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Basti News: रीयल टाइम खतौनी में नहीं बना संशोधन का विकल्प.. काश्तकार परेशान, बढ़ी भागदौड़

Mon, 08 Jan 2024 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Mon, 08 Jan 2024 11:23 PM IST
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No option for amendment in real time Khatauni...Farmers upset, rush increased
बस्ती। रीयल टाइम खतौनी में संशोधन का विकल्प अब तक नहीं बन सका है। अंश निर्धारण में गड़बड़ी होने से काश्तकार परेशान है। प्रार्थनापत्र के साथ उनकी भागदौड़ तहसील में बढ़ गई है। जिम्मेदार मदद से हाथ खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि संशोधन के लिए नया शासनादेश नहीं आया है। यह सुनकर काश्तकार भी निराश हो जा रहे हैं। बैनामों पर भी इसका असर पड़ने लगा है।
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वर्ष 2023 में शासन ने खतौनी की प्रकृति बदलने के निर्देश दिए थे। इसके तहत फसली वर्ष 1431 की रीयल टाइम खतौनी तैयार करनी थी। इसमें प्रत्येक गाटे की पृथक खतौनी तैयार करनी थी और खातेदार अंश निर्धारण होना था। शासन की मंशा के अनुरूप यदि धरातल पर कार्य हुआ तो इस अभियान में काफी हद तक जमीनों का विवाद भी सुलझना स्वाभाविक रहा। अधिकतर मौजों में जमीन किसी और कब्जा किसी और का बना हुआ है। यदि मौके की नवैयत की जांच करते हुए खतौनी की प्रकृति बदली गई होती तो ऐसे विवाद खत्म किए जा सकते हैं। मगर, विभाग ने इस कार्य के लिए कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटरों को जिम्मेदारी सौंप दी।
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इसमें लेखापालों की भूमिका नगण्य कर दी गई। पुरानी खतौनी और 1425 फसली वर्ष के पूर्व हुए अंश निर्धारण को आधार बनाकर रीयल टाइम खतौनी तैयार कर परिषद की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई। बाद में जब खतौनी निर्गत होने लगी तो तमाम खामियां उजागर हुईं। अंश निर्धारण में किसी का रकबा कम पाया जा रहा तो किसी का रकबा बढ़ा हुआ है। इस गड़बड़झाले को लेकर किसान, काश्तकार परेशान हैं। इसमें संशोधन का कोई विकल्प नहीं बनाया जा सका है। विभाग की इस चूक की सजा काश्तकारों को बेवजह मुकदमे में फंसकर झेलनी पड़ रही है। फौरी तौर पर रकबा संशोधन के लिए उन्हें धारा 38 के तहत तहसील स्तरीय न्यायालय में वाद दाखिल करना पड़ रहा है।
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ऐसे बननी थी रीयल टाइम खतौनी
रीयल टाइम खतौनी तैयार करने के लिए हल्का लेखपाल, कानूनगो की क्षेत्रीय टीम को मौका मुआयना कर प्रत्येक खाते की नवैयत समझनी थी। इसके बाद गाटा संख्यावार काश्तकारों का अंश निर्धारण कर रिपोर्ट प्रेषित करनी थी। इसी के आधार पर डाटा फीडिंग कर रीयल टाइम खतौनी तैयार होती तो त्रुटियों की गुंजाइश कम रहती। मगर, ऐसा नहीं हुआ। कार्यालय में बैठकर ही डाटा फीड कर दी गई।
जमीनी विवाद कम करने के उद्देश्य से अपनाई गई प्रक्रिया
शासन स्तर से रीयल टाइम खतौनी की प्रक्रिया जमीन के विवाद को कम करने के उद्देश्य से अपनाई गई थी। पहले एक ही खाता संख्या की खतौनी में कई गाटा नंबर होता था और काश्तकार भी अधिक होते थे। इससे खतौनी से काश्तकार का अंश पता नहीं चल पाता था। इसकी वजह से लोग गुमराह होते रहे, इसीलिए तय हुआ कि अब प्रत्येक गाटे की अलग खतौनी होगी और उससे संबंधित खातेदार का उसमें अंश निर्धारण भी अंकित होगा। इस नई खतौनी की नकल लेने पर राजस्व की बढ़ोत्तरी भी हो रही है।

प्रत्येक पांच वर्ष पर तैयार होती है नई खतौनी
फसली वर्ष के प्रत्येक पांचवें साल पर खतौनी को नया स्वरूप दिया जाता है। इसके तहत फसली वर्ष 1431 की खतौनी को रीयल टाइम खतौनी में रूपांतरित किया गया। इसमें खाता संख्या के बजाय प्रत्येक गाटे की खतौनी तैयार की गई। पहले एक खाता संख्या की खतौनी में कई गाटों का विवरण होता था। अब एक खतौनी में एक गाटे का ही विवरण दर्ज किया गया है। काश्तकार को अपने अंश की जानकारी इस खतौनी से हो सकेगी।
न्यायिक प्रक्रिया में उलझना मजबूरी
शासन राजस्व मुकदमों में कमी लाने पर विशेष जोर दे रहा है। मगर, यहां रीयल टाइम खतौनी की वजह से वाद की संख्या में फिर इजाफा हो रहा है। शासन स्तर से इसमें संशोधन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था न देने से काश्तकार अपना अंश निर्धारण दुरुस्त कराने के लिए धारा 38 के तहत न्यायिक प्रक्रिया में उलझ रहे हैं। इसमें दुरुस्तीकरण के लिए तहसीलों में कोई विशेष शिविर का आयोजन नहीं हो रहा है।

बैनामों पर भी पड़ने लगा असर
बैनामों में नई खतौनी अनिवार्य हो गई है। मगर, रीयल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण गलत होने से बैनामों पर असर पड़ने लगा है। काश्तकार जब बैनामे के लिए खतौनी की नकल ले रहे हैं तो गलत अंश निर्धारण देख पैरों तले उनकी जमीन खिसक जा रही है। फिर तो बैनामा छोड़ वह खतौनी दुरुस्त कराने के लिए भागदौड़ तेज कर दे रहे हैं। प्रत्येक तहसील में अब बैनामों की संख्या 30- 40 से घटकर प्रतिदिन 10 से 15 हो गई है।


रीयल टाइम खतौनी में त्रुटियों के संशोधन के लिए शासन से नई गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है। प्रार्थनापत्र पर भी जांच कराई जा रही है। धारा 38 के तहत ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
-गुलाब चंद्र, एसडीएम सदर
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