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Basti News: ओवरहेड टैंकों की 20 माह से नहीं हुई सफाई
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कटरा नलकूप के अंदर गंदगी के बीच जलापूर्ति संवाद
बस्ती। शहर को पेयजल सप्लाई करने का जिम्मा नगर पालिका पर है। अभी शहर को आठ ओवरहेड टैंकों के जरिये पानी सप्लाई की जा रही है। यह ओवरहेड टैंक 20 माह पहले साफ हुए थे। मानक है कि ओवरहेड टैंक हर साल साफ करा दिए जाएं मगर, पालिका प्रशासन शायद मानक ही भूल चुका है, यही कारण है कि अब तक टंकियों की सफाई के लिए कोई कार्ययोजना भी तैयार नहीं की जा सकी है।
बता दें कि नगर पालिका में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक शहर की तीन लाख से अधिक की आबादी है। सवा लाख के करीब मतदाता शहर में निवास करते हैं। शहर को पानी सप्लाई करने के लिए अब तक कुल आठ ओवरहेड टैंक थे। लेकिन पेयजल पुनर्गठन योजना पूरी हो जाने पर शहर को सात ओवरहेड टैंक और मिल जाएंगे। इस प्रकार शहर को पानी सप्लाई करने के लिए कुल 15 ओवरहेड टैंक होंगे। इस समय कुल आठ ओवरहेड टैंक से शहर के लोगों को पानी सप्लाई की जा रही है।
नपा प्रशासन का दावा है यह ओवरहेड टैंक गत वर्ष 2024 में अप्रैल में साफ कराए गए थे। नियमानुसार अप्रैल 2025 में फिर इनकी सफाई कराई जानी चाहिए थी। लेकिन साल 2025 बीत जाने और साल 2026 जनवरी माह शुरू हो जाने के बाद अभी तक टंकियों की साफ-सफाई कराए जाने के लिए कोई कार्य योजना तैयार नहीं की गई है। बताते हैं कि शहर के अधिकांश मोहल्ले नपा के ही पानी पर निर्भर हैं। आवास विकास, कटरा, बभनगांवा व नरहरिया क्षेत्र में अधिक उपभोक्ता हैं। यहां आए दिन लीकेज की शिकायत और पानी न आने की शिकायत आती है।
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पानी की क्वालिटी सफाई पर निर्भर : ओवरहेड टैंकों से शहर में होने वाली सप्लाई का पानी साफ है या नहीं यह साफ-सफाई पर ही निर्भर करता है। एक वर्ष में सफाई हो इसके साथ ही समय-समय पर ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग किया जाना चाहिए। जिससे पानी दूषित न हो। ओवरहेड टैंक की सफाई न होने से इसमें काई जमा हो जाती है।
50 साल पुरानी पाइप लाइन के जरिये जलापूर्ति : विभागीय जानकार बताते हैं कि 50 साल पुरानी पाइप लाइन के जरिये शहर में जलापूर्ति कराई जा रही है। यह पाइप 14 से 12 इंच है। वहीं, आठ से छह इंच की पाइप कई जगहों पर नाले से होकर पास करवा दिए हैं। इससे लीकेज होने पर नाले का गंदा पानी सीधे टोंटी के जरिये घरों तक पहुंच जाता है।
टंकी में मरा था कबूतर, लीकेज दुरुस्त करने पर निकला : विभागीय कर्मचारियों के अनुसार, कटेश्वर पार्क स्थित ओवरहेड टैंक में कबूतर मरा था और लोग उस पानी को पी रहे थे। रोडवेज के पास पाइप में लीकेज हुआ था। सूचना पर विभागीय कर्मचारी पहुंचे और लाइन काटकर दुरुस्त कर रहे थे, तभी उसमें से मरे हुए कबूतर का शव निकला था।
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बता दें कि नगर पालिका में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक शहर की तीन लाख से अधिक की आबादी है। सवा लाख के करीब मतदाता शहर में निवास करते हैं। शहर को पानी सप्लाई करने के लिए अब तक कुल आठ ओवरहेड टैंक थे। लेकिन पेयजल पुनर्गठन योजना पूरी हो जाने पर शहर को सात ओवरहेड टैंक और मिल जाएंगे। इस प्रकार शहर को पानी सप्लाई करने के लिए कुल 15 ओवरहेड टैंक होंगे। इस समय कुल आठ ओवरहेड टैंक से शहर के लोगों को पानी सप्लाई की जा रही है।
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नपा प्रशासन का दावा है यह ओवरहेड टैंक गत वर्ष 2024 में अप्रैल में साफ कराए गए थे। नियमानुसार अप्रैल 2025 में फिर इनकी सफाई कराई जानी चाहिए थी। लेकिन साल 2025 बीत जाने और साल 2026 जनवरी माह शुरू हो जाने के बाद अभी तक टंकियों की साफ-सफाई कराए जाने के लिए कोई कार्य योजना तैयार नहीं की गई है। बताते हैं कि शहर के अधिकांश मोहल्ले नपा के ही पानी पर निर्भर हैं। आवास विकास, कटरा, बभनगांवा व नरहरिया क्षेत्र में अधिक उपभोक्ता हैं। यहां आए दिन लीकेज की शिकायत और पानी न आने की शिकायत आती है।
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पानी की क्वालिटी सफाई पर निर्भर : ओवरहेड टैंकों से शहर में होने वाली सप्लाई का पानी साफ है या नहीं यह साफ-सफाई पर ही निर्भर करता है। एक वर्ष में सफाई हो इसके साथ ही समय-समय पर ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग किया जाना चाहिए। जिससे पानी दूषित न हो। ओवरहेड टैंक की सफाई न होने से इसमें काई जमा हो जाती है।
50 साल पुरानी पाइप लाइन के जरिये जलापूर्ति : विभागीय जानकार बताते हैं कि 50 साल पुरानी पाइप लाइन के जरिये शहर में जलापूर्ति कराई जा रही है। यह पाइप 14 से 12 इंच है। वहीं, आठ से छह इंच की पाइप कई जगहों पर नाले से होकर पास करवा दिए हैं। इससे लीकेज होने पर नाले का गंदा पानी सीधे टोंटी के जरिये घरों तक पहुंच जाता है।
टंकी में मरा था कबूतर, लीकेज दुरुस्त करने पर निकला : विभागीय कर्मचारियों के अनुसार, कटेश्वर पार्क स्थित ओवरहेड टैंक में कबूतर मरा था और लोग उस पानी को पी रहे थे। रोडवेज के पास पाइप में लीकेज हुआ था। सूचना पर विभागीय कर्मचारी पहुंचे और लाइन काटकर दुरुस्त कर रहे थे, तभी उसमें से मरे हुए कबूतर का शव निकला था।