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Basti News: अखंड सुहाग की कामना के साथ सुहागिनों ने रखा व्रत
Wed, 27 Aug 2025 02:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 27 Aug 2025 02:24 AM IST
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बस्ती। हरितालिका तीज पर्व शुक्रवार को अटूट श्रद्धा के साथ मनाया गया। निर्जला व्रत रखकर सुहागिनों ने अखंड सौभाग्य मांगा। सुबह से देर रात तक पूजन-अर्चन हुआ। घराें से मठ-मंदिरों तक पूजा-अर्चना चलती रही। महिलाओं ने अखंड सुहाग के लिए माता पार्वती और भगवान शिव को श्रद्धा सबूरी अर्पित किया। परिवार के लिए भी मंगलकामना की गई।
महिलाओं ने भोर में व्रत शुरू किया। दिनभर निर्जला व्रत रखीं। वहीं युवतियां भी अच्छे वर की कामना के साथ इस व्रत को रखते हुए पूजा-अर्चना की। परिवार के अन्य निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं के पूजन-अर्चन में सहयोग किया।
शहर के हनुमानगढ़ी में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमानजी का दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की गई। धूप, अगरबत्ती और जलाभिषेक किया। इसके अलावा भदेश्वरनाथ मंदिर, कंपनीबाग शिव मंदिर समेत अन्य मंदिरों में पूजन-अर्चन का दौर चलता रहा।
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घरों में महिलाएं मिट्टी से निर्मित भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित कर पूजा कीं। पीला वस्त्र, केले का पत्ता, जनेऊ, सुपारी, रोली, बेलपत्र, धतूरा, शमी का पत्ता, दूर्बा, कलश, अक्षत, घी, कपूर, गंगाजल, दही, शहद के अतिरिक्त सिंदूर, बिंदिया, मेहंदी, कुमकुम को पूजा में शामिल किया।
चौकी पर प्रतिमाएं स्थापित करके माता पार्वती को अक्षत, चुनरी, फूल, फल, धूप और भगवान शिव को सफेद चंदन, बिल्वपत्र, धतूरा आदि अर्पित किया। सोलहों श्रृंगार के सामान का चढ़ावा गया। व्रतधारी महिलाएं भी सजी धजी रही। हनुमानगढ़ी मंदिर पर पुरोहित ने शिव-पार्वती की कथा सुनाई। शहर से लेकर गांव तक उल्लास का माहौल रहा।
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महिलाओं ने भोर में व्रत शुरू किया। दिनभर निर्जला व्रत रखीं। वहीं युवतियां भी अच्छे वर की कामना के साथ इस व्रत को रखते हुए पूजा-अर्चना की। परिवार के अन्य निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं के पूजन-अर्चन में सहयोग किया।
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शहर के हनुमानगढ़ी में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमानजी का दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की गई। धूप, अगरबत्ती और जलाभिषेक किया। इसके अलावा भदेश्वरनाथ मंदिर, कंपनीबाग शिव मंदिर समेत अन्य मंदिरों में पूजन-अर्चन का दौर चलता रहा।
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घरों में महिलाएं मिट्टी से निर्मित भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित कर पूजा कीं। पीला वस्त्र, केले का पत्ता, जनेऊ, सुपारी, रोली, बेलपत्र, धतूरा, शमी का पत्ता, दूर्बा, कलश, अक्षत, घी, कपूर, गंगाजल, दही, शहद के अतिरिक्त सिंदूर, बिंदिया, मेहंदी, कुमकुम को पूजा में शामिल किया।
चौकी पर प्रतिमाएं स्थापित करके माता पार्वती को अक्षत, चुनरी, फूल, फल, धूप और भगवान शिव को सफेद चंदन, बिल्वपत्र, धतूरा आदि अर्पित किया। सोलहों श्रृंगार के सामान का चढ़ावा गया। व्रतधारी महिलाएं भी सजी धजी रही। हनुमानगढ़ी मंदिर पर पुरोहित ने शिव-पार्वती की कथा सुनाई। शहर से लेकर गांव तक उल्लास का माहौल रहा।