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Basti News: रसोई गैस की किल्लत दूर हुई न कतार खत्म
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स्टेशन रोड स्थित एजेंसी पर उपभोक्ताओं की लगी लंबी लाइन। संवाद
बस्ती। रसोई गैस का संकट अभी बरकरार है। एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की लंबी लाइन लग रही है। स्टेशन रोड स्थित एक गैस एजेंसी पर इन दिनों सबसे अधिक भीड़ देखी जा रही है। यहां रोजाना पांच सौ से अधिक उपभोक्ता लाइन में खड़े हो रहे हैं। शहर के अन्य एजेंसियों पर भी लाइन लगनी बंद नहीं हुई है। होम डिलीवरी की व्यवस्था अभी तक सुचारू नहीं हो पाई है।
स्टेशन रोड स्थित एजेंसी पर लाइन में लगे अरविंद कुमार ने बताया कि एक हफ्ता पहले से ही उन्होंने ऑनलाइन गैस की बुकिंग करा ली है। अभी तक सिलिंडर नहीं मिला है। दो दिन से यहां आकर लाइन लगा रहे हैं। तीन चार घंटे ही पर्ची कटती है। जब तक नंबर आने को होता हैं तब तक काउंटर बंद कर दिया जा रहा है। जिससे निराश लौटना पड़ रहा है। वितरण व्यवस्था पर विभाग का भी नियंत्रण नहीं है। बुकिंग कराने के बाद भी उपभोक्ता इधर-उधर सिलिंडर के लिए भटक रहे हैं।
डीएसओ कार्यालय में सौ से अधिक फरियादा रोजाना सिलिंडर के लिए हो रही है। विभागीय लोग खुद यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि एजेंसी कर्मचारियों ने फोन उठाना बंद कर दिया है। दिन भर में भेजे गए डिलीवरी से संबंधित कुछ ही मामलों का निस्तारण एजेंसियों से हो रहा है। शेष मामलों की उपभोक्ता प्रवीन कुमार ने बताया कि एजेंसी कर्मचारी उनका पासबुक अपडेट करने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
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भारी भीड़ को चीरकर किसी तरह काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें लौटा दिया गया। एजेंसियों पर उपभोक्ताओं के साथ पूरी तरह मनमानी की जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना हैं कि आपूर्ति के हिसाब से यदि पारदर्शी ढंग से वितरण हो इतनी समस्या नहीं आएगी।
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ग्रामीण अंचल में गैस सिलिंडर के लिए गहमा-गहमी
ग्रामीण अंचल में भी गैस सिलिंडर के लिए एजेंसियों पर गहमागहमी की स्थिति है। एजेंसी संचालक और कर्मचारी अपने को चैनल या फाटक के अंदर बंद कर लिए हैं। बाहर पुलिस तैनात कर दी गई है। उपभोक्ता चाहकर भी एजेंसी कर्मचारी के पास अपनी समस्या लेकर नहीं पहुंच पा रहे हैं। लाइन खत्म होने के बाद कुछ एजेंसी अंदर से एकदम बंद कर दी जा रही है। जिससे लोग अपना कागजात भी दुरुस्त नहीं करा पा रहे हैं। भानपुर, रुधौली, बभनान, हर्रैया, लालगंज आदि ग्रामीण क्षेत्र की एजेंसियों पर दूरी के कारण विभाग की भी पहुंच नहीं बन पा रही है। यहां सिलिंडर के लिए सबसे अधिक मारामारी हो रही है।
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लगन आते ही बढ़ गई सिलिंडरों की मांग
14 अप्रैल के बाद से लगन शुरू होने वाली है। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के होटल और मैरिज हॉल लगभग बुक हो चुके हैं। इस बार मैरिज हॉल और होटल कारोबारियों ने कामर्शियल सिलिंडर का इंतजाम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि आयोजक खुद रसोई गैस का इंतजाम करके आए। एजेंसियों पर काॅमर्शियल सिलिंडर मिलना बंद हो गया है। ऐसे में लोग घरेलू सिलिंडर के लिए जुगाड़ लगाते फिर रहे हैं। जिन्हें सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है वह लोग काफी परेशान है। रजनीश कुमार बताते हैं कि सिलिंडर के लिए विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगा चुके हैं। लोग सिर्फ अधिकारियों को फोन कर दे रहे हैं। वहां पहुंचने पर उनके बात का कोई असर नहीं दिख रहा है।
कोट
रसोई गैस सिलिंडरों की आपूर्ति नियमित हो रही है। एजेंसी संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि होम डिलीवरी व्यवस्था बहाल रखा जाए। ग्रामीण क्षेत्र की एजेंसियों पर भी पूर्ति निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। पारदर्शिता के साथ रसोई गैस का वितरण कराया जा रहा है। शिकायतों को तत्काल निस्तारण भी कराया जा रहा है।
-विमल कुमार शुक्ल, डीएसओ।
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स्टेशन रोड स्थित एजेंसी पर लाइन में लगे अरविंद कुमार ने बताया कि एक हफ्ता पहले से ही उन्होंने ऑनलाइन गैस की बुकिंग करा ली है। अभी तक सिलिंडर नहीं मिला है। दो दिन से यहां आकर लाइन लगा रहे हैं। तीन चार घंटे ही पर्ची कटती है। जब तक नंबर आने को होता हैं तब तक काउंटर बंद कर दिया जा रहा है। जिससे निराश लौटना पड़ रहा है। वितरण व्यवस्था पर विभाग का भी नियंत्रण नहीं है। बुकिंग कराने के बाद भी उपभोक्ता इधर-उधर सिलिंडर के लिए भटक रहे हैं।
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डीएसओ कार्यालय में सौ से अधिक फरियादा रोजाना सिलिंडर के लिए हो रही है। विभागीय लोग खुद यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि एजेंसी कर्मचारियों ने फोन उठाना बंद कर दिया है। दिन भर में भेजे गए डिलीवरी से संबंधित कुछ ही मामलों का निस्तारण एजेंसियों से हो रहा है। शेष मामलों की उपभोक्ता प्रवीन कुमार ने बताया कि एजेंसी कर्मचारी उनका पासबुक अपडेट करने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
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भारी भीड़ को चीरकर किसी तरह काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें लौटा दिया गया। एजेंसियों पर उपभोक्ताओं के साथ पूरी तरह मनमानी की जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना हैं कि आपूर्ति के हिसाब से यदि पारदर्शी ढंग से वितरण हो इतनी समस्या नहीं आएगी।
ग्रामीण अंचल में गैस सिलिंडर के लिए गहमा-गहमी
ग्रामीण अंचल में भी गैस सिलिंडर के लिए एजेंसियों पर गहमागहमी की स्थिति है। एजेंसी संचालक और कर्मचारी अपने को चैनल या फाटक के अंदर बंद कर लिए हैं। बाहर पुलिस तैनात कर दी गई है। उपभोक्ता चाहकर भी एजेंसी कर्मचारी के पास अपनी समस्या लेकर नहीं पहुंच पा रहे हैं। लाइन खत्म होने के बाद कुछ एजेंसी अंदर से एकदम बंद कर दी जा रही है। जिससे लोग अपना कागजात भी दुरुस्त नहीं करा पा रहे हैं। भानपुर, रुधौली, बभनान, हर्रैया, लालगंज आदि ग्रामीण क्षेत्र की एजेंसियों पर दूरी के कारण विभाग की भी पहुंच नहीं बन पा रही है। यहां सिलिंडर के लिए सबसे अधिक मारामारी हो रही है।
लगन आते ही बढ़ गई सिलिंडरों की मांग
14 अप्रैल के बाद से लगन शुरू होने वाली है। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के होटल और मैरिज हॉल लगभग बुक हो चुके हैं। इस बार मैरिज हॉल और होटल कारोबारियों ने कामर्शियल सिलिंडर का इंतजाम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि आयोजक खुद रसोई गैस का इंतजाम करके आए। एजेंसियों पर काॅमर्शियल सिलिंडर मिलना बंद हो गया है। ऐसे में लोग घरेलू सिलिंडर के लिए जुगाड़ लगाते फिर रहे हैं। जिन्हें सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है वह लोग काफी परेशान है। रजनीश कुमार बताते हैं कि सिलिंडर के लिए विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगा चुके हैं। लोग सिर्फ अधिकारियों को फोन कर दे रहे हैं। वहां पहुंचने पर उनके बात का कोई असर नहीं दिख रहा है।
कोट
रसोई गैस सिलिंडरों की आपूर्ति नियमित हो रही है। एजेंसी संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि होम डिलीवरी व्यवस्था बहाल रखा जाए। ग्रामीण क्षेत्र की एजेंसियों पर भी पूर्ति निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। पारदर्शिता के साथ रसोई गैस का वितरण कराया जा रहा है। शिकायतों को तत्काल निस्तारण भी कराया जा रहा है।
-विमल कुमार शुक्ल, डीएसओ।