैया स्थित 132 केवी बिजलीघर से तीन घंटे तक 11 उपकेंद्रों की बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिससे करीब ढाई लाख की आबादी को रात में तीन घंटे तक बिना बिजली के रहना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि जिले में पांच दिनों से बिजली कटौती चरम पर है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक उपभोक्ता कटौती से त्रस्त हैं। शहर में लोकल फाल्ट से उपभोक्ता काफी परेशान हैं। ग्रामीण इलाकों में रात में आपात रोस्टिंग नींद में खलल डाल रही है। 132 केवी बिजलीघर हर्रैया से हर्रैया टाउन व ग्रामीण, छावनी, मखौड़ा, विक्रमजोत, बभनान, बभनान चीनी मिल, श्रृंगीनारी, पंप कैनाल, एकडेंगवा, कप्तानगंज व दुबौला 33 केवी उपकेंद्रों को बिजली आपूर्ति दी जाती है।
शनिवार रात 7:40 से 9:11 और 10:20 से 11:50 बजे तक आपूर्ति ठप रही। स्थिति यह है कि 220 केवी बिजली घर गिदही से भी ग्रामीण उपकेंद्रों की घंटेभर तक आपात रोस्टिंग की जा रही है।
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बिजली की कमी को पूरा करने के लिए होती है आपात रोस्टिंग
जिले में ट्रांसमिशन प्रबंधन को आपात रोस्टिंग का निर्देश सारनाथ से मिलता है। सारनाथ में ट्रांसमिशन मुख्यालय है, जहां से ग्रिड में बिजली की मॉनिटरिंग की जाती है। जब ग्रिड में जरुरतभर की बिजली नहीं होती है, तो सारनाथ से ग्रामीण इलाकों में कटौती का निर्देश दिया जाता है, ताकि महानगरों व अन्य शहरों को सामान्य रूप से बिजली की आपूर्ति मिलती रहे।
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आपात रोस्टिंग का निर्धारित नहीं होता है समय
ग्रामीण इलाकों के 33 केवी उपकेंद्रों काे समय सारणी के अनुसार 18 घंटे बिजली आपूर्ति की जाती है। बाकी छह घंटे की घोषित कटौती की जाती है। जब आपूर्ति के समय में बिजली की कटौती होती है तो उसे अघोषित कटौती कहते हैं, लेकिन जब बिजली की कमी के चलते कटौती की जाती है तो उसे आपात रोस्टिंग कहते हैं। आपात रोस्टिंग का समय निर्धारित नहीं होता है। यह सारनाथ स्थित ग्रिड के कंट्रोल रूम से बिजली की कमी को देखते हुए की जाती है।
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पीक ऑवर में हो रही दिक्कतें
आपात रोस्टिंग शाम छह से रात 11 बजे तक की जा रही है। इस समय को ट्रांसमिशन प्रबंधन पीक ऑवर कहता है। आजकल जिले में करीब 200 मेगावाट बिजली की खपत प्रतिदिन हो रही है। बारिश के समय या बाद में यह खपत 170 मेगावाट से भी कम हो जाती है। अधीक्षण अभियंता ट्रांसमिशन घनश्याम मिश्रा ने बताया कि सारनाथ से आपात रोस्टिंग का निर्देश मिलता है। यह निर्देश ज्यादातर पीक ऑवर में ही मिल रहा है। इसी कारण ग्रामीण इलाकों की आपूर्ति रोकी जा रही है।
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उल्लेखनीय है कि जिले में पांच दिनों से बिजली कटौती चरम पर है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक उपभोक्ता कटौती से त्रस्त हैं। शहर में लोकल फाल्ट से उपभोक्ता काफी परेशान हैं। ग्रामीण इलाकों में रात में आपात रोस्टिंग नींद में खलल डाल रही है। 132 केवी बिजलीघर हर्रैया से हर्रैया टाउन व ग्रामीण, छावनी, मखौड़ा, विक्रमजोत, बभनान, बभनान चीनी मिल, श्रृंगीनारी, पंप कैनाल, एकडेंगवा, कप्तानगंज व दुबौला 33 केवी उपकेंद्रों को बिजली आपूर्ति दी जाती है।
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शनिवार रात 7:40 से 9:11 और 10:20 से 11:50 बजे तक आपूर्ति ठप रही। स्थिति यह है कि 220 केवी बिजली घर गिदही से भी ग्रामीण उपकेंद्रों की घंटेभर तक आपात रोस्टिंग की जा रही है।
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बिजली की कमी को पूरा करने के लिए होती है आपात रोस्टिंग
जिले में ट्रांसमिशन प्रबंधन को आपात रोस्टिंग का निर्देश सारनाथ से मिलता है। सारनाथ में ट्रांसमिशन मुख्यालय है, जहां से ग्रिड में बिजली की मॉनिटरिंग की जाती है। जब ग्रिड में जरुरतभर की बिजली नहीं होती है, तो सारनाथ से ग्रामीण इलाकों में कटौती का निर्देश दिया जाता है, ताकि महानगरों व अन्य शहरों को सामान्य रूप से बिजली की आपूर्ति मिलती रहे।
आपात रोस्टिंग का निर्धारित नहीं होता है समय
ग्रामीण इलाकों के 33 केवी उपकेंद्रों काे समय सारणी के अनुसार 18 घंटे बिजली आपूर्ति की जाती है। बाकी छह घंटे की घोषित कटौती की जाती है। जब आपूर्ति के समय में बिजली की कटौती होती है तो उसे अघोषित कटौती कहते हैं, लेकिन जब बिजली की कमी के चलते कटौती की जाती है तो उसे आपात रोस्टिंग कहते हैं। आपात रोस्टिंग का समय निर्धारित नहीं होता है। यह सारनाथ स्थित ग्रिड के कंट्रोल रूम से बिजली की कमी को देखते हुए की जाती है।
पीक ऑवर में हो रही दिक्कतें
आपात रोस्टिंग शाम छह से रात 11 बजे तक की जा रही है। इस समय को ट्रांसमिशन प्रबंधन पीक ऑवर कहता है। आजकल जिले में करीब 200 मेगावाट बिजली की खपत प्रतिदिन हो रही है। बारिश के समय या बाद में यह खपत 170 मेगावाट से भी कम हो जाती है। अधीक्षण अभियंता ट्रांसमिशन घनश्याम मिश्रा ने बताया कि सारनाथ से आपात रोस्टिंग का निर्देश मिलता है। यह निर्देश ज्यादातर पीक ऑवर में ही मिल रहा है। इसी कारण ग्रामीण इलाकों की आपूर्ति रोकी जा रही है।