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Basti News: जिला अस्पताल में मरीजों का और दर्द बढ़ा रहे गड्ढे

Thu, 22 Jan 2026 12:54 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 12:54 AM IST
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Potholes in the district hospital are increasing the pain of patients
जिला अस्पताल परिसर की खराब सड़क संवाद
बस्ती। टूटी सड़क मरीजों को बीमारी से ज्यादा दर्द दे रही हैं। कदम-कदम पर सड़क पर बने गड्ढे के बीच फंसकर रोगी कराह उठ रहे हैं। यही नहीं तीमारदार और डॉक्टर-कर्मी भी लगातार इसके शिकार हो रहे हैं।
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यह हाल तब है, जब महकमा अस्पतालों की व्यवस्था को चकाचक बता रहा है, मगर जिला अस्पताल की दुश्वारियां और खराब सड़कें मरीजों के लिए आफत बनी हुई हैं। जिला अस्पताल में प्रवेश द्वार से दुश्वारियां शुरू हो जाती हैं। ट्रामा सेंटर और इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचने में गंभीर मरीजों को कई हिचकोले लगते हैं। इतना ही नहीं, चूकने पर मरीज गिर भी जाते हैं।
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जिस बीमारी का इलाज कराने आते हैं, उसके इतर उन्हें दूसरा उपचार करवाना पड़ता है। मरीजों-तीमारदारों का कहना है कि कभी-कभी मरीज गंभीर स्थिति में होता है। ऐसे में चिकित्सक को तत्काल बुलाकर बाहर लेकर आना पड़ता है। जांच के बाद डॉक्टर के कहने पर मरीज भर्ती होते हैं।
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वहीं ट्रामा सेंटर के सामने ही सड़क टूटकर गड्ढे में तब्दील हो चुकी है और खुली नालियों में अक्सर मरीज की जांच के दौरान हड़बड़ाहट में पैर फंस जाता है। लोग गिरकर चोटिल हो जा रहे हैं। इसके शिकार डॉक्टर भी हो रहे हैं।
सप्ताहभर पहले नाइट में इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात ईएमओ डॉ. पीएस पटेल एक मरीज की जांच करने ट्रामा सेंटर से बाहर गेट पर निकल आए। जांच कर ही रहे थे, तभी टूटी सड़क के चलते बने गड्ढे व खुली नाली में उनका पैर चला गया। इससे उनका पैर टूट गया। अब वह प्लास्टर लगवाकर इलाज करने के बजाय खुद उपचार करवा रहे हैं।
वहीं, अन्य मरीजों ने बताया कि जब ट्रामा से भर्ती होकर मरीज को वार्ड में ले जाते हैं तो उबड़-खाबड़ सड़क पर स्ट्रेचर आसानी से नहीं चल पाता। बीच-बीच में उसके पहिये फंस जाते हैं। स्ट्रेचर पर जाने से शरीर हिल जाती है, इससे कभी-कभार चोट वाले घाव पर लगे टांका टूटने का भी डर बना रहता है। इससे परेशान तीमारदार मरीज को खुद गोद में उठाकर वार्ड तक पहुंचा देते हैं।
ओटी आने वाले रोगी भी खाते हैं हिचकोले : जिला अस्पताल में खराब सड़क का दंश डॉक्टरों, कर्मचारियों, तीमारदारों के साथ मरीज भी झेल रहे हैं। बताते हैं कि ओटी में जब महिला-पुरुष कई रोगों का ऑपरेशन कराकर बाहर आते हैं तो स्ट्रेचर सड़क के गड्ढे और गेट के पास फंस जाते हैं। स्ट्रेचर को उठाना पड़ता है।
वहीं, खराब सड़क के चलते ओटी से वार्ड तक लाने में पूरी शरीर हिल जाती है। इससे टांके के टूटने का डर बना रहता है। वैसे, मरीज उस समय इंजेक्शन के चलते दर्द महसूस नहीं कर पाता, मगर तीमारदार यह देखकर परेशान हो जाते हैं।
रोजाना एक हजार से अधिक आ रहे मरीज : जिला अस्पताल में रोजाना हजार से अधिक मरीज ओपीडी, इमरजेंसी में उपचार के सिलसिले में पहुंचते हैं। मरीज के साथ उससे ज्यादा तीमारदार आते हैं। लेकिन, प्रवेश द्वार से लेकर ओपीडी तक पहुंचने के लिए लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ती है।

खराब सड़क से एक-दूसरे वार्ड में पहुंचना आसान नहीं होता। कर्मचारियों का कहना है कि सड़क बनाने के लिए कई बार प्रयास हुए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इससे परेशानी है।
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