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पुलिस को भी आरक्षण सूची का इंतजार
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पुलिस को भी आरक्षण सूची का इंतजार
बस्ती। निर्वाचन प्रक्रिया का सबसे जटिल और संवेदनशील पहलू पंचायत चुनाव के आरक्षण का सिर्फ मैदान में कूदने की तैयारी करने वालों को ही नहीं, पुलिस प्रशासन को भी बेसब्री से इंतजार है। खासकर प्रधान पद के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही मतदान केंद्र की संवेदनशीलता का आंकलन किया जाएगा।
पुराने आंकड़ों के हिसाब से जिन मतदान केंद्रों पर विवाद हुए थे, वहां पर संबंधित के विरुद्ध पाबंद करने से लेकर दूसरी भी कार्रवाई की जा रही है। वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में आरक्षित अथवा अनारक्षित सीटों के लिहाज से पुलिस अधिकारियों का एक चक्र का भ्रमण भी किया जा चुका है। एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि सुरक्षा बल आवंटित करने के लिए सामान्य के साथ ही संवेदनशील, अति संवेदनशील और अति संवेदनशील प्लस मतदान केंद्रों का नए सिरे से निर्धारण करना पड़ेगा। इसके लिए आरक्षण सूची जारी होने का इंतजार किया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि सीट के आरक्षण की स्थिति बदलने से माहौल पर सीधा असर पड़ता है। अलग-अलग जगह जाति बाहुल्यता के हिसाब से दबंग अपनी कारस्तानी करते हैं। पिछले कई चुनावों में देखा गया कि सामान्य सीट रहने पर तनाव ज्यादा होता है, जबकि आरक्षित हो जाने के बाद अराजकतत्व किनारा करते देेखे गए। वहीं जब अन्य पिछड़ा वर्ग अथवा अनुसूचित जातियों का दबदबा ज्यादा होता है तो वहां उनकी वजह से संवेदनशीलता बढ़ जाती है। ऐसे में इस बार आरक्षण की स्थिति देखते हुए संवेदनशीलता के बारे में फैसला लिया जाएगा।
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किस मतदान केंद्र पर कितनी फोर्स तैनात की जाएगी, उसका निर्धारण उस केंद्र की स्थिति के हिसाब से किया जाएगा। पिछले चुनाव में एक बूथ वाले सामान्य केंद्रों पर दो हेड कांस्टेबल, पांच होमगार्ड, संवेदनशील बूथों पर एसआई, एचसीपी के साथ कांस्टेबल और होमगार्ड, अति संवेदनशील बूथों पर इंस्पेक्टर, एसआई, कांस्टेबल के अलावा होमगार्ड और सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्स तैनात की गई थी। इस बार फार्मूला तो वही रहेगा, लेकिन बूथों की नवैयत नए सिरे से तस की जाएगी।
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बस्ती। निर्वाचन प्रक्रिया का सबसे जटिल और संवेदनशील पहलू पंचायत चुनाव के आरक्षण का सिर्फ मैदान में कूदने की तैयारी करने वालों को ही नहीं, पुलिस प्रशासन को भी बेसब्री से इंतजार है। खासकर प्रधान पद के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही मतदान केंद्र की संवेदनशीलता का आंकलन किया जाएगा।
पुराने आंकड़ों के हिसाब से जिन मतदान केंद्रों पर विवाद हुए थे, वहां पर संबंधित के विरुद्ध पाबंद करने से लेकर दूसरी भी कार्रवाई की जा रही है। वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में आरक्षित अथवा अनारक्षित सीटों के लिहाज से पुलिस अधिकारियों का एक चक्र का भ्रमण भी किया जा चुका है। एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि सुरक्षा बल आवंटित करने के लिए सामान्य के साथ ही संवेदनशील, अति संवेदनशील और अति संवेदनशील प्लस मतदान केंद्रों का नए सिरे से निर्धारण करना पड़ेगा। इसके लिए आरक्षण सूची जारी होने का इंतजार किया जा रहा है।
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अधिकारियों का मानना है कि सीट के आरक्षण की स्थिति बदलने से माहौल पर सीधा असर पड़ता है। अलग-अलग जगह जाति बाहुल्यता के हिसाब से दबंग अपनी कारस्तानी करते हैं। पिछले कई चुनावों में देखा गया कि सामान्य सीट रहने पर तनाव ज्यादा होता है, जबकि आरक्षित हो जाने के बाद अराजकतत्व किनारा करते देेखे गए। वहीं जब अन्य पिछड़ा वर्ग अथवा अनुसूचित जातियों का दबदबा ज्यादा होता है तो वहां उनकी वजह से संवेदनशीलता बढ़ जाती है। ऐसे में इस बार आरक्षण की स्थिति देखते हुए संवेदनशीलता के बारे में फैसला लिया जाएगा।
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किस मतदान केंद्र पर कितनी फोर्स तैनात की जाएगी, उसका निर्धारण उस केंद्र की स्थिति के हिसाब से किया जाएगा। पिछले चुनाव में एक बूथ वाले सामान्य केंद्रों पर दो हेड कांस्टेबल, पांच होमगार्ड, संवेदनशील बूथों पर एसआई, एचसीपी के साथ कांस्टेबल और होमगार्ड, अति संवेदनशील बूथों पर इंस्पेक्टर, एसआई, कांस्टेबल के अलावा होमगार्ड और सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्स तैनात की गई थी। इस बार फार्मूला तो वही रहेगा, लेकिन बूथों की नवैयत नए सिरे से तस की जाएगी।