{"_id":"60490beb8ebc3ec39f5dbc3d","slug":"organic-fertilizer-will-be-made-from-the-waste-of-toilets-basti-news-gkp3878674189","type":"story","status":"publish","title_hn":"शौचालयों के अपशिष्ट से बनेगी जैविक खाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शौचालयों के अपशिष्ट से बनेगी जैविक खाद
विज्ञापन
चांदमारी के पास निर्माणाधीन एफएसटीपी प्लांट।
- फोटो : BASTI
शौचालयों के अपशिष्ट से बनेगी जैविक खाद
बस्ती। शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट का निस्तारण बड़ी समस्या होती है। इसे न तो नदी-नालों में फेंका जा सकता है और न ही खुले में। इस समस्या से निपटने के लिए नगर पालिका परिषद एफएसटीपी प्लांट का निर्माण करा रहा है। शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट से जैविक खाद बनाई जाएगी और पानी को ट्रीटमेंट के बाद खेतों की सिंचाई के लिए भेज दिया जाएगा।
जिले के चांदमारी के पास एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाया जा रहा है। इसका निर्माण शुरू हो गया है। इस प्लांट के नवंबर-2022 में पूरी तरह बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है। इस प्लांट पर शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट को लाया जाएगा, जिसका ट्रीटमेंट कर जैविक खाद बनाया जाएगा। प्लांट के लिए चार करोड़ 32 लाख रुपये के बजट का निर्धारण किया गया है। इसका निर्माण जल निगम करा रहा है। नगर पालिका की गाड़ियां शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट को इस स्थान पर लेकर आएंगी, जहां तकनीकी टीम अपशिष्ट का ट्रीटमेंट करेगी। एफएसटीपी प्लांट पर अपशिष्ट से तैयार जैविक खाद को कृषकों को सस्ते दर पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही विशेषज्ञ इस खाद से होने वाले लाभ को लेकर कृषकों को जागरूक करेंगे। खाद की ऑनलाइन बिक्री की भी योजना बनाई जा रही है। कोरियर के माध्यम से यहां निर्मित खाद को विदेशों में भी भेेजे जाने की योजना है। जल निगम के अवर अभियंता सुशील सिंह बताते हैं कि नवंबर-2022 में एफएसटीपी प्लांट बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद इसे नगर पालिका परिषद को हैंडओवर कर दिया जाएगा। शौचालयों के अपशिष्ट के निस्तारण में यह अहम साबित होगा।
इसलिए जरूरी है एफएसटीपी प्लांट
जनपद में कहीं भी सीवर लाइन नहीं है। लोगों ने घरों में ही टैंक बनवा रखे हैं। जब घरों में बने टैंक भर जाते हैं तो इन्हें खाली करने के लिए नगर पालिका या निजी कंपनियों से टैंकर मंगवाया जाता है। टैंकर गुपचुप ढंग से हाईवे के किनारे या फिर खेतों के किराने अपशिष्ट को छोड़ देते हैं। इससे गंदगी फैलती है। इस प्लांट के लगने के बाद यह समस्या दूर हो जाएगी।
विज्ञापन
सिचांई में भी होगा उपयोगी
इस प्लांट में कई तरह के पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। जिनकी सिंचाई ‘टपक सिंचाई’ प्रणाली के तहत इस ट्रीटेड लिक्विड अपशिष्ट से की जाएगी। अलग हुए सॉलिड अपशिष्ट का इस्तेमाल खाद के रूप में होगा। इस प्लांट की खास बात यह है कि इसके संचालन में बिजली का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। करीब 13 किलोवाट के प्लांट का संचालन सोलर ऊर्जा के माध्यम से किया जाएगा। इस प्लांट के अंदर ही 25 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया जाएगा।
विज्ञापन
बस्ती। शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट का निस्तारण बड़ी समस्या होती है। इसे न तो नदी-नालों में फेंका जा सकता है और न ही खुले में। इस समस्या से निपटने के लिए नगर पालिका परिषद एफएसटीपी प्लांट का निर्माण करा रहा है। शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट से जैविक खाद बनाई जाएगी और पानी को ट्रीटमेंट के बाद खेतों की सिंचाई के लिए भेज दिया जाएगा।
जिले के चांदमारी के पास एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाया जा रहा है। इसका निर्माण शुरू हो गया है। इस प्लांट के नवंबर-2022 में पूरी तरह बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है। इस प्लांट पर शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट को लाया जाएगा, जिसका ट्रीटमेंट कर जैविक खाद बनाया जाएगा। प्लांट के लिए चार करोड़ 32 लाख रुपये के बजट का निर्धारण किया गया है। इसका निर्माण जल निगम करा रहा है। नगर पालिका की गाड़ियां शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट को इस स्थान पर लेकर आएंगी, जहां तकनीकी टीम अपशिष्ट का ट्रीटमेंट करेगी। एफएसटीपी प्लांट पर अपशिष्ट से तैयार जैविक खाद को कृषकों को सस्ते दर पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही विशेषज्ञ इस खाद से होने वाले लाभ को लेकर कृषकों को जागरूक करेंगे। खाद की ऑनलाइन बिक्री की भी योजना बनाई जा रही है। कोरियर के माध्यम से यहां निर्मित खाद को विदेशों में भी भेेजे जाने की योजना है। जल निगम के अवर अभियंता सुशील सिंह बताते हैं कि नवंबर-2022 में एफएसटीपी प्लांट बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद इसे नगर पालिका परिषद को हैंडओवर कर दिया जाएगा। शौचालयों के अपशिष्ट के निस्तारण में यह अहम साबित होगा।
विज्ञापन
इसलिए जरूरी है एफएसटीपी प्लांट
जनपद में कहीं भी सीवर लाइन नहीं है। लोगों ने घरों में ही टैंक बनवा रखे हैं। जब घरों में बने टैंक भर जाते हैं तो इन्हें खाली करने के लिए नगर पालिका या निजी कंपनियों से टैंकर मंगवाया जाता है। टैंकर गुपचुप ढंग से हाईवे के किनारे या फिर खेतों के किराने अपशिष्ट को छोड़ देते हैं। इससे गंदगी फैलती है। इस प्लांट के लगने के बाद यह समस्या दूर हो जाएगी।
विज्ञापन
सिचांई में भी होगा उपयोगी
इस प्लांट में कई तरह के पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। जिनकी सिंचाई ‘टपक सिंचाई’ प्रणाली के तहत इस ट्रीटेड लिक्विड अपशिष्ट से की जाएगी। अलग हुए सॉलिड अपशिष्ट का इस्तेमाल खाद के रूप में होगा। इस प्लांट की खास बात यह है कि इसके संचालन में बिजली का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। करीब 13 किलोवाट के प्लांट का संचालन सोलर ऊर्जा के माध्यम से किया जाएगा। इस प्लांट के अंदर ही 25 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया जाएगा।