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खुद को सशक्त समझें बेटियां, आसान हो जाएगी मंजिल- प्रीति
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खुद को सशक्त समझें बेटियां, आसान हो जाएगी मंजिल : प्रीति
बस्ती। देश में नारी हमेशा सशक्त रही हैं। बेटियां खुद को सशक्त समझें लिहाजा उनकी मंजिल सरल व आसान हो जाएगी। यह कहना है विशेष पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रीति खरवार का। वह शनिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शहर के पं. राजन महिला डिग्री कॉलेज पचपेड़िया में पुलिस पाठशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि काल परिस्थितियों ने ऐसा वातावरण बनाया कि वह बेटियां खुद को कमजोर व असुरक्षित समझने लगीं। इधर स्थिति बदली है। नारी को जहां भी मौका मिला वहां उसने बेहतर प्रदर्शन कर खुद की काबलियत को साबित किया है। बेटियां ही बेटियों को उचित अवसर देकर उनके मन में छिपे भय को दूर सकती हैं जिससे वे खुद को सशक्त समझते हुए परिस्थितियों को अनुकूल करने में समर्थ बनेंगी।
प्रीति खरवार ने कहा कि महिलाओं को भय मुक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। जिस दिन आधी आबादी खुद को अपराजित महसूस कर सीधे अर्थव्यवस्था से जुड़ जाएंगी उसी दिन समाज और राष्ट्र की मजबूती चरम पर पहुंच जाएगी। बेटियां अपने साथ कुछ भी गलत न होने दें। उसका विरोध करें। इससे असामाजिक तत्वों का हौसला टूटेगा और भय मुक्त होकर बेटियां अपने सपनों को ऊंची उड़ान दे सकेंगी। पुलिस मित्र की भांति पग-पग पर उनके साथ है।
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परीक्षा प्रमुख डॉ. डीडी सिंह ने कहा कि बेटियां दो परिवारों को जोड़ती हैं। इसलिए इनके अंदर आत्म विश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समझ का होना नितांत आवश्यक है। इस तरह के आयोजन पाठ्यक्रम से इतर ज्ञान प्राप्त होता है, जो जीवन में काम आता है।
बीएड विभागाध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने कहा कि स्थितियां बदल रही हैं। जहां भी अवसर मिल रहा है। बेटियां बेहतर कर रही हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि समाज बेटियों के प्रति अपनी सोच बदले और उन्हें अवसर दे। समाजसेवी निहाल पांडेय ने कहा कि बेटियों के प्रति सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन संतोष पाल ने किया, जबकि स्कूल की छात्रा जरीना खान, रुबैया, दीपिका, जीनत एवं अंकिता ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
इस मौके पर स्नेहलता मिश्रा, पूजा मिश्रा, पुनीता त्रिपाठी, नीशू उपाध्याय, रेशमा बानो, डॉ. ज्योति यादव, सिद्धी, गीतांजली, नितिन चौधरी, सत्यम सिंह आदि मौजूद रहे।
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बेटियों ने जाना कानून
छात्राएं अपनी सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून के बारे में सीओ से सवाल किया। सीओ ने कहा कि महिला हेल्प लाइन 1090 के जरिए भी महिलाओं को पुलिस तत्काल मदद पहंचा रही है। इसके अलावा डायल 100 भी आकस्मिक स्थितियों से निपटने में सहयोगी साबित हो रही है। शिकायत कर्ता के नाम की गोपनीय रखा जाता है।
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इनसेट--पीपी (फोटो)
बेटियां किसी मामले में पीछे नहीं : जूही
छात्रा जूही पाल ने कहा कि अधिकांश परिवारों में बेटी के साथ खाने तक में भेदभाव किया जाता है। भाइयों को पहले स्वादिष्ट पकवान तो बहनों को बचा खुचा। इसी तरह पढ़ाई- लिखाई के अवसरों में भी प्राथमिकताएं तय की जाती हैं। जबकि बेटियां किसी मामले में भी पीछे नहीं रहती हैं।
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पुलिस की पाठशाला बढ़ाएगा आत्मविश्वास: सिद्धि
सिद्धि कहती हैं घर से स्कूल तक पग -पग पर ऐसी परिस्थितियां पैदा होती है जो झकझोर कर रख देती हैं। कभी अपने सौतेला व्यवहार करते हैं तो समाज के असामाजिक तत्व अवसर पाते अपने तंज से घायल कर देते हैं। ऐसे में पुलिस पाठशाला से आत्मविश्वास बढ़ेगा।
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हमेशा उपयोगी साबित हुईं हैं बेटियां: शशि
शशि कहती है हमें भी आगे बढ़ना है और बढ़ते ही जाना है। यह अलग बात है की लड़कियों की बात आते ही सोच छोटी हो जाती है। जबकि बेटियां हर मुश्किल घड़ी में परिवार समाज और देश के लिए अपनी उपयोगिता सिद्ध करती रही हैं। अमर उजाला का यह प्लेटफार्म महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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अमर उजाला की पहल लाएगा रंग : दीपा
दीपा वर्मा ने कहा कि अमर उजाला की यह पहल नारी समाज में जागरूकता लाएगा। जिससे बेटियां अपने आप को पहचान कर अवसर का बेहतर उपयोग करेंगी। समाज में बेटियों को आगे बढ़ने और सपनों को पंख देने का वातावरण अमर उजाला के सहयोग से बनेगा।
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बस्ती। देश में नारी हमेशा सशक्त रही हैं। बेटियां खुद को सशक्त समझें लिहाजा उनकी मंजिल सरल व आसान हो जाएगी। यह कहना है विशेष पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रीति खरवार का। वह शनिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शहर के पं. राजन महिला डिग्री कॉलेज पचपेड़िया में पुलिस पाठशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि काल परिस्थितियों ने ऐसा वातावरण बनाया कि वह बेटियां खुद को कमजोर व असुरक्षित समझने लगीं। इधर स्थिति बदली है। नारी को जहां भी मौका मिला वहां उसने बेहतर प्रदर्शन कर खुद की काबलियत को साबित किया है। बेटियां ही बेटियों को उचित अवसर देकर उनके मन में छिपे भय को दूर सकती हैं जिससे वे खुद को सशक्त समझते हुए परिस्थितियों को अनुकूल करने में समर्थ बनेंगी।
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प्रीति खरवार ने कहा कि महिलाओं को भय मुक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। जिस दिन आधी आबादी खुद को अपराजित महसूस कर सीधे अर्थव्यवस्था से जुड़ जाएंगी उसी दिन समाज और राष्ट्र की मजबूती चरम पर पहुंच जाएगी। बेटियां अपने साथ कुछ भी गलत न होने दें। उसका विरोध करें। इससे असामाजिक तत्वों का हौसला टूटेगा और भय मुक्त होकर बेटियां अपने सपनों को ऊंची उड़ान दे सकेंगी। पुलिस मित्र की भांति पग-पग पर उनके साथ है।
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परीक्षा प्रमुख डॉ. डीडी सिंह ने कहा कि बेटियां दो परिवारों को जोड़ती हैं। इसलिए इनके अंदर आत्म विश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समझ का होना नितांत आवश्यक है। इस तरह के आयोजन पाठ्यक्रम से इतर ज्ञान प्राप्त होता है, जो जीवन में काम आता है।
बीएड विभागाध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने कहा कि स्थितियां बदल रही हैं। जहां भी अवसर मिल रहा है। बेटियां बेहतर कर रही हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि समाज बेटियों के प्रति अपनी सोच बदले और उन्हें अवसर दे। समाजसेवी निहाल पांडेय ने कहा कि बेटियों के प्रति सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन संतोष पाल ने किया, जबकि स्कूल की छात्रा जरीना खान, रुबैया, दीपिका, जीनत एवं अंकिता ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
इस मौके पर स्नेहलता मिश्रा, पूजा मिश्रा, पुनीता त्रिपाठी, नीशू उपाध्याय, रेशमा बानो, डॉ. ज्योति यादव, सिद्धी, गीतांजली, नितिन चौधरी, सत्यम सिंह आदि मौजूद रहे।
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बेटियों ने जाना कानून
छात्राएं अपनी सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून के बारे में सीओ से सवाल किया। सीओ ने कहा कि महिला हेल्प लाइन 1090 के जरिए भी महिलाओं को पुलिस तत्काल मदद पहंचा रही है। इसके अलावा डायल 100 भी आकस्मिक स्थितियों से निपटने में सहयोगी साबित हो रही है। शिकायत कर्ता के नाम की गोपनीय रखा जाता है।
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इनसेट--पीपी (फोटो)
बेटियां किसी मामले में पीछे नहीं : जूही
छात्रा जूही पाल ने कहा कि अधिकांश परिवारों में बेटी के साथ खाने तक में भेदभाव किया जाता है। भाइयों को पहले स्वादिष्ट पकवान तो बहनों को बचा खुचा। इसी तरह पढ़ाई- लिखाई के अवसरों में भी प्राथमिकताएं तय की जाती हैं। जबकि बेटियां किसी मामले में भी पीछे नहीं रहती हैं।
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पुलिस की पाठशाला बढ़ाएगा आत्मविश्वास: सिद्धि
सिद्धि कहती हैं घर से स्कूल तक पग -पग पर ऐसी परिस्थितियां पैदा होती है जो झकझोर कर रख देती हैं। कभी अपने सौतेला व्यवहार करते हैं तो समाज के असामाजिक तत्व अवसर पाते अपने तंज से घायल कर देते हैं। ऐसे में पुलिस पाठशाला से आत्मविश्वास बढ़ेगा।
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हमेशा उपयोगी साबित हुईं हैं बेटियां: शशि
शशि कहती है हमें भी आगे बढ़ना है और बढ़ते ही जाना है। यह अलग बात है की लड़कियों की बात आते ही सोच छोटी हो जाती है। जबकि बेटियां हर मुश्किल घड़ी में परिवार समाज और देश के लिए अपनी उपयोगिता सिद्ध करती रही हैं। अमर उजाला का यह प्लेटफार्म महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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अमर उजाला की पहल लाएगा रंग : दीपा
दीपा वर्मा ने कहा कि अमर उजाला की यह पहल नारी समाज में जागरूकता लाएगा। जिससे बेटियां अपने आप को पहचान कर अवसर का बेहतर उपयोग करेंगी। समाज में बेटियों को आगे बढ़ने और सपनों को पंख देने का वातावरण अमर उजाला के सहयोग से बनेगा।