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Basti News: सड़क पर दौड़ रहे गन्ना लदे ओवरलोड ट्रॉले...कहां पलट जाएं कोई ठिकाना नहीं

Thu, 13 Feb 2025 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Thu, 13 Feb 2025 12:21 AM IST
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Overloaded trolleys carrying sugarcane are running on the road...there is no way of knowing where they might overturn
ट्रक जितना गन्ना लादकर मुंडेरवा मिल पर पहुंचा ट्रॉला
ट्रॉले के बगल से गुजरने वालों की कांप जाती है रूह, सिर्फ नाम की जांच और कार्रवाई
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नहीं लग पा रहा जानलेवा परिवहन पर अंकुश
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ओवरलोड गन्ना लादकर सड़क पर फर्राटा रहे ट्रैक्टर-ट्रॉला जिसके बगल से गुजरते हैं, उनकी सांस अटक जाती है। दो मंजिला मकान जितनी ऊंचाई तक गन्ना लदे ट्राॅले कब पलट जाएं, कहना मुश्किल है। जानकार बताते हैं कि काफी लोड होने की वजह से चालक का नियंत्रण ज्यादा नहीं रह जाता। ट्रैक्टर का ब्रेक भी इतना पॉवरफुल नहीं होता कि वजन से हांफ रहे ट्रॉले को जरूरत पड़ने पर रोक सकें। यही वजह है कि आए दिन हादसे हो रहे हैं। मंगलवार की रात एक ओवरलोड गन्ना लदा ट्रॉला लालगंज क्षेत्र के कैथौरा गांव के पास एक बाइक के ऊपर पलट गया था। गनीमत रही कि बाइक चालक खतरे को भांपकर भाग खड़ा हुआ था।
बताया जा रहा है कि क्रय केंद्रों से मिल तक गन्ने की ढुलाई के लिए ट्रकों से ज्यादा ट्रॉला लगाए गए हैं। ट्राले को खींचता तो ट्रैक्टर है, मगर उस पर वजन ट्रक जितना लदा होता है। कई ट्रॉलों पर 15 से 20 टन तक गन्ना लदे लेते हैं। इनकी जांच और रोक-टोक करने करने वाला नहीं है। परिवहन विभाग दिखावे के लिए एक-दो दिन जांच कर चुप बैठ जाता है।
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जिले में लगभग 32 हजार ट्रैक्टर-ट्रॉली कृषि कार्य के लिए पंजीकृत हैं। इनका खेत से लेकर बाजार तक व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। केवल गन्ना ही नहीं, ईंट भट्ठों से लेकर मिट्टी व गिट्टी ढोने में भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लगी हैं। तीन दिन पहले एआरटीओ पंकज सिंह ने मुंडेरवा से तीन ओवरलोड ट्रॉला सीज किया था, मगर रोक नहीं लगा पाए।
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केस एक
12 जनवरी को मुंडेरवा थाना क्षेत्र के भैसा पांडेय गांव की मां-बेटी गन्ना छीलकर उसकी हरी पत्ती जानवरों के लिए लेकर पैदल घर जाते समय गन्ना लदे ट्रॉले की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। गुस्साए ग्रामीणों ने ट्रैक्टर-ट्रॉला रोक कर दोपहर एक से दो बजे के बीच जाम लगाया। बाद में महिला को गोरखपुर से रेफर किए जाने के बाद ग्रामीणों ने शाम पांच बजे दोबारा जाम लगाया। हादसे के दूसरे दिन घायल महिला केवटहिया निवासी 45 वर्षीय पवित्रा देवी पत्नी हजारी की मौत हो गई थी।
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केस दो
बाल-बाल बचा था पूर्व प्रधान का परिवार
15 जनवरी को रुधौली क्षेत्र के रौनापार कला गांवा से गन्ना लेकर अठदमा चीनी मिल की तरफ जा रहा ट्रॉला कैडिहवा गांव के पास अचानक पलट गया। जिस जगह ट्रॉला पलटा वहां से पूर्व प्रधान पप्पू यादव के परिवार के लोग बमुश्किल एक मिनट पहले हटे थे। ट्रॉला की चपेट में आने से बिजली का खंभा टूट गया था और पूरे क्षेत्र की बिजली गुल हो गई थी। जांच में पता चला कि ट्रॉला का पंजीकरण नहीं था।
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बदला पंजीकरण का नियम
आरटीओ फरीदुद्दीन ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नया नियम लागू किया गया है। ट्रैक्टर के साथ उसकी ट्रॉली और ट्रेलर (ट्रॉला) का पंजीकरण कराना भी जरूरी होगा। हर ट्रॉली और ट्रेलर पर उसका चार अंकों का पंजीकरण नंबर लिखा होगा। साथ ही, उस पर 17 अंकों का चेसिस नंबर पर भी दर्ज किया जाएगा। इससे उसके मालिक की पहचान आसानी से हो सकेगी। सड़क सुरक्षा मानकों को पूरा किए बिना अब ट्राॅलियां सड़कों पर दौड़ नहीं सकेंगी। ट्रॉली के निर्माण के समय निर्माता कंपनी को मानकों को पालन करना होगा। मानकों पर खरा उतरने के बाद ही रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।

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यह है ट्रॉली की नई एसओपी
नई एसओपी के मुताबिक, ट्रेलर और ट्रॉली निर्माण में रियर व साइड अंडर प्रोटेक्शन डिवाइस, बैक लाइट फिटिंग और बैक लाइट के कनेक्शन की व्यवस्था ट्रैक्टर से की जाएगी। निर्माता कंपनी को एक कोड निर्धारित किया जाएगा, जिसके आधार पर उसके शहर, चेसिस नंबर और निर्माण साल का पता चल सकेगा। ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड 112 के मानकों के तहत चार मॉडल का जिक्र किया गया है। इसमें आर-1, आर-2, आर-3 और आर-4 शामिल हैं। इनमें तीन मॉडल आर-2, आर-3 और आर-4 का रजिस्ट्रेशन कृषि के लिए किया जाएगा। अब किसी भी मॉडल की ट्रॉली में एक एक्सल नहीं, बल्कि दो एक्सल होना जरूरी है। आर-2, आर-3 में टायरों की संख्या चार और आर-4 मॉडल में आठ टायर लगाए जाएंगे। आर-2 ट्रॉली की अधिकतम चौड़ाई दो मीटर होगी, आर-3 और आर-4 मॉडल की अधिकतम चौड़ाई 2.5 मीटर होगी।
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