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Basti News: सीट बेल्ट लगाते तो बच गई होती 27 लोगों की जान
Wed, 13 Sep 2023 02:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 13 Sep 2023 02:04 AM IST
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बस्ती। अगर आप कार चलाते समय सीटबेल्ट लगाने में हीलाहवाली करते हों तो यकीन मानिए कि आज अपनी जिंदगी को लेकर बिल्कुल भी संजीदा नहीं हैं। यहां तक कि आपको अपने परिवार की भी बिल्कुल चिंता नहीं है। यदि ऐसा न होता तो आपके कार में उपलब्ध कवच जैसा सीट बेल्ट लगाने में संकोच नहीं करते। आंकड़े गवाह हैं कि जिले की सड़कों पर एक साल के भीतर सीटबेल्ट न लगाने वाले 27 कार सवार लोगों की जान जा चुकी है। जबकि सीटबेल्ट लगाने की वजह से 19 लोगों की जान बच चुकी है।
जी हां, फोरलेन पर आए दिन हो रही कार दुर्घटनाओं से भी लोग सबक नहीं लेते। ज्यादातर कार सवार बिना सीटबेल्ट लगाए फर्राटा भरते नजर आते हैं। जबकि उन्हें पता है कि बिना सीट बेल्ट लगाए एयरबैग नहीं खुलते। जो कि हादसे के समय कवच का काम करते हैं। हाल में हुए हादसों में पाया गया कि जिसने सीट बेल्ट लगाया था वे घायल तो हुए लेकिन उनकी जान बच गई।
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रविवार को सामने आया सबसे बड़ा उदाहरण
- रविवार को फोरलेन पर हर्रैया थानांतर्गत बड़हर कला पेट्रोल पंप के सामने अनियंत्रित कार बाएं लेन में खड़े कंटेनर में पीछे से जा टकराई। दुर्घटना में कार में सवार लखनऊ निवासी 22 वर्षीय युवक की गाड़ी में फंसकर घटनास्थल पर मौत हो गई। जबकि कार चला रहा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। जांच में पाया गया कि चालक ने सीटबेल्ट लगा रखा था, जिसके कारण उसकी तरफ का एयरबैग खुल गया और उसकी जान बच गई। मगर दूसरी साइड पर बैठे युवक को सीटबेल्ट न लगाने का खामियाजा जान गंवाकर चुकाना पड़ा।
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जुर्माने का भी है प्रावधान
- सेवा निवृत्त आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी नारायण बताते हैं कि कानूनन सीट बेल्ट लगाना सिर्फ चालक की सेफ्टी के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि साथ बैठे दूसरे सवारियों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। टाटा एंड संस के चेयरमैन रहे सायरस मिस्त्री की सितंबर 2022 में हुए हादसे में मौत के बाद कार की अगली सीट के साथ ही पिछली सीट पर बैठी सवारियों के लिए भी सीटबेल्ट अनिवार्य कर दिया गया है। सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल 1989 के रूल 138 (3) में सीट बेल्ट को पहना अनिवार्य रखा गया है। अगर ड्राइवर या पैसेंजर ऐसा नहीं करते हैं तो उन पर मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के 194बी (1) के तहत एक हजार रुपये का जुर्माना लग सकता है।
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इस तरह काम करता है एयरबैग
- मोटर विशेषज्ञ दीपक सिंह बताते हैं कि जिस समय कार का एक्सीडेंट होता है उस समय टक्कर की स्पीड के मुताबिक ही एयरबैग खुल जाते है। वहीं कार में एक्सेलेरोमीटर सर्किट एक्टिव हो जाता है और इलेक्ट्रिकल करंट भेजता है। जिसके बाद कार में लगा सेंसर एयरबैग को एक सिग्नल देता है जिसके बाद कार का एयरबैग खुल जाता है। एयरबैग कार सवार को स्टेयरिंग, डैशबोर्ड और शीशे की टक्कर से बचाता है। इसलिए कार में दरवाजों सहित अन्य जगहों पर भी एयरबैग दिया जाता है। मगर ज्यादातर गाड़ियों का एयरबैग तभी खुलता है जब सीटबेल्ट लगा हुआ हो।
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ध्यान रखने योग्य सबसे जरूरी बातें
- कार ड्राइविंग करते समय सीट बेल्ट लगाना हमारी प्राथमिक सुरक्षा के लिए होता है।
- यदि आप सीट बेल्ट नहीं पहनते हैं तो एयरबैग भी आपकी सुरक्षा नहीं कर पाएगा।
- सीट बेल्ट केवल लंबी दूरी के लिए ही नहीं है, बल्कि छोटी दूरी के लिए भी है।
- स्टीयरिंग व्हील से शरीर कम से कम 300 मिमी दूर होना चाहिए।
- सीट पर आराम से बैठें और आगे की ओर न झुकें।
- कभी भी अपनी गाड़ी में क्रैश या साइड बार न लगवाएं।
- इससे एक्सीडेंट के दौरान एयरबैग खुलने में भी समय लग सकता है।
- एक बार एयरबैग, स्टीयरिंग व्हील, वायरिंग हार्नेस को इस्तेमाल होने के बाद इन्हें जरूर बदलें।
- ड्राइवर और यात्री के लिए हेड रेस्ट बहुत जरूरी है। सही जगह पर हेडरेस्ट न होने से एक्सीडेंट के दौरान गर्दन टूट सकती है।
- कार में ऐसी वस्तुएं न रखें जो आसानी से लुढ़क कर ऊपर गिर सकती हैं।
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जी हां, फोरलेन पर आए दिन हो रही कार दुर्घटनाओं से भी लोग सबक नहीं लेते। ज्यादातर कार सवार बिना सीटबेल्ट लगाए फर्राटा भरते नजर आते हैं। जबकि उन्हें पता है कि बिना सीट बेल्ट लगाए एयरबैग नहीं खुलते। जो कि हादसे के समय कवच का काम करते हैं। हाल में हुए हादसों में पाया गया कि जिसने सीट बेल्ट लगाया था वे घायल तो हुए लेकिन उनकी जान बच गई।
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रविवार को सामने आया सबसे बड़ा उदाहरण
- रविवार को फोरलेन पर हर्रैया थानांतर्गत बड़हर कला पेट्रोल पंप के सामने अनियंत्रित कार बाएं लेन में खड़े कंटेनर में पीछे से जा टकराई। दुर्घटना में कार में सवार लखनऊ निवासी 22 वर्षीय युवक की गाड़ी में फंसकर घटनास्थल पर मौत हो गई। जबकि कार चला रहा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। जांच में पाया गया कि चालक ने सीटबेल्ट लगा रखा था, जिसके कारण उसकी तरफ का एयरबैग खुल गया और उसकी जान बच गई। मगर दूसरी साइड पर बैठे युवक को सीटबेल्ट न लगाने का खामियाजा जान गंवाकर चुकाना पड़ा।
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जुर्माने का भी है प्रावधान
- सेवा निवृत्त आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी नारायण बताते हैं कि कानूनन सीट बेल्ट लगाना सिर्फ चालक की सेफ्टी के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि साथ बैठे दूसरे सवारियों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। टाटा एंड संस के चेयरमैन रहे सायरस मिस्त्री की सितंबर 2022 में हुए हादसे में मौत के बाद कार की अगली सीट के साथ ही पिछली सीट पर बैठी सवारियों के लिए भी सीटबेल्ट अनिवार्य कर दिया गया है। सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल 1989 के रूल 138 (3) में सीट बेल्ट को पहना अनिवार्य रखा गया है। अगर ड्राइवर या पैसेंजर ऐसा नहीं करते हैं तो उन पर मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के 194बी (1) के तहत एक हजार रुपये का जुर्माना लग सकता है।
इस तरह काम करता है एयरबैग
- मोटर विशेषज्ञ दीपक सिंह बताते हैं कि जिस समय कार का एक्सीडेंट होता है उस समय टक्कर की स्पीड के मुताबिक ही एयरबैग खुल जाते है। वहीं कार में एक्सेलेरोमीटर सर्किट एक्टिव हो जाता है और इलेक्ट्रिकल करंट भेजता है। जिसके बाद कार में लगा सेंसर एयरबैग को एक सिग्नल देता है जिसके बाद कार का एयरबैग खुल जाता है। एयरबैग कार सवार को स्टेयरिंग, डैशबोर्ड और शीशे की टक्कर से बचाता है। इसलिए कार में दरवाजों सहित अन्य जगहों पर भी एयरबैग दिया जाता है। मगर ज्यादातर गाड़ियों का एयरबैग तभी खुलता है जब सीटबेल्ट लगा हुआ हो।
ध्यान रखने योग्य सबसे जरूरी बातें
- कार ड्राइविंग करते समय सीट बेल्ट लगाना हमारी प्राथमिक सुरक्षा के लिए होता है।
- यदि आप सीट बेल्ट नहीं पहनते हैं तो एयरबैग भी आपकी सुरक्षा नहीं कर पाएगा।
- सीट बेल्ट केवल लंबी दूरी के लिए ही नहीं है, बल्कि छोटी दूरी के लिए भी है।
- स्टीयरिंग व्हील से शरीर कम से कम 300 मिमी दूर होना चाहिए।
- सीट पर आराम से बैठें और आगे की ओर न झुकें।
- कभी भी अपनी गाड़ी में क्रैश या साइड बार न लगवाएं।
- इससे एक्सीडेंट के दौरान एयरबैग खुलने में भी समय लग सकता है।
- एक बार एयरबैग, स्टीयरिंग व्हील, वायरिंग हार्नेस को इस्तेमाल होने के बाद इन्हें जरूर बदलें।
- ड्राइवर और यात्री के लिए हेड रेस्ट बहुत जरूरी है। सही जगह पर हेडरेस्ट न होने से एक्सीडेंट के दौरान गर्दन टूट सकती है।
- कार में ऐसी वस्तुएं न रखें जो आसानी से लुढ़क कर ऊपर गिर सकती हैं।