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मोहित हत्याकांड : कुआनो में 18 किमी तक सर्च अभियान
Sat, 10 Aug 2024 04:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 10 Aug 2024 04:27 AM IST
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- इलहान को साथ लेकर संतकबीरनगर की सीमा तक गई पुलिस
- एसडीआरएफ की 11 सदस्यीय टीम शाम छह बजे तक करती रही प्रयास
- न्यायालय के आदेश पर शनिवार सुबह 11 बजे तक मिली है पुलिस रिमांड
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मोहित यादव का शव बरामद करने के लिए मुख्य आरोपी इलहान का रिमांड की मियाद खत्म होने वाली है। पुलिस दूसरे दिन भी उसकी निशानदेही पर कुआनो नदी में 18 किलोमीटर तक संतकबीरनगर के सीमा क्षेत्र तक तलाश करते पहुंची लकिन शव का कहीं पता नहीं चला। इलहान चंगेरवा से एक किलोमीटर पूरब दबिला पुल के ऊपर से शव फेंकने की बात बता रहा है। वहां से नदी की धारा की तरफ पुलिस एसडीआरएफ की टीम के साथ सर्च अभियान चलाते पहुंची। शनिवार को 11 बजे से पहले पुलिस उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज देगी।
पुलिस की पूछताछ में इलहान ने बताया कि 12 जुलाई को मोहित को चंगेरवा के पास मारा-पीटा गया, जब लगा कि उसकी मौत हो गई है तो बाकी लोग भाग लिए। इलहान और प्रिंस ने मिलकर मोहित यादव का शव काले रंग की सफारी में डाली और चंगेरवा से एक किलोमीटर पश्चिम कुआनो नदी के दबिला पुल के ऊपर से पानी में फेंक दिया है।
कोतवाल विजय कुमार दुबे ने बताया कि रिमांड पर लेने का मकसद हल होता नहीं दिख रहा है। बता दें कि कोतवाली क्षेत्र के पिकौरा दत्तुराय मोहल्ले में अविनाश सिंह के मकान में किराये पर रहने वाले माेहित यादव की 12 मई को अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। दिनदहाड़े अपहरण के बाद हत्या के इस केस में मोहित के मकान मालिक ने पांच नामजद व अन्य पर एफआईआर दर्ज की गई थी। लेकिन सीसीटीवी फुटेज और गिरफ्तार आरोपियों के बयान के आधार पर नाम बढ़कर 20 हो चुके हैं।
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मगरमच्छ से गुम हो गई पुलिस की सिट्टी-पिट्टी
- पुलिस के सर्च अभियान के दौरान मोहित का शव तो नहीं मिला लेकिन मगरमच्छ से पाला जरूर पड़ गया। पुलिसकर्मियों बताया कि मगरमच्छ देख उनकी हिम्मत जवाब दे गई। हालांकि इससे सर्च अभियान पर कोई असर नहीं पड़ा। देर शाम तक टीम पानी में शव तलाश करती रहीं।
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अभियुक्तों को नहीं मिलेगा कोई फायदा
- शव नहीं मिला तो भी आरोपियों की सजा पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। कारण यह कि पुलिस के पास अपहरण करने से लेकर हत्या करने, पिटाई करने, शव को लादकर ले जाने तक का वीडियो साक्ष्य मौजूद है। विधि विशेषज्ञ बताते हैं कि इसका अभियुक्तों को कोई फायदा नहीं मिलेगा। अगर वे ट्रायल के दौरान आरोप से मुकरने लगेंगे तो वीडियो साक्ष्य को झुठलाना उनके लिए आसान नहीं होगा।
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- एसडीआरएफ की 11 सदस्यीय टीम शाम छह बजे तक करती रही प्रयास
- न्यायालय के आदेश पर शनिवार सुबह 11 बजे तक मिली है पुलिस रिमांड
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मोहित यादव का शव बरामद करने के लिए मुख्य आरोपी इलहान का रिमांड की मियाद खत्म होने वाली है। पुलिस दूसरे दिन भी उसकी निशानदेही पर कुआनो नदी में 18 किलोमीटर तक संतकबीरनगर के सीमा क्षेत्र तक तलाश करते पहुंची लकिन शव का कहीं पता नहीं चला। इलहान चंगेरवा से एक किलोमीटर पूरब दबिला पुल के ऊपर से शव फेंकने की बात बता रहा है। वहां से नदी की धारा की तरफ पुलिस एसडीआरएफ की टीम के साथ सर्च अभियान चलाते पहुंची। शनिवार को 11 बजे से पहले पुलिस उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज देगी।
पुलिस की पूछताछ में इलहान ने बताया कि 12 जुलाई को मोहित को चंगेरवा के पास मारा-पीटा गया, जब लगा कि उसकी मौत हो गई है तो बाकी लोग भाग लिए। इलहान और प्रिंस ने मिलकर मोहित यादव का शव काले रंग की सफारी में डाली और चंगेरवा से एक किलोमीटर पश्चिम कुआनो नदी के दबिला पुल के ऊपर से पानी में फेंक दिया है।
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कोतवाल विजय कुमार दुबे ने बताया कि रिमांड पर लेने का मकसद हल होता नहीं दिख रहा है। बता दें कि कोतवाली क्षेत्र के पिकौरा दत्तुराय मोहल्ले में अविनाश सिंह के मकान में किराये पर रहने वाले माेहित यादव की 12 मई को अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। दिनदहाड़े अपहरण के बाद हत्या के इस केस में मोहित के मकान मालिक ने पांच नामजद व अन्य पर एफआईआर दर्ज की गई थी। लेकिन सीसीटीवी फुटेज और गिरफ्तार आरोपियों के बयान के आधार पर नाम बढ़कर 20 हो चुके हैं।
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मगरमच्छ से गुम हो गई पुलिस की सिट्टी-पिट्टी
- पुलिस के सर्च अभियान के दौरान मोहित का शव तो नहीं मिला लेकिन मगरमच्छ से पाला जरूर पड़ गया। पुलिसकर्मियों बताया कि मगरमच्छ देख उनकी हिम्मत जवाब दे गई। हालांकि इससे सर्च अभियान पर कोई असर नहीं पड़ा। देर शाम तक टीम पानी में शव तलाश करती रहीं।
अभियुक्तों को नहीं मिलेगा कोई फायदा
- शव नहीं मिला तो भी आरोपियों की सजा पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। कारण यह कि पुलिस के पास अपहरण करने से लेकर हत्या करने, पिटाई करने, शव को लादकर ले जाने तक का वीडियो साक्ष्य मौजूद है। विधि विशेषज्ञ बताते हैं कि इसका अभियुक्तों को कोई फायदा नहीं मिलेगा। अगर वे ट्रायल के दौरान आरोप से मुकरने लगेंगे तो वीडियो साक्ष्य को झुठलाना उनके लिए आसान नहीं होगा।