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Basti News: बंद मिले रैनबसेरा... ठंड में असहायों को आश्रय नहीं
Sat, 28 Dec 2024 11:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 28 Dec 2024 11:14 PM IST
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जिला महिला चिकित्सालय के रैनबसेरा में बैठे तीमारदार।
असहायों और निराश्रितों को ठिठुरन भरी रात काटने के लिए पड़ रहा भटकना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ठंड बढ़ने के साथ ही रैनबसेरों की जरूरत महसूस की जाने लगी है। एक सप्ताह पहले ही शहर के आधा दर्जन से अधिक रैनबसेरों को दुरुस्त करने का दावा किया गया था। मगर, अधिकतर रैनबसेरे में ताले में बंद हैं। इससे असहायों और निराश्रितों को ठिठुरन भरी रात काटने के लिए भटकना पड़ रहा है। अधिकतर रैनबसेरे कागज में ही दुरुस्त पाए जा रहे हैं। धरातल पर निराश्रितों के लिए न बिछाने के लिए बिस्तर है और न ही ओढ़ने के लिए कंबल या रजाई की व्यवस्था हैं।
शनिवार को रैन बसेरों का जायजा लेने पर अधिकतर बंद मिले। कुछ जगहों पर खुला मिला तो हालत दयनीय रही। जरूरी संसाधनों का अभाव निराश्रिताें के लिए छलावा साबित हो रहा है। शहर में पचपेड़िया स्थित आश्रय गृह, रोडवेज परिसर स्थित रैन बसेरा समेत आधा दर्जन स्थलों पर रैनबसेरा कागज में संचालित किए जा रहे हैं। महिला अस्पताल स्थित रैन बसेरा में छह बेड लगे हुए है। मगर, यहां केयर टेकर नजर नहीं आया। यहां मरीज के साथ आए तीमारदार ठहरते हैं। कलवारी निवासी अमित ने बताया कि यहां केवल बेड की व्यवस्था है। बिस्तर, कंबल और तकिया साथ लाना पड़ता है। महिला अस्पताल की मेट्रन ने बताया कि ठंड बढ़ने पर ग्राउंड फ्लोर पर तिरपाल घेर कर रैन बसेरा बनाया जाता है।
रोडवेज परिसर में बना 10 बेड का रैन बसेरा भी टिन शेड के नीचे हैं। चारों तरफ से तिरपाल घेर कर इसे ढक दिया गया है। यहां भी आसपास कोई केयर टेकर नजर नहीं आया। इसमें प्रवेश पाने के लिए रस्सी से बंधे बांस के दरवाजे को खोलना पड़ता है। भीतर बदइंतजामी के बीच महज छह चारपाई रखी हुई मिली। पूछताछ काउंटर पर पूछने पर बताया गया कि केयर टेकर रात में आते हैं और सुबह चले जाते हैं।
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बंद मिला जिला अस्पताल का रैनबसेरा
जिला अस्पताल में इमरजेंसी भवन के ऊपर बनाया गया रैन बसेरा में ताला में बंद मिला। यहां महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग रैन बसेरा बनाया गया है। यहां बने 34 बेड के रैन बसेरा के अंदर झांकने से स्पष्ट हुआ कि इसका उपयोग नहीं हो रहा है। बेड पर धूल की मोटी परत नजर आई। रैन बसेरा की देखरेख करने वाली अस्पताल की मेट्रन ने बताया कि उन्हें जल्द ही रैन बसेरा का चार्ज मिला है। यहां ठहरने वालों के लिए कंबल और चादर की व्यवस्था है। ठहरने के लिए कोई आ ही नहीं रहा है। इसलिए रैन बसेरा में ताला बंद है।
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तहसील में भी नाम मात्र का रैनबसेरा
तहसील परिसर में पुराने भवन में बनाया गया रैनबसेरा भी नाम मात्र का है। केवल रैनबसेरा लिखा हुआ बैनर लगाकर छोड़ दिया गया है। जानकार बताते हैं कि यहां कभी कोई भी निराश्रित ठहरने के लिए नहीं पहुंचता है। रात में तहसील गेट बंद होने से निराश्रित नहीं आ पाते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ठंड बढ़ने के साथ ही रैनबसेरों की जरूरत महसूस की जाने लगी है। एक सप्ताह पहले ही शहर के आधा दर्जन से अधिक रैनबसेरों को दुरुस्त करने का दावा किया गया था। मगर, अधिकतर रैनबसेरे में ताले में बंद हैं। इससे असहायों और निराश्रितों को ठिठुरन भरी रात काटने के लिए भटकना पड़ रहा है। अधिकतर रैनबसेरे कागज में ही दुरुस्त पाए जा रहे हैं। धरातल पर निराश्रितों के लिए न बिछाने के लिए बिस्तर है और न ही ओढ़ने के लिए कंबल या रजाई की व्यवस्था हैं।
शनिवार को रैन बसेरों का जायजा लेने पर अधिकतर बंद मिले। कुछ जगहों पर खुला मिला तो हालत दयनीय रही। जरूरी संसाधनों का अभाव निराश्रिताें के लिए छलावा साबित हो रहा है। शहर में पचपेड़िया स्थित आश्रय गृह, रोडवेज परिसर स्थित रैन बसेरा समेत आधा दर्जन स्थलों पर रैनबसेरा कागज में संचालित किए जा रहे हैं। महिला अस्पताल स्थित रैन बसेरा में छह बेड लगे हुए है। मगर, यहां केयर टेकर नजर नहीं आया। यहां मरीज के साथ आए तीमारदार ठहरते हैं। कलवारी निवासी अमित ने बताया कि यहां केवल बेड की व्यवस्था है। बिस्तर, कंबल और तकिया साथ लाना पड़ता है। महिला अस्पताल की मेट्रन ने बताया कि ठंड बढ़ने पर ग्राउंड फ्लोर पर तिरपाल घेर कर रैन बसेरा बनाया जाता है।
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रोडवेज परिसर में बना 10 बेड का रैन बसेरा भी टिन शेड के नीचे हैं। चारों तरफ से तिरपाल घेर कर इसे ढक दिया गया है। यहां भी आसपास कोई केयर टेकर नजर नहीं आया। इसमें प्रवेश पाने के लिए रस्सी से बंधे बांस के दरवाजे को खोलना पड़ता है। भीतर बदइंतजामी के बीच महज छह चारपाई रखी हुई मिली। पूछताछ काउंटर पर पूछने पर बताया गया कि केयर टेकर रात में आते हैं और सुबह चले जाते हैं।
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बंद मिला जिला अस्पताल का रैनबसेरा
जिला अस्पताल में इमरजेंसी भवन के ऊपर बनाया गया रैन बसेरा में ताला में बंद मिला। यहां महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग रैन बसेरा बनाया गया है। यहां बने 34 बेड के रैन बसेरा के अंदर झांकने से स्पष्ट हुआ कि इसका उपयोग नहीं हो रहा है। बेड पर धूल की मोटी परत नजर आई। रैन बसेरा की देखरेख करने वाली अस्पताल की मेट्रन ने बताया कि उन्हें जल्द ही रैन बसेरा का चार्ज मिला है। यहां ठहरने वालों के लिए कंबल और चादर की व्यवस्था है। ठहरने के लिए कोई आ ही नहीं रहा है। इसलिए रैन बसेरा में ताला बंद है।
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तहसील में भी नाम मात्र का रैनबसेरा
तहसील परिसर में पुराने भवन में बनाया गया रैनबसेरा भी नाम मात्र का है। केवल रैनबसेरा लिखा हुआ बैनर लगाकर छोड़ दिया गया है। जानकार बताते हैं कि यहां कभी कोई भी निराश्रित ठहरने के लिए नहीं पहुंचता है। रात में तहसील गेट बंद होने से निराश्रित नहीं आ पाते हैं।