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खाद्य पदार्थों के कारोबार पर मिलावट की मार
basti
Updated Tue, 17 Oct 2017 11:12 PM IST
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बस्ती।
दीपोत्सव में बाजार सजे हैं। मिठाइयों की खरीदारी खूब हो रही है। खुशी के इस रंग में भंग न पड़े इसका भी जरा सा ध्यान जरूरी है। बाजार में खोवा से बनी मिठाइयों, बेसन, सरसों तेल, घी के अलावा मसालों के कारोबार में मिलावट की मार है। सस्ते के चक्कर में स्वास्थ्य से खिलवाड़ का सिलसिला परवान चढ़ गया है। ऐसे में लोगों को अब खुद की परवाह करनी चाहिए।
क्या-क्या हो सकती है मिलावट
अपने जिले में पिछले तीन सालों में मिलावट के सभी सामान को खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक-एक कर जान लिया है। हालांकि, इनका प्रयोग जानलेवा तो नहीं है, मगर लंबे समय तक कई खाद्य पदार्थों का सेवन मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव दिखाता है।
खोवा: खोवा में अब तक हुए जांच में आलू, शकरकंद अथवा आरारोट की मिलावट पकड़ी जा चुकी है। वह तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। मगर सिंथेटिक खोवा भी बाजार में काला बाजारी अधिक कमाने के चक्कर में उतार देते हैं, जिसका प्रयोग बेहद खतरनाक है।
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बेसन में मिलावट के लिए केवल मटर का प्रयोग काला बाजारी करते हैं। क्योंकि मटर की कीमत चना से कम है।
देशी घी: इस खाद्य पदार्थ में मिलावट वनस्पति तेल अथवा पाम आयल की होती है।
सरसों तेल: मिलावट वाला सरसों तेल बाजार में बहुतायत पहुंच रहा है। इसमें ब्रान व अन्य सस्ते तेल की मिलावट की जाती है।
घर में कैसे करें पहचान
विशेषज्ञ आरसी पांडेय की सुनें
खोवा की पहचान बेहद आसान है। इसे हाथ में रगड़ कर थोड़ी देर छोड़ दें। इसके बाद इसकी खुशबू बदल जाती है।
दूध में मिलावट की पहचान भी आसान है। दूूध की एक विशेष खुशबू होती है जिसे सूंघ कर आसानी से जाना जा सकता है।
सरसों तेल, देशी घी में मिलावट की पहचान अंगूठे के ऊपरी हिस्से में रगड़ कर छोड़ दें। पांच से सात मिनट के भीतर इसकी महक या तो गायब हो जाएगी अथवा बदल जाएगी।
पैकेट बंद सामान की गुणवत्ता के लिए उस पर निशान देख कर आसानी से पता लगाया जा सकता है। यदि पैकेट पर एफएसएसएआई नंबर नहीं है तो तय मानिए यह ब्रांडेड नहीं है।
मिठाई पर लगा वर्क स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसकी पहचान उंगलियों से रगड़ने पर किया जा सकता है। चांदी वर्क रगड़ने के बाद समाप्त हो जाएगा, जबकि एल्युमिनियम रगने के बाद छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाता है।
डॉक्टर बोले-
डॉ. पीके श्रीवास्तव ने कहा कि मिलावटी खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए तत्काल नहीं तो निश्चित रूप से लगातार प्रयोग करने पर नुकसानदायक है। कहते हैं कि खाद्य पदार्थों का सीधा संबंध आंतों व लीवर से होता है। ऐसे में खाद्य पदार्थों की खरीद गुणवत्ता देखकर ही करें।
खास खबर
ईको फ्रेंडली पर जोर, पटाखों से तौबा
स्मार्ट हुआ ग्राहक तो बाजार का बदला ट्रेंड
सेहत और पर्यावरण के मद्देनजर वस्तुओं की खरीदारी
लद गया त्योहार में आंख मूंदकर खरीदारी का चलन
वीरेंद्र पांडेय
बस्ती।
मंगलवार को धनतेरस के अवसर पर बाजार में ग्राहकों का रुझान देख व्यापारी हैरान हैं। त्योहार के नाम पर बेहिचक कुछ भी खरीद लेने वाला ग्राहक ज्यादा संजीदा दिखा। पटाखों से तौबा करने की मानों होड़ लगी हो। बच्चे को पटाखों से ना बोल रहे हैं, जिसे देख उनके अभिभावक भी दंग हैं। जानकार बताते हैं कि प्रमुख महानगरों से शुरू हुआ ईको फ्रेंडली कान्सेप्ट बाकायदा ट्रेंड बन चुका है।
शहर में गांधीनगर, कटरा, मंगल बाजार, दक्षिण दरवाजा, पांडेय बाजार जैसे प्रमुख स्थानों के अलावा जिले के तहसील मुख्यालयों और अन्य कस्बे-बाजारों में लोग संजीदगी से खरीदारी कर रहे हैं। सेहत और जेब को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से भागते दिखे। पर्यावरण और मौसम विज्ञानी डॉ. पद्माकर त्रिपाठी कहते हैं कि प्राकृतिक आपदा और मौसम का असंतुलन कितना दुखदायी और खतरनाक है, इसे देखने समझने के बाद अब आम जन मानस संजीदा है। कम पढ़े-लिखे लोग भी पर्यावरण प्रदूषण, आपदा, ग्लोबल वार्मिंग, ह्वेदर डिस्टर्बेंस जैसे शब्दों की न केवल गंभीरता समझने को उत्सुक हैं, बल्कि नफा-नुकसान का आकलन करने में भी सक्षम है। इसकी बानगी इस बार का ट्रेंड देखकर मिल जाती है।
प्लास्टिक से सजावट नुकसानदेह
गांधीनगर में सजावटी सामान बेचने वाले राहुल टंडन कहते हैं कि दिवाली में पर्यावरण को सिर्फ पटाखों से नहीं, बल्कि सजावट में इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक से बनी चीजों से नुकसान होता है। बाजार में इस बार कागज या रिसाइकिल्ड पेपर से बनी सजावटी चीजें लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
ईको फ्रेंडली पटाखे उपलब्ध
अगर आपको पटाखे जलाना है तो इस बार बाजार में भी पटाखों की कई वैरायटी उपलब्ध है। ऐसे पटाखों में धुआं कम निकालते हैं और धमाके की आवाज भी अपेक्षाकृत कम होती है। सरकारी मानक डेसिबल के हिसाब से उसे तैयार किया जाता है। इन पटाखों से धुआं नहीं निकलता है बल्कि रंग-बिरंगे कागजों की पत्तियां या थरमाकोल की रंग बिरंगी गोलियां फव्वारे के रूप में निकलती हैं।
मार्केट में मौजूद ऐसे भी उत्पाद
बाजार में ईको फ्रेंडली पटाखे बाजार में पांच रुपये से लेकर 300 तक कीमत के पटाखे उपलब्ध हैं। इसके अलावा मैजिक पाइप, खुशी, सुपर सिक्स, कनपटी सेलिब्रेटी, मैजिक अनार, मैजिक कृष्णजाल, शुभ वर्षा, फ्लॉवर पोस्ट, रंग बरसात, फ्लॉवर पॉट, ग्राउंड चक्र, सुप्रीम कलर, गुड़िया पेपर हवाई के अलावा कुछ अन्य वैरायटी के पटाखे शामिल हैं।
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दीपोत्सव में बाजार सजे हैं। मिठाइयों की खरीदारी खूब हो रही है। खुशी के इस रंग में भंग न पड़े इसका भी जरा सा ध्यान जरूरी है। बाजार में खोवा से बनी मिठाइयों, बेसन, सरसों तेल, घी के अलावा मसालों के कारोबार में मिलावट की मार है। सस्ते के चक्कर में स्वास्थ्य से खिलवाड़ का सिलसिला परवान चढ़ गया है। ऐसे में लोगों को अब खुद की परवाह करनी चाहिए।
क्या-क्या हो सकती है मिलावट
अपने जिले में पिछले तीन सालों में मिलावट के सभी सामान को खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक-एक कर जान लिया है। हालांकि, इनका प्रयोग जानलेवा तो नहीं है, मगर लंबे समय तक कई खाद्य पदार्थों का सेवन मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव दिखाता है।
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खोवा: खोवा में अब तक हुए जांच में आलू, शकरकंद अथवा आरारोट की मिलावट पकड़ी जा चुकी है। वह तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। मगर सिंथेटिक खोवा भी बाजार में काला बाजारी अधिक कमाने के चक्कर में उतार देते हैं, जिसका प्रयोग बेहद खतरनाक है।
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बेसन में मिलावट के लिए केवल मटर का प्रयोग काला बाजारी करते हैं। क्योंकि मटर की कीमत चना से कम है।
देशी घी: इस खाद्य पदार्थ में मिलावट वनस्पति तेल अथवा पाम आयल की होती है।
सरसों तेल: मिलावट वाला सरसों तेल बाजार में बहुतायत पहुंच रहा है। इसमें ब्रान व अन्य सस्ते तेल की मिलावट की जाती है।
घर में कैसे करें पहचान
विशेषज्ञ आरसी पांडेय की सुनें
खोवा की पहचान बेहद आसान है। इसे हाथ में रगड़ कर थोड़ी देर छोड़ दें। इसके बाद इसकी खुशबू बदल जाती है।
दूध में मिलावट की पहचान भी आसान है। दूूध की एक विशेष खुशबू होती है जिसे सूंघ कर आसानी से जाना जा सकता है।
सरसों तेल, देशी घी में मिलावट की पहचान अंगूठे के ऊपरी हिस्से में रगड़ कर छोड़ दें। पांच से सात मिनट के भीतर इसकी महक या तो गायब हो जाएगी अथवा बदल जाएगी।
पैकेट बंद सामान की गुणवत्ता के लिए उस पर निशान देख कर आसानी से पता लगाया जा सकता है। यदि पैकेट पर एफएसएसएआई नंबर नहीं है तो तय मानिए यह ब्रांडेड नहीं है।
मिठाई पर लगा वर्क स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसकी पहचान उंगलियों से रगड़ने पर किया जा सकता है। चांदी वर्क रगड़ने के बाद समाप्त हो जाएगा, जबकि एल्युमिनियम रगने के बाद छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाता है।
डॉक्टर बोले-
डॉ. पीके श्रीवास्तव ने कहा कि मिलावटी खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए तत्काल नहीं तो निश्चित रूप से लगातार प्रयोग करने पर नुकसानदायक है। कहते हैं कि खाद्य पदार्थों का सीधा संबंध आंतों व लीवर से होता है। ऐसे में खाद्य पदार्थों की खरीद गुणवत्ता देखकर ही करें।
खास खबर
ईको फ्रेंडली पर जोर, पटाखों से तौबा
स्मार्ट हुआ ग्राहक तो बाजार का बदला ट्रेंड
सेहत और पर्यावरण के मद्देनजर वस्तुओं की खरीदारी
लद गया त्योहार में आंख मूंदकर खरीदारी का चलन
वीरेंद्र पांडेय
बस्ती।
मंगलवार को धनतेरस के अवसर पर बाजार में ग्राहकों का रुझान देख व्यापारी हैरान हैं। त्योहार के नाम पर बेहिचक कुछ भी खरीद लेने वाला ग्राहक ज्यादा संजीदा दिखा। पटाखों से तौबा करने की मानों होड़ लगी हो। बच्चे को पटाखों से ना बोल रहे हैं, जिसे देख उनके अभिभावक भी दंग हैं। जानकार बताते हैं कि प्रमुख महानगरों से शुरू हुआ ईको फ्रेंडली कान्सेप्ट बाकायदा ट्रेंड बन चुका है।
शहर में गांधीनगर, कटरा, मंगल बाजार, दक्षिण दरवाजा, पांडेय बाजार जैसे प्रमुख स्थानों के अलावा जिले के तहसील मुख्यालयों और अन्य कस्बे-बाजारों में लोग संजीदगी से खरीदारी कर रहे हैं। सेहत और जेब को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से भागते दिखे। पर्यावरण और मौसम विज्ञानी डॉ. पद्माकर त्रिपाठी कहते हैं कि प्राकृतिक आपदा और मौसम का असंतुलन कितना दुखदायी और खतरनाक है, इसे देखने समझने के बाद अब आम जन मानस संजीदा है। कम पढ़े-लिखे लोग भी पर्यावरण प्रदूषण, आपदा, ग्लोबल वार्मिंग, ह्वेदर डिस्टर्बेंस जैसे शब्दों की न केवल गंभीरता समझने को उत्सुक हैं, बल्कि नफा-नुकसान का आकलन करने में भी सक्षम है। इसकी बानगी इस बार का ट्रेंड देखकर मिल जाती है।
प्लास्टिक से सजावट नुकसानदेह
गांधीनगर में सजावटी सामान बेचने वाले राहुल टंडन कहते हैं कि दिवाली में पर्यावरण को सिर्फ पटाखों से नहीं, बल्कि सजावट में इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक से बनी चीजों से नुकसान होता है। बाजार में इस बार कागज या रिसाइकिल्ड पेपर से बनी सजावटी चीजें लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
ईको फ्रेंडली पटाखे उपलब्ध
अगर आपको पटाखे जलाना है तो इस बार बाजार में भी पटाखों की कई वैरायटी उपलब्ध है। ऐसे पटाखों में धुआं कम निकालते हैं और धमाके की आवाज भी अपेक्षाकृत कम होती है। सरकारी मानक डेसिबल के हिसाब से उसे तैयार किया जाता है। इन पटाखों से धुआं नहीं निकलता है बल्कि रंग-बिरंगे कागजों की पत्तियां या थरमाकोल की रंग बिरंगी गोलियां फव्वारे के रूप में निकलती हैं।
मार्केट में मौजूद ऐसे भी उत्पाद
बाजार में ईको फ्रेंडली पटाखे बाजार में पांच रुपये से लेकर 300 तक कीमत के पटाखे उपलब्ध हैं। इसके अलावा मैजिक पाइप, खुशी, सुपर सिक्स, कनपटी सेलिब्रेटी, मैजिक अनार, मैजिक कृष्णजाल, शुभ वर्षा, फ्लॉवर पोस्ट, रंग बरसात, फ्लॉवर पॉट, ग्राउंड चक्र, सुप्रीम कलर, गुड़िया पेपर हवाई के अलावा कुछ अन्य वैरायटी के पटाखे शामिल हैं।