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Basti News: गंभीर बीमारी वाले मरीज किए जा रहे रेफर

Thu, 14 Mar 2024 12:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Thu, 14 Mar 2024 12:32 AM IST
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Patients with serious illness are being referred.
मेडिकल कॉलेज से रोज रेफर हो रहे पांच से दस गंभीर मरीज
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सरकारी अस्पतालों में कार्डियोलॉजिस्ट, गैस्ट्रो एवं न्यूरो के चिकित्सक नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना भले हो गई है। मगर, हार्ट एवं ब्रेन में यदि दिक्कत है तो यहां इलाज संभव नहीं है। ऐसे मरीजों को प्रतिदिन गोरखपुर या लखनऊ रेफर कर दिया जा रहा है। क्योंकि मेडिकल कॉलेज को अभी सुपर स्पेशलिटी कटेगरी में शामिल होने का इंतजार है। वहीं जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट एवं गैस्ट्रोलॉजिस्ट के पद कई साल से खाली हैं।
यहां मेडिकल कॉलेज स्थापित हुए चार वर्ष पूरे हो गए। स्नातक स्तर के 100 डाॅक्टरों के एक बैच की पढ़ाई पूरी होने वाली है। अभी यह कॉलेज सुपर स्पेशलिटी कटेगरी में शामिल नहीं हो सका है। परास्नातक (पीजी) स्तर की मान्यता के बाद ही यहां न्यूरो, गैस्ट्रो, कार्डियो आदि महत्वपूर्ण विभागों का सृजन होगा। इसके बाद ही इन विषयों के चिकित्सक भी उपलब्ध हो पाएंगे। ऐसी स्थिति में सीएचसी, पीएचसी एवं जिला अस्पताल की तरह मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में भी सिर्फ सामान्य मरीजों के ही इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
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पेट दर्द, खांसी, जुकाम, बुखार से पीड़ित मरीज ही मेडिकल कॉलेज में आमतौर पर देखे जा रहे हैं। इन्हीं मरीजों को भर्ती भी किया जा रहा है। सीने में दर्द, अचानक धबराहट से जूझने वाले मरीजों को इमरजेंसी से ही लखनऊ एवं गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा मार्ग दुर्घटना में घायल गंभीर मरीजों को न्यूरो की समस्या होने पर रेफर किया जा रहा है। ऐसे मरीजों के साथ आने तीमारदारों की उम्मीद मेडिकल कॉलेज पहुंंचकर टूट जा रही है। प्रत्येक 24 घंटे में इस तरह के पांच से 10 मरीज यहां से रेफर हो रहे हैं।
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ओपेक चिकित्सालय कैली में मरीज माफिया भी सक्रिय हैं। यहां जैसे ही मरीज दाखिल होते हैं मरीज माफिया के एजेंट उनके साथ लग लेते हैं। कुछ देर बाद मरीज के तीमारदारों से संवाद स्थापित कर समस्या से परिचित हो जाते हैं। जैसे ही उन्हें पता चलता है कि मरीज को हार्ट या न्यूरो से संबंधित समस्या है वह तुरंत प्राइवेट अस्पताल में ले जाने की सलाह देने लगते हैं। इसके बाद मरीज माफिया समझा बुझाकर शहर के निजी अस्पतालों में पहुंचा देते हैं। एक मरीज पर उनका अच्छा खासा कमीशन तैयार हो जाता है।

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बीपी की दवा देकर लखनऊ ले जाने की सलाह दी
बनकटी क्षेत्र के परमेश्वर अपने पिता को गंभीर हालत में लेकर मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली पहुंचे। बताया कि उनके पिता के सीने में हल्का- हल्का दर्द हो रहा है। बेचैनी भी है। इमरजेंसी में मौजूद फार्मास्सिट ने तत्काल बीपी चेक किया। मरीज का बीपी बढ़ा हुआ था। चिकित्सक ने बीपी की एक दवा लिखी और सलाह दी कि इसे खिलाकर तुरंत गोरखपुर या लखनऊ मेडिकल कॉलेज ले जाइए। हार्ट अटैक के लक्षण दिख रहे हैं। परमेश्वर और उनके परिजन निराश होकर लखनऊ ले जाने की व्यवस्था में जुट गए।
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10 मार्च को सुभाष को भी देखना पड़ा था यही दौर
रुधौली क्षेत्र के सुभाष को भी 10 मार्च को यही दौर देखना पड़ा था। उनके चाचा को अचानक चक्कर आने के साथ चलने-फिरने में दिक्कत होने लगी। वह जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां से मरीज को मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली रेफर किया गया। यहां पहुंचने पर बिना भर्ती किए ही मरीज को न्यूरो की समस्या बताई गई। उन्हें हायर सेंटर पर ले जाने की सलाह दी गई। सुभाष को रात में ही अपने मरीज को लेकर लखनऊ जाना पड़ा। बुधवार को लखनऊ से लौटने के बाद वह अपने मरीज की शुगर, बीपी की जांच कराने के उद्देश्य से ओपेक चिकित्सालय कैली में फिजिशियन के पास पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने आपबीती सुनाई।
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केस एक
मुंडेरवा से आए मरीज पलटू राम को फालिज मार दिया था। उन्हें कैली अस्पताल से रेफर किया गया। बाद में मरीज के तीमारदार दलालों के संपर्क में आकर मालवीय रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। जहां तीन दिन के भीतर 52 हजार रुपये का बिल तैयार हुआ। तीमारदार और अस्पताल संचालक में इसको लेकर तकरार भी हुई।
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केस- दो
सांउघाट क्षेत्र से राम किशुन को गंभीर हालत में परिजन लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां उन्हें हार्ट अटैक की समस्या बताई गई। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रेफर किया गया। इस दौरान मरीज माफिया सक्रिय हो गए। जैसे ही रेफर की बात सामने आई वह तीमारदारों से बगल के एक निजी अस्पताल में ले चलने की सलाह देने लगे। सहमति मिलने पर दलाल खुद मरीज को अपने साथ ले जाकर जिला अस्पताल के पास एक नर्सिंगहोम में भर्ती करा दिया।

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कोट
मेडिकल कॉलेज को अभी सुपर स्पेशलिअी की सुविधा नहीं मिल पाई है। पीजी स्तर की मान्यता मिलने के बाद ही न्यूरो, गैस्ट्रो, कार्डियो के विशेषज्ञ तैनात होंगे।
-डॉ. एएन प्रसाद, सीएमएस, ओपेक चिकित्सालय कैली
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