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ऑपरेशन करने में सक्षम हैं नैनो विज्ञान से तैयार मशीनें : प्रो. अभय

Mon, 01 Apr 2024 05:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Mon, 01 Apr 2024 05:39 AM IST
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Nano science is capable of performing operations
शिवहर्ष पीजी कॉलेज में दो दिवसीय नैनो तकनीक पर आधारित सेमिनार का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शिवहर्ष किसान पीजी कॉलेज में रविवार को उच्च शिक्षा विभाग की ओर से प्रायोजित नैनो साइंस व नैनो तकनीकी विषय पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि व केएस साकेत पीजी कॉलेज अयोध्या के प्राचार्य प्रो. अभय कुमार सिंह ने कहा कि नैनो विज्ञान अति सूक्ष्म मशीनें बनाने का विज्ञान है। ऐसी मशीनें जो इंसान के जिस्म में उतर कर, उसकी धमनियों में चल-फिर कर वहीं रोग का ऑपरेशन कर सकें।
नैनो तकनीक का प्रयोग औद्योगिक क्षेत्र में तेजी से हो रहा है। रज्जू भैया इंस्टिट्यूट के पूर्व निदेशक प्रो. देवराज सिंह ने कहा कि 21वीं सदी नैनो सदी बनने जा रही है। आज वस्तुओं के आकार को छोटा और मजबूत बनाने की होड़ मची हुई है। विभिन्न क्षेत्रों में नैनो तकनीक विकसित करने के लिए दुनिया भर में बड़े पैमाने पर शोध हो रहे हैं। अति सूक्ष्म आकार, बेजोड़ मजबूती और टिकाऊपन के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिसिन, ऑटो, बायोसाइंस, पेट्रोलियम, फॉरेंसिक और डिफेंस जैसे तमाम क्षेत्रों में नैनो टेक्नोलॉजी की असीम संभावनाएं बन रही हैं। यह तकनीक भविष्य को बदल सकती है।
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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. धीरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि इस प्रौद्योगिकी से विनिर्माण, बायो साइंस, मेडिकल साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स व रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है, क्योंकि इससे किसी वस्तु को एक हजार गुणा तक मजबूत, हल्का और भरोसेमंद बनाया जा सकता है। छोटे आकार, बेहतर क्षमता और टिकाऊपन के कारण मेडिकल और बायो इंजीनियरिंग में नेनौ टेक्नोलॉजी तेजी से बढ़ रही है।
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इसके अलावा सेमीनार में वैज्ञानिक डॉ. काजल डे, डॉ. धीरज कुमार पांडेय, डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सिंधु सिंह ने भी शोधपत्र प्रस्तुत किया। शोधार्थी रूपेश जायसवाल, मनीष श्रीवास्तव, आयुष सिंह, आर्यन श्रीवास्तव ने भी सेमीनार में अपना पत्र प्रस्तुत किया। महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. रीना पाठक ने वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नैनो तकनीक अब जीवन का हिस्सा बन चुकी है।

इसका उपयोग रोजमर्रा की जिंदगी में किया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिवेंद्र मोहन पांडेय व अभिषेक मिश्र ने किया। समन्वयक डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने वक्ताओं का परिचय कराया। मौके पर प्रो. रघुवंश मणि त्रिपाठी, प्रो. प्रदीप कुमार, प्रो. गोपालजी कुशवाहा, प्रो. राजेश सिंह, डॉ. विजय, डॉ. रोहित, डॉ. संजय, डॉ. गजेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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